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Fund Budjet Accounts Rules 1997

राजस्थान देवस्थान निधि बजट एवं लेखा नियम, 1997

भाग-1

प्रस्तावना

1.         इस भाग में दिये गये नियमों में जो कि राज्यपाल के अनिवार्य कार्यकारी आदेश हैं, उस प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है, जिनका अनुसरण देवस्थान विभाग के अधीनस्थ प्राधिकारियों को उन्हें सौंपे गये कार्यों के निर्वहन हेतु आवश्यक निधि प्राप्त कराने एवं खर्च करने में करना चाहिये। इन नियमों के प्रावधानों पर किसी बिन्दू पर स्थिति स्पष्ट करने में राजस्थान सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम मार्गदर्शक होंगे।

2.         इन नियमों का नाम राजस्थान देवस्थान निधि बजट एवं लेखा नियम, 97 कहलायेगा और यह नियम तुरन्त प्रभाव से लागू होंगे।

3.         इन नियमों के अन्तर्गत आने वाले मामलों में सम्बन्धित समस्त वर्तमान नियम और आदेश अतिक्रमण हो जावेंगे, किन्तु ऐसे वर्तमान नियमों और आदेशों के अनुसरण में की गई कार्यवाही इन नियमों के अधीन की गई मानी जावेगी।

4.         परिभाषायें :

1.         देवस्थान निधि : राजस्थान देवस्थान निधि का अभिप्राय देवस्थान विभाग द्वारा स्थायी रूप से अथवा अस्थायी रूप से प्रबंधित एवं नियंत्रित राजकीय आत्म-निर्भर मन्दिरान एवं अन्य संस्थाओं (जिसमें अमला निधि भी सम्मिलित है) के कोष से हैं।

2.         निधि बजट : निधि बजट से तात्पर्य देवस्थान विभाग द्वारा प्रबंधित एवं नियंत्रित राजकीय आत्मनिर्भर मन्दिरान एवं संस्थान अथवा कोई मन्दिर एवं संस्थान जिसका अस्थाई तौर पर राज्य सरकार या किसी न्यायालय निर्णय अथवा राजकीय सुपुर्दगी श्रेणी के मन्दिर की अस्थाई तौर पर विभाग द्वारा सीधे प्रबन्ध में लेने से मंदिर व संस्थान की वित्तीय वर्ष के अनुमानित आय-व्यय के लेखा से हैं।

3.         वित्तीय वर्ष : वित्तीय वर्ष वह वर्ष अभिप्रेत है जो दिनांक 1 अप्रेल से प्रारम्भ होकर 31 मार्च को समाप्त होगा।

4.         ‘‘सरकार’’ ‘‘राज्य’’ से क्रमशः राजस्थान सरकार व राजस्थान राज्य अभिप्रेत हैं।

5.         ‘‘आयुक्त’’ से आयुक्त, देवस्थान विभाग राजस्थान अभिप्रेत है।

6.         ‘‘विभागाध्यक्ष’’ से देवस्थान विभाग के विभागाध्यक्ष अभिप्रेत है।

7.         ‘‘कार्यालय अध्यक्ष’’ से विभाग के ऐसा राजपत्रित अधिकारी अभिप्रेत है जो सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम के नियम के नियम-3 के अधीन विभागाध्यक्ष द्वारा उस रूप में घोषित किया गया है।

8.         ‘‘सहायक आयुक्त’’ से सम्बन्धित क्षैत्र के सहायक आयुक्त देवस्थान से अभिप्रेत है।

9.         ‘‘निरीक्षक’’ से सम्बन्धित क्षेत्रीय निरीक्षक देवस्थान के अभिप्रेत है।

10.        ‘‘प्रभारी अधिकारी’’ से मन्दिर/संस्थान के सम्बन्धित प्रभारी अधिकारी से अभिप्रेत है।

11.        ‘‘प्रबन्धक/मैनेजर’’ से सम्बन्धित खैत्र के ‘‘प्रबन्धक/मैनेजर से अभिप्रेत है।

12.        ‘‘सक्षम प्राधिकारी’’ से राज्य सरकार अथवा कोई ऐसा अन्य अधिकारी अभिप्रेत है जिसे सरकार द्वारा सम्बन्धित शक्तियां प्रत्योजित की जाए।

