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NIDHI BUDGET AND ACCOUNT RULES 2014 (Draft)

 

राजस्थान देवस्थान निधि बजट एवं लेखा नियम, 2014 (प्रारूप)

भाग-1

1.         प्रस्तावना :

                        भारत के संविधान के अनुच्छेद 166 के अन्तर्गत निर्मित राजस्थान कार्य विधि नियम 21 सपठित परिषिष्ठ ‘‘‘‘ के आईटम संख्या 63 के तहत पहली अनुसूची से देवस्थान विभाग को प्रद्त्त शक्तियों के तहत् राजस्थान के आत्म निर्भर मंदिरों/संस्थाओं के संचालन व संपादन हेतु राजस्थान निधि बजट एवं लेखा नियम, 2014 बनाये जा रहे है।

2.         संक्षिप्त नाम एवं प्रभावषीलता :

                        इन नियमां का नाम ‘‘राजस्थान देवस्थान निधि बजट एवं लेखा नियम, 2014‘‘ होगा तथा ये नियम तुरन्त प्रभाव से लागू होंगे।

3.         परिभाषा :

(1)        राजस्थान देवस्थान निधि :

            ‘‘राजस्थान देवस्थान निधि‘‘ का अभिप्राय देवस्थान विभाग द्वारा स्थाई रूप से अथवा अस्थाई रूप से प्रबंधित एवं नियंत्रित राजकीय आत्म-निर्भर मन्दिरों एवं अन्य संस्थाओं के कोष से है।

(2)        निधि बजट :

            निधि बजट से तात्पर्य देवस्थान विभाग द्वारा प्रबंधित एवं नियंत्रित राजकीय आत्मनिर्भर मन्दिरों एवं संस्थाओं के नियम 7(1) व (2) के तहत किसी वर्ष के आय व व्यय के लेखों से है।

(3)        ‘‘विभाग से‘‘देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार अभिप्रेत है।

(4)        ‘‘वित्तीय वर्ष‘‘ से वह वर्ष अभिप्रेत है, जो दिनांक 1 अप्रेल से प्रारम्भ होकर उससे अगले वर्ष की 31 मार्च को समाप्त हो।

(5)        ‘‘वित्त विभाग ‘‘ से राजस्थान सरकार का वित्त विभाग अभिप्रेत है।

(6)        ‘‘सरकार’’ ‘‘राज्य’’ से क्रमशः राजस्थान सरकार व राजस्थान राज्य अभिप्रेत हैं।

(7)        ‘‘आयुक्त’’ से आयुक्त, देवस्थान विभाग, राजस्थान अभिप्रेत है।

(8)        ‘‘विभागाध्यक्ष’’ से देवस्थान विभाग के आयुक्त से अभिप्रेत है।

(9)        ‘‘कार्यालयाध्यक्ष’’ से विभाग के ऐसे राजपत्रित अधिकारी अभिप्रेत है, जो सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियमों के नियम-3 के अधीन विभागाध्यक्ष द्वारा उस रूप में घोषित किये गये हों।

(10)      ‘‘सहायक आयुक्त’’ से सम्बन्धित क्षेत्र के सहायक आयुक्त, देवस्थान अभिप्रेत है।

(11)      ‘‘निरीक्षक’’ से सम्बन्धित क्षेत्रीय निरीक्षक, देवस्थान अभिप्रेत है।

(12)      ‘‘प्रभारी अधिकारी’’ से मन्दिर/संस्थान के सम्बन्धित प्रभारी अधिकारी अभिप्रेत है।

(13)      ‘‘विभागीय प्रबन्धक/मैनेजर’’ से सम्बन्धित क्षेत्र के विभागीय प्रबन्धक/मैनेजर अभिप्रेत है।

(14)      ‘‘सक्षम प्राधिकारी’’ से राज्य सरकार अथवा कोई ऐसा अन्य अधिकारी अभिप्रेत है, जिसे सरकार द्वारा सम्बन्धित शक्तियाँ प्रत्यायोजित की जाएं।

(15)      ‘‘बजट‘‘ से अभिप्रेत वित्तीय वर्ष में खण्ड के विभिन्न मंदिरों/संस्थानों की अनुमानित समेकित आय व व्यय से है।

