Devasthan Department, Rajasthan
Marking 150th birth anniversary of Mahatma Gandhi

 

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राजस्थान सरकार
देवस्थान विभाग 
दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना
(वर्ष- 2018)

1

योजना का नाम

दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना

2

योजना प्रारंभ वर्ष

2013  (2016 से हवाई यात्रा को सम्मिलित करते हुए दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के नाम से)

3

योजना का उद्देश्य व संक्षिप्त विवरण

इस योजना का उद्देश्य राजस्थान के मूल निवासी वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष या अधिक आयु के व्यक्ति) को उनके जीवन काल में एक बार प्रदेश के बाहर देश में स्थित विभिन्न नाम निर्दिष्ट तीर्थ स्थानों में से किसी एक स्थान की यात्रा सुलभ कराने हेतु राजकीय सुविधा एवं सहायता प्रदान करना है।

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तीर्थ यात्रा हेतु अनुदान राशि

स्वयं विभाग द्वारा यात्रा का आयोजन तथा निर्धारित यात्रा का व्यय वहन

5

योजना में कुल लाभार्थियों की विभागीय सीमा

3,000    रेलमार्ग से।
7,500   वायुयान से
इसमें देवस्थान विभाग द्वारा तीर्थ स्थल हेतु आवेदकों की संख्या तथा यात्रा की संभाव्यता के आधार पर उक्त संख्या तथा अनुपात में परिवर्तन किया जा सकेगा।

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तीर्थ स्थानों की सूची:-

यात्रा हेतु तीर्थ स्थान इस प्रकार हैः- 

रेल द्वारा:- 
1. जगन्नाथपुरी           2. रामेश्वरम्         3. तिरुपति     4. द्वारकापुरी     5. वैष्णोदेवी 

हवाई जहाज द्वारा:- 

S.No.

तीर्थ स्थान का नाम

यात्रा

1

रामेश्वरम्-मीनाक्षी मंदिर, मदुरई

मदुरई तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा 

2

तिरुपति-श्रीपुरम लक्ष्मी स्वर्ण मंदिर, वेल्लोर तथा कांचीपुरम

तिरुपति या वेल्लोर तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

3

जगन्नाथपुरी-लिंगराज मंदिर-कोणार्क सूर्य मंदिर

भुवनेश्वर तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

4

वैष्णोदेवी

जम्मू तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा 

5

द्वारकापुरी-सोमनाथ (त्रिवेणी-पांच पाण्डव गुफा)/नागेश्वर

जामनगर/राजकोट/केशोड तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

6

प्रयाग (इलाहाबाद)-चित्रकूट-वाराणसी (काशी)-सारनाथ

इलाहाबाद/वाराणसी तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

7

बिहार शरीफ (नालंदा)-राजगीर-गया-बोधगया- पटना साहिब

गया या पटना तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

8

अमृतसर-आनंदपुर साहिब

अमृतसर तक हवाई जहाज द्वारा, आगे बस द्वारा यात्रा

9

श्रवणबेलगोला-मैसूर 

मैसूर/बंगलोर तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

10

सम्मेद शिखर-गया-बोधगया/पटना-पावापुरी-कुण्डलपुर (वैशाली)

रांची, पटना या गया तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा 

11

गोवा

गोवा तक हवाई जहाज

12

शिरडी- शनि सिंगनापुर- त्रयम्बकेश्वर- घृष्णेश्वर, अजन्ता-एलोरा

मुंबई/औरंगाबाद/शिरडी तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

13

कामाख्या-गुवाहाटी (राज्य संग्रहालय, कलाक्षेत्र)

गुवाहाटी तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

14

उज्जैन (महाकालेश्वर, काल भैरव मंदिर, हरसिद्धि, नवग्रह मंदिर)- ओंकारेश्वर

इंदौर तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

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हरिद्वार-ऋषिकेश-मसूरी-देहरादून

देहरादून तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

16

कोच्चि, त्रिशूर, श्री सुब्रमण्यम स्वामी मन्दिर, गुरुवायुर

कोच्ची/मदुरई तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

17

लखनऊ-अयोध्या

लखनऊ तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

नोटः-   
उक्त सूची में देवस्थान विभाग द्वारा और स्थानों को सम्मिलित अथवा कम किया जा सकेगा। 
हवाई यात्रा में कुछ दूर तक बस द्वारा यात्रा भी की जाएगी. तीर्थ यात्रा हेतु निर्धारित प्रस्थान स्थल भी विज्ञप्ति में वर्णित होंगे।

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यात्रा पर जाने के लिये पात्रता:-