13.        बजट से अभिप्रेत वित्तीय वर्ष में खण्ड के विभिन्न मंदिरों संस्थानों की अनुमानित समेकित आय व व्यय से हैं।

14.        ‘‘वास्तविक लेखा से अभिप्रेत वित्तीय वर्ष में अन्तिम वर्ष वास्तविक आय व व्यय से हैं।

15.        शीर्ष या मद से अभिप्रेत मंदिरान एवं संस्थान के वर्गीकृत आय व व्यय से हैं।

16.        विनियोजन की प्रारम्भिक इकाई मुख्य शीर्षक के अधीन विनियोजन लेखाओं की यह निम्नतम इकाई है।

17.        ‘‘प्राक्कलन अधिकारी’’ वह अधिकारी है जो मंदिरों/संस्थानों की प्राप्तियों तथा व्यय के अनुमान तैयार करने के लिये मुख्यतः उत्तरदायी है।

18         संवितरक अधिकारी से आयुक्त देवस्थान विभाग अथवा अन्य अधिकारी जिसको बैंक/कोषागार से धन आहरित करने के लिए राज्य सरकार अथवा आयुक्त, देवस्थान द्वारा अधिकृत किया गया है, अभिप्रेत है।

19.        ‘‘पुनविनियोजन’’ से अभिप्रेत आयुक्त देवस्थान द्वारा विनियोग के एक यूनिट में से दूसरे यूनिट में उसके खर्चे को पूरा करने के लिये किये गये किसी धन राशि का परावर्तन।

भाग-2

5.         बजट बनाने के लिये अधिकृत अधिकारी : निधि के वार्षिक बजट खण्ड के सहायक आयुक्त प्रतिवर्ष अप्रेल से मार्च तक की अवधि की खण्डवार बनाकर 31 दिसम्बर तक आयुक्त देवस्थान को प्रस्तुत करेंगे, लेकिन मन्दिर श्री ऋषभदेवजी जिला उदयपुर का बजट पृथक से बनेगा। प्रत्येक बजट वित्तीय स्वीकृति हेतु राज्य सरकार की 31 जनवरी तक प्रस्तुत कराये जावेंगे।

6.         नवीन व्यय : वर्ष विशेष में रखे जाने वाले नवीन व्यय के प्रस्ताव सम्बन्धित सहायक आयुक्त को 30 सितम्बर तक देवस्थान आयुक्त को प्रस्तुत करने होंगे, जिन्हें राज्य सरकार की अनुमति हेतु 15 अक्टूबर तक प्रस्तुत किये जावेंगे।

7.         निधि बजट के आय-व्यय के मद :

बजट में मद निम्नानुसार होंगे : -

आय :-

  1. किराया
  2. ब्याज                
  3. भेंट                   
  4. एन्यूटी                
  5. भूमि से आय                    
  6. अन्य                 

 

व्यय

राज्य कर्मचारी होने पर

1.

वेतन

1.

मकान किराया

2.

महंगाई भत्ता

2.

चिकित्सा भत्ता

3.

अन्य भत्ते

3.

प्रतिनियुक्ति भत्ता

4.

प्रधान कार्यालय शुल्क

4.

पेंशन अंशदान

5.

यात्रा भत्ता

 

 

6.

भोगराग

 

 

7.

सेवा पूजा

 

 

8.

उत्सव

 

 

9.

जल प्रकाष

 

 

10.

अंशकालीन कर्मचारी/संविदा द्वारा कार्य

 

 

11.

मरम्मत सम्पदा

 

 

12.