(16)      ‘‘वास्तविक लेखा‘‘ से अभिप्रेत संबंधित वित्तीय वर्ष  से पूर्ववर्ती अन्तिम वर्ष के वास्तविक आय व व्यय से है।

(17)      ‘‘शीर्ष या मद‘‘ से अभिप्राय संबंधित मंदिरों एवं संस्थाओं के वर्गीकृत आय व व्यय के मद से है।

(18)      ‘‘विस्तृत शीर्ष ‘‘ विनियोजन की प्रारम्भिक इकाई के रूप में विस्तृत शीर्ष मुख्य शीर्षक के अधीन विनियोजन लेखा की निम्नतम इकाई है। यह व्यय की प्रकृति एवं प्रकार का द्योतक है।

(19)      ‘‘प्राक्कलन अधिकारी’’ वह अधिकारी है, जो मंदिरों/संस्थानों की प्राप्तियों तथा व्यय के अनुमान तैयार करने के लिये मुख्यतः उत्तरदायी है।

(20)      ‘‘संवितरक अधिकारी‘‘ से आयुक्त, देवस्थान विभाग अथवा अन्य अधिकारी जिसको बैंक/कोषागार से धन आहरित करने के लिए राज्य सरकार अथवा आयुक्त, देवस्थान द्वारा अधिकृत किया गया है, अभिप्रेत है।

(21)      ‘‘पुनर्विनियोजन’’ से अभिप्रेत है सक्षम प्राधिकारी द्वारा विनियोग के एक शीर्षक में से दूसरे शीर्षक में उसके खर्चे को पूरा करने के लिये किये गये किसी धन राशि का परावर्तन।

(22)      ‘‘संशोधित अनुमान ‘‘ से तात्पर्य किसी वित्तीय वर्ष के सम्भावित राजस्व अथवा व्यय के अनुमान हैं, जो वर्ष के दौरान किसी निश्चित समय तक लेखबद्ध किये गये वास्तविक लेन देन अथवा ऐसे तथ्यों के आधार पर तैयार किये गये हां, जिसके आधार पर वर्ष के शेष भाग के बारे में स्थिति ज्ञात हो सके ।

4.         इन नियमों के प्रावधानों पर किसी बिन्दू पर स्थिति स्पष्ट करने में अथवा ऐसे प्रकरण में जिनके लिए इन नियमों में कोई निर्देष नहीं दिये गये है के संदर्भ में राजस्थान सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम, बजट नियमावली, राजस्थान लोक उपापन में पारदर्षिता अधिनियम, 2012 एवं नियम 2013 मार्गदर्षक होंगे।

भाग-2

 

5.         बजट बनाने के लिये प्राधिकृत अधिकारी :

प्रत्येक खण्ड के सहायक आयुक्त प्रतिवर्ष अप्रेल से अगले वर्ष मार्च तक की अवधि का संबंधित खण्डवार निधि का वार्षिक बजट बनाकर 30 नवम्बर तक आयुक्त, देवस्थान को प्रस्तुत करेंगे। उक्त निधि बजट विभाग की बजट निर्णायक समिति के विचारार्थ प्रतिवर्ष प्रस्तुत किया जायेगा।

6.         नवीन व्यय :

वर्ष विशेष में रखे जाने वाले नवीन व्यय के प्रस्ताव सम्बन्धित सहायक आयुक्त को 30 सितम्बर तक देवस्थान आयुक्त को प्रस्तुत करने होंगे, जिन्हें प्रषासनिक विभाग  की अनुमति हेतु 15 अक्टूबर तक प्रस्तुत किया जायेगा। प्रशासनिक विभाग द्वारा नवीन व्यय के मदों की स्वीकृति जारी की जायेगी।

 

7.         निधि बजट के आय-व्यय के मद :

            बजट में मद निम्नानुसार होंगे :

(1)        आय :

1.       किराया एवं लीज राशि

2.       ब्याज

3.       भेंट/चढ़ावा

4.       वार्षिकी (Annuity) /अनुदान

5.       कृषि भूमि की काष्त व्यवस्था से आय

6.       सतही किराया (खनन आदि से आय)