इस योजना के अन्तर्गत आवेदक को निम्नलिखित शर्तें पूर्ण करनी होंगी-

  1. राजस्थान का मूल निवासी हो एवं 60 वर्ष से अधिक आयु का हो। (आयु की गणना 1 अप्रैल, 2018 को आधार मान कर की जायेगी।)
  2. आयकरदाता न हो।
  3. इस योजना के अन्तर्गत पूर्व में यात्रा न किये जाने जाने संबंधी आशय का Self-Declaration यात्री को देना होगा। यदि किसी भी समय यह पाया गया कि यात्री द्वारा इस शर्त का उल्लंघन किया गया है तो यात्रा पर हुआ सम्पूर्ण व्यय एवं उस पर 25 प्रतिशत राशि दण्डात्मक देय होगी एवं आई.पी.सी. के प्रावधानों के अन्तर्गत वसूली/दण्डात्मक कार्यवाही की जा सकेगी।
  4. भिक्षावृत्ति पर जीवन यापन करने वाले योजना के पात्र नहीं होंगे।
  5. यात्रा हेतु शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम हो और किसी संक्रामक रोग यथा टी0बी0, श्वांस में अवरोध संबंधी बीमारी, कॉरोनरी अपर्याप्तता (Coronary Insufficiency),  कॉरोनरी थ्रॉमबोसिस (Coronary Thrombosis), कांजेस्टिव कार्डियक, मानसिक व्याधि, संक्रामक कुष्ठ आदि से ग्रसित न हो।
  6. वरिष्ठ नागरिक की चिकित्सा अधिकारी द्वारा इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा की वह व्यक्ति प्रस्तावित दस दिवसीय यात्रा हेतु शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं सक्षम है।
  7. केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/केन्द्र व राज्य सरकार के उपक्रम/स्थानीय निकाय से सेवानिवृत्त कर्मचारी/अधिकारी एवं उनके जीवन साथी यात्रा के पात्र नहीं होंगे।
  8. आवेदक द्वारा पूर्व में वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना का लाभ न उठाया गया हो।
  9. वे आवेदक जो विगत वर्षों में लॉटरी में चयनित हो चुके थे, लेकिन यात्रा के लिये आमंत्रित किये जाने के बाद भी उनके द्वारा यात्रा सम्पन्न नहीं की गई, ऐसे पूर्व आवेदक भी इस योजना में पात्र नहीं होंगे।
8

निरर्हता (अपात्रता) :-

1.   यदि यह पाया गया कि आवेदक/यात्री ने असत्य जानकारी देकर या तथ्यों को छिपाकर आवेदन किया है तो उसे किसी भी समय योजना के लाभों से वंचित किया जा सकेगा।
2.   नियम 15 में वर्णित शर्तों के उल्लंघन पर भी आवेदक/ यात्री को योजना के लाभों से वंचित किया जा सकेगा।
3.   नियम 8 (1) एवं (2) के अन्तर्गत निरर्ह व्यक्ति को भविष्य में आवेदन के लिये भी निरर्ह घोषित किया जा सकेगा।

9

मूल आवेदक के साथ जीवन साथी / सहायक की यात्रा के सम्बन्ध प्रावधान :-

1. आवेदक अपने साथ जीवन साथी अथवा सहायक में से किसी एक को ले जाने हेतु अनुमत होगा। परन्तु आवेदन करते समय ही आवेदक को अपने आवेदन में ही यह बताना होगा कि उसका जीवन-साथी/सहायक भी उसके साथ यात्रा करने का इच्छुक है। 
2. आवेदक के जीवनसाथी की आयु 60 वर्ष से कम होगी, तब भी आवेदक के साथ यात्रा कर सकेगा/सकेगी।
3. जीवन साथी के साथ अर्थात् पति/पत्नी के साथ-साथ यात्रा करने पर सहायक को साथ ले जाने की सुविधा नहीं रहेगी।
4. जीवन साथी के स्थान पर सहायक को ले जाने की सुविधा तभी प्राप्त होगी जब
- आवेदक का चयन रेल यात्रा करने हेतु हुआ है
तथा आवेदक की आयु 70 वर्ष या अधिक है
तथा उसने अकेले रेल यात्रा करने हेतु आवेदन किया है.
नोट- हवाई जहाज से यात्रा करने के इच्छुक व्यक्ति के साथ सहायक यात्रा पर जाने का पात्र नहीं होगा। चूंकि रेल यात्रा में जीवन साथी न होने पर किसी सहायक को ले जाना अनुमत है लेकिन हवाई यात्रा में अनुमत नहीं है, अतः: ऐसे आवेदकों के हवाई यात्रा में चयनित होने की स्थिति में केवल मूल आवेदक ही यात्रा के पात्र होंगे, सहायक नहीं।
5. सहायक का यात्री का संबंधी होना आवश्यक नहीं है। सहायक मूल आवेदक के परिवार में से अथवा आवेदक के कोई परिचित हो सकते हैं।
6. सहायक की आयु 21 वर्ष से 50 वर्ष होगी। सहायक को यात्रा पर ले जाने की दशा में उसे भी उसी प्रकार की सुविधा प्राप्त होगी, जो कि यात्री को अनुज्ञेय है। 

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आवेदन की प्रक्रिया:-

1.   आवेदन देवस्थान विभाग के पोर्टल पर दिये गये लिंक के माध्यम से केवल ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे।
2.   आवेदक व उसके साथ जाने वाले सहायक दोनों के पास भामाशाह कार्ड अवश्य होना चाहिए।
3.   ऑनलाइन आवेदन व भामाशाह कार्ड हेतु संबंधित पोर्टल से फार्म भरा जा सकता