अन्य व्यय

 

 

(अ)

डाक तार टेलीफोन

 

 

(ब)

लेखन सामग्री

 

 

(स)

वर्दीयां

 

 

(द)

फर्नीचर/बर्तन का क्रय व मर मरम्मत

 

 

(य)

विविध व्यय

 

 

 8.         आय के आधार पर व्यय का प्रावधान  :

बजट की आय के आधार पर व्यय का प्रतिषत निम्न प्रकार होगा -

(अ)

संवेतन मय यात्रा एंव चिकित्सा भत्ता

30%

(ब)

प्रधान कार्यालय षुल्क

5%

(स)

भोगराग सेवा पूजा व मंदिर संबंधित अन्य व्यय

40%

(द)

मरम्मत कार्य हेंतु

10%

(ध)

अन्य व्यय

5%

(य)

सुरक्षित

10%

9.         बजट तैयार करने के निर्देश :

1.         राजस्थान बजट मेन्यूअल के प्रावधानों के आधार पर सहायक आयुक्त खण्ड का वार्षिक बजट निर्धारित प्रपत्रों में संधारित करावेगा।

2.         व्यय का अनुमानित प्राक्कलन के गत तीन वर्षो के व्यय को ध्यान में रखकर बनाया जावे, परन्तु किसी भी परिस्थिति में आय से अधिक नहीं होगा।

3.         आय व्यय का अनुमानित प्राक्कलन में संभावित आय-व्यय (स्वीकृति के अनुसार) जिसमें पूर्व वर्षों के एरियर (अवशिष्ट) यदि कोई हो तो दर्शाया जाना चाहिये। वास्तविकता से कम या अधिक आय-व्यय दर्शाना अनियमितता है। आय का अनुमानित प्राक्कलन करते समय यह पूर्ण ध्यान रखा जावे कि वास्तविक रूप से प्राप्त होने वाली आय हो दर्शावे व काल्पनिक आय नहीं दर्शाई जावे।

4.         अतिरिक्त नवीन व्यय तब तक प्राक्कलन में दर्शाया नहीं जावे जब तक आयुक्त की स्वीकृति नहीं हो।

5.         कोई भी व्यय बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के नहीं किया जावेगा, चाहे प्राक्कलन में व्यय हेतु राशि स्वीकृत कर दी गई हो।

6.         सम्बन्धित सहायक आयुक्त तैयार किये गये प्राक्कलन बजट की विधिवत जांच कर 31 दिसम्बर तक आयुक्त कार्यालय में प्रस्तुत करेंगे।

7.         आयुक्त तैयार किये गये बजट प्राक्कलन की विधिवत जांच कर 31 जनवरी तक राज्य सरकार को प्रस्तुत करेंगे।

8.         आयुक्त द्वारा प्रस्तुत प्राक्कलन की राज्य सरकार से स्वीकृति होने पर दिनांक 31 मार्च तक सम्बन्धित को उससे सूचित करेंगे।

9.         मन्दिरों पर होने वाले व्यय के समान वितरण हेतु इकजाई बजट आयुक्त स्तर पर तैयार कर नियम-8 के प्रावधनानुसार मन्दिरों पर व्यय किये जाने वाले बजट का राज्य सरकार से पूर्व अनुमोदन करावेंगे।

 10.        पुनः विनियोजन : यदि किसी कारणवष स्वीकृति बजट से अधिक किसी मद में व्यय हो जाता है तो उसका विस्तृत विवरण बजट मेन्युअल के प्रावधानों के अनुसार संबंधित सहायक आयुक्त तैयार कर देवस्थान आयुक्त को प्रस्तुत करेंगें,जिन्हें इस संबंध में पूर्ण शक्तियां पुनः विनियोजन व्यय हेतु स्वीकृत बजट की सीमा में प्रदत्त रहेगी ।

11.        वित्तीय शक्तियां :

1.         देवस्थान आयुक्त को स्वीकृत बजट प्रावधान के अनुसार वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने की पूर्ण शक्तियां होगी।

2.         सहायक आयुक्त, देवस्थान को स्वीकृत बजट प्रावधान के अन्तर्गत राजस्थान सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम भाग-1 के नियम 26 के अनुसार कार्यालय अध्यक्ष को सामान्य वित्तीय लेखा नियम पार्ट-ा में प्रदत्त शक्तियों तक का प्रयोग कर सकेंगे।

3.         देवस्थान के निरीक्षक/प्रबन्धक को क्रमशः 350/- एवं 250/- रुपये तक प्रत्येक मामले में स्वीकृत बजट के अन्तर्गत व्यय करने के अधिकार होंगे।