7.       अन्य आय

(2)        व्यय :

  1. भोगराग।
  2. सेवा पूजा।
  3. उत्सव एवं धार्मिक गतिविधियाँ ।
  4. जल एवं प्रकाश व्यय।
  5. पोशाक ।
  6. मंदिरों के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं संधारण तथा नया निर्माण ।
  7. मंदिरों की पूजा अर्चना, सुरक्षा, संचालन व्यवस्था से संबंधित अन्य    व्यय।
  8. निधि फण्ड में स्वीकृत पदों पर कार्यरत कार्मिकों के वेतन व अन्य देय भत्ते।

 नोटः- देवस्थान निधि बजट का  उपयोग मंदिरों की सेवा, पूजा, अर्चना, व्यवस्था, सुरक्षा संचालन आदि विभिन्न गतिविधियों में ही किया जा सकेगा । इस निधि से कार्यालय व्यय आदि मदों पर व्यय नहीं किया जावेगा।

 8.         निजी निक्षेप खाते खोलना  एवं बचत राषि का विनियोजन :

(1)        वित्त विभाग की सक्षम अनुमति से प्रधान कार्यालय, उदयपुर में एक ब्याज रहित तथा एक ब्याज अर्जित करने वाले निजी निक्षेप खाते (Non interest bearing and interest bearing personal deposit accounts) खोले जायेंगे। ब्याज अर्जित करने वाले निजी निक्षेप खाते में आत्म निर्भर मंदिरों की सम्पूर्ण आय जमा की जायेगी तथा वर्ष के अन्त में इस जमा पर प्राप्त ब्याज भी उस वर्ष की कुल आय में शामिल किया जायेगा । इसमें विभिन्न राजकीय आत्म निर्भर मंदिरों की सम्पत्तियों के अधिग्रहण या अन्य तरीके से मुआवजे, क्षतिपूर्ति आदि के पेटे कोई राषि प्राप्त होती है तो वह भी सम्मिलित होगी।

(2)        राज्य के बाहर स्थित सहायक आयुक्त कार्यालयों को छोड़कर अन्य सहायक आयुक्त कार्यालयों के मुख्यालय पर वित्त विभाग की सक्षम स्वीकृति से गैर ब्याज निजी निक्षेप खाते (Non interest bearing personal deposit accounts) खोले जायेंगे जिसमें आत्म निर्भर मंदिरों/संस्थाओं की दिन प्रतिदिन की आय जमा होगी तथा स्वीकृत बजट की सीमा तक आयुक्त की अनुमति के  अनुसार विभिन्न मदों पर व्यय करने हेतु राषि संबंधित सहायक आयुक्त द्वारा आहरित की जा सकेगी। निजी निक्षेप खाते में व्यय हेतु राषि के अभाव में सहायक आयुक्त  आयुक्त कार्यालय से बजट की सीमा में मांग कर सकेंगे।

(3) सहायक आयुक्त के पास वर्ष के अन्त में जितनी रकम उस वर्ष की बचत रहती है, उसे वह विनियोजन हेतु देवस्थान आयुक्त को भिजवा देंगे। लेकिन वर्ष के दौरान ही मेले से या अन्य स्त्रोतों से जो अतिरिक्त आय प्राप्त होती है, उसे अगले माह की 10 तारीख तक विनियोजन हेतु आयुक्त देवस्थान विभाग को भिजवायेंगे।

(4) सहायक आयुक्त को प्राप्त होने वाली राषि को तीन दिवस में पी0डी0 खाते में जमा करवाना आवष्यक होगा। विषेष परिस्थितियों में कारण अभिलिखित करते हुए कोई राषि अधिकतम 7 दिवस में जमा करवाई जा सकेगी। समय पर राषि जमा करवाने के लिए सहायक आयुक्त व्यक्तिषः जिम्मेदार होंगे।

9.         बजट तैयार करने के निर्देश :

(1)        राजस्थान बजट मेन्युअल के प्रावधानों के आधार पर सहायक आयुक्त, खण्ड का वार्षिक बजट निर्धारित प्रपत्रों में संधारित करेंगे।