12.        स्वीकृत बजट में अतिरिक्त व्यय की स्वीकृति :- स्वीकृत बजट प्रावधानों के अतिरिक्त कोई विशेष कारणवश व्यय की आवश्यकता होने पर इस सम्बन्धित स्वीकृति राज्य सरकार द्वारा की जावेगी। परन्तु व्यय करने से पूर्व यह जांच की जावेगी कि ऐसे व्यय को अगले वित्तीय वर्ष के लिए टाला नहीं जा सकता।

13         शीघ्र भुगतान :- कोई भी भुगतान बिना कारण अनावश्यक रूप से रोका नहीं जावे।

14         आय-व्यय का नियंत्रण :- प्रत्येक सहायक आयुक्त प्रतिमाह के आय-व्यय का मानचित्र तैयार कर अगले माह की दिनांक 5 तक देवस्थान आयुक्त को प्रस्तुत करेंगे।

15.        बचत राशि का विनियोजन :- सहायक आयुक्त के पास वर्ष के अन्त में जितनी रकम उस वर्ष की बचत रहती है, उसे विनियोजन हेतु देवस्थान आयुक्त को भिजवा देगा। लेकिन वर्ष के अन्दर ही मेले से या किसी बिक्री से जो अतिरिक्त आय प्राप्त होती है, उसे तुरन्त विनियोजन हेतु आयुक्त को भिजवाई जावेगी।

16.        विनियोजित राशि का लेखा :- राशि का विनियोजन देवस्थान आयुक्त द्वारा कराया जाकर उनका लेखा भी उनके कार्यालय में संधारित होगा। देवस्थान आयुक्त द्वारा प्रतिवर्ष 31 मार्च के विनियोजन की स्थिति से सम्बन्धित सहायक आयुक्त को सूचित किया जावेगा। सहायक आयुक्त कार्यालय में भी उस आधार पर लेखों का संधारण होगा।

17.        आहरण करने के अधिकार :-

(क)       निजी निक्षेप (ब्याजू) खाते से राशि आहरण करने की स्वीकृति देने का अधिकार राज्य सरकार को होगा।

(ख)       निजी निक्षेप (बिना ब्याजू) खाते में तथा बैंकों के बचत खाते से पारित बिलों के अनुसार व्यय हेतु राशि आहरण करने के अधिकार देवस्थान आयुक्त/सहायक आयुक्तों को होंगे।

18.        वितरण करने का अधिकार :- पारित बिलों की राशि प्राप्त होने पर वितरण करने के अधिकार निम्न को होंगे :-

  1. आयुक्त
  2. सहायक आयुक्त
  3. निरीक्षक
  4. प्रभारी अधिकारी
  5. प्रबन्धक

19.        नियमों की व्याख्या :- इन नियमों में कोई संशय हो तो उसकी व्याख्या करने के लिए राज्य सरकार अधिकृत होगी।

FORM of Application for Re-appropriation of Funds. 

Ref : - Para 1d (d)

Part 1.

1.         Head for which funds are to be re-appropriated.

2.         Position of the grant under (1) above.

(a)                Approximate expenditure to specified date.

(b)               Antiticipated expenditure during the remainder of the year.

(c)                Total.

3.         Reasons for anticipated savings under (1) above.

4.         Amount to be re-appropriated

Part-II

5.         Head to which funds are to be transferred.

6.         Present position of the grant under 5 above.

(a)        Actual expenditure incurred up to specified date.

(b)        Anticipated expenditure during the remainder of year.

(c)        Total

7.         Full reasons for anticipated excess.

Part-III          

            Remarks of the controlling authority.

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APPENDIX "A" 

LIST OF DRAWING OFFICERS & DISBURSING OFFICERS.

Ref: Para No. 17 of the Budget Rules for Self-supporting & court of wards Temples.

Drawing officers:

1.            Commissioner, Devasthan.

2.            Assistant commissioner, Devasthan.

Disbursing Officers :

 1.            Inspector, Devasthan.

2.            Assistant Inspactor, Devasthan.

3.            Manager, Kamdar or Adhikari of the temple.

4.            Sub-Division Officer.

5.            Tehsildar.

6.            Collector.

Nodal Officer:

Telephone No.: 0294-2410330 (Office), Mobile No.: -
 

Last Updated : 25.05.2017