(2)        आय एवं व्यय के प्राक्कलन तैयार किये जाने हेतु क्रमशः नियम 7 एवं 9 के प्रावधानों एवं उनमें देय सीमा का कड़ाई से पालन किया जायेगा। व्यय का अनुमानित प्राक्कलन गत तीन वर्षों के वास्तविक व्यय को ध्यान में रखकर बनाया जायेगा, किन्तु किसी भी परिस्थिति में यह पूर्ववर्ती वर्ष की वास्तविक आय से अधिक नहीं होगा।

(3)        प्राक्कलन में संभावित आय-व्यय में पूर्व वर्षों के बकाया (अवशिष्ट) यदि कोई हो तो उन्हें भी सम्मिलित कर दर्शाया जाना चाहिये। आय का अनुमानित प्राक्कलन तैयार करते समय यह पूर्ण ध्यान रखा जावे कि वास्तविक रूप से प्राप्त होने वाली आय ही दर्शाई जावे, काल्पनिक आय नहीं दर्शाई जावे।

(4)        संभावित आय एवं व्यय इस प्रकार प्राक्कलित किये जावें कि इनमें एवं  वास्तविक आंकड़ों में भिन्नता न रहे। आय व्यय के अनुमान में अत्यधिक कम या ज्यादा आय अथवा व्यय दिखाया जाना अनियमितता की श्रेणी में माना जायेगा।

(5)        नवीन व्यय तब तक प्राक्कलन में दर्शाया नहीं जावे जब तक की इन पर आयुक्त की स्वीकृति नहीं हो।

(6)        अनुमानों का तैयार किया जाना :

            विभागीय अनुमानों एवं अधीनस्थ कार्यालयों के अनुमानों में निम्नांकित बातें होनी चाहिऐंः-

            (क) चालू वर्ष के मंजूर शुदा आंकड़े

            (ख) चालू वर्ष के लिए संषोधित अनुमान

            (ग) आगामी वर्ष के लिए अनुमान

(7)        सम्बन्धित सहायक आयुक्त तैयार किये गये प्राक्कलन बजट की विधिवत जांच कर 30 नवम्बर तक आयुक्त कार्यालय में प्रस्तुत करेंगे।

(8)        आयुक्त, उपरोक्तानुसार खण्डों द्वारा प्रस्तुत बजट प्रावधानों की विधिवत जांच कर इस इकजाई बजट को प्रषासनिक विभाग के विचारार्थ प्रस्तुत करेंगे।

(9)        आयुक्त द्वारा प्रस्तुत बजट प्राक्कलन को राज्य सरकार से स्वीकृति प्राप्त होने के बाद संबंधित सहायक आयुक्तों को व्यय हेतु अधिकृत किया जायेगा।

(10)      कोई भी व्यय बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के नहीं किया जायेगा, चाहे प्राक्कलन में व्यय हेतु राशि स्वीकृत कर दी गई हो।

10.        पुनः विनियोजन :

            यदि किसी कारणवश स्वीकृत बजट से किसी मद में अधिक व्यय किया जाना आवश्यक हो तो उसका विस्तृत विवरण बजट मेन्युअल (बजट नियमावली) के प्रावधानों के अनुसार संबंधित सहायक आयुक्त तैयार कर आयुक्त, देवस्थान विभाग को प्रस्तुत करेंगे। आयुक्त, देवस्थान प्रषासनिक विभाग से पुनः विनियोजन की स्वीकृति प्राप्त कर स्वीकृति प्रदान कर सकेंगे।

11.        वित्तीय शक्तियाँ :

(1)        आयुक्त, देवस्थान को स्वीकृत बजट प्रावधान के अनुसार वित्तीय स्वीकृतियाँ जारी करने की पूर्ण शक्तियाँ हांगी।

(2)        सहायक आयुक्त, देवस्थान स्वीकृत बजट प्रावधान के अन्तर्गत राजस्थान सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियमों में कार्यालयाध्यक्ष को प्रदत्त शक्तियों के अनुसार व्यय कर सकेंगे।

(3)        देवस्थान के निरीक्षक/प्रबन्धक को क्रमशः 5000/- एवं 2500/- रुपये तक प्रत्येक मामले में जिसकी वार्षिक स्वीकृत बजट के अन्तर्गत क्रमषः सीमा 1,00,000 एवं 50,000 होगी व्यय करने के अधिकार होंगे।

(4) ऐसा कोई व्यय नहीं किया जावेगा जो विधि के प्रावधानों के विपरित हों।

12.        स्वीकृत बजट में अतिरिक्त व्यय की स्वीकृति :

            स्वीकृत बजट प्रावधानों के अतिरिक्त कोई विशेष कारणवश व्यय की आवश्यकता होने पर, इससे सम्बन्धित स्वीकृति, नियम 7(2) के अधीन राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जायेगी।

13.        आय-व्यय का नियंत्रण : प्रत्येक सहायक आयुक्त प्रतिमाह के आय-व्यय का मानचित्र तैयार कर अगले माह की दिनांक 5 तक देवस्थान आयुक्त को प्रस्तुत करेंगे तथा देवस्थान आयुक्त माहवार स्वीकृत बजट के अनुसार ही व्यय होना सुनिष्चित करेंगे ।

14.        विनियोजित राशि का लेखा :

राशि का विनियोजन देवस्थान आयुक्त द्वारा कराया जाकर उसका लेखा भी उनके कार्यालय में संधारित होगा। आयुक्त, देवस्थान द्वारा प्रतिवर्ष 31 मार्च के विनियोजन की स्थिति से सम्बन्धित सहायक आयुक्त को सूचित किया जायेगा। सहायक आयुक्त कार्यालय में भी उस आधार पर लेखों का संधारण होगा।

15.        आहरण करने के अधिकार :

(1)        ब्याज अर्जित करने वाले निजी निक्षेप खाते ¼Interest bearing personal deposit accounts½ से स्वीकृत बजट की सीमा तक व्यय करने हेतु आवष्यक राशि आहरण करने का अधिकार आयुक्त, देवस्थान विभाग को होगा।

(2)        यदि किन्हीं विषेष परिस्थतियों में ब्याज अर्जित करने वाले निजी निक्षेप खाते में धनराषि का आहरण स्वीकृत बजट सीमा से अधिक करना हो तो राज्य सरकार की स्वीकृति से ही ऐसा किया जायेगा ।

(3)        बिना ब्याज वाले निजी निक्षेप खाते ( Non interest bearing personal deposit accounts) में तथा बैंकों के बचत खाते से पारित बिलों के बजट प्रावधान के अनुसार व्यय हेतु राशि आहरण करने के अधिकार देवस्थान आयुक्त/ सहायक आयुक्तों को होंगे।

16.        वितरण करने का अधिकार :

            पारित बिलों की राशि प्राप्त होने पर वितरण करने के अधिकार निम्नांकित अधिकारियों/कार्मिकों को होंगेः-

  1. आयुक्त
  2. सहायक आयुक्त
  3. निरीक्षक
  4. प्रभारी अधिकारी
  5. प्रबन्धक

निधि फण्ड से आय-व्यय के ब्यौरे की प्रतिवर्ष आडिट स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग से करायी जायेगी।

 17.        नियमों की व्याख्या :

         इन नियमां में कोई संशय हो तो उसकी व्याख्या करने के लिए राज्य सरकार  सक्षम होगी।

18.        निरसन एवं व्यावृति :

            इन नियमां के प्रभाव में आने की तिथि से राजस्थान देवस्थान बजट लेखा नियम,1997 स्वतः निरस्त हो जायेंगे, किन्तु इस दिनांक तक ऐसे नियमां और आदेशों के अनुसरण में की गई कार्रवाई इन नियमों के अधीन विधिसम्मत ढंग से की गई मानी जायेगी।

19.        कठिनाइयाँ दूर करने की शक्ति :

            इन नियमों के प्रावधानों के क्रियान्वयन में यदि कोई कठिनाई उत्पन्न होती है या किसी प्रकार के विवाद की स्थिति पैदा होती है तो राज्य सरकार वांछित आदेष जारी कर सकेगी तथा इस प्रकार के आदेष अन्तिम समझे जायेंगे।

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Last Updated : 25.05.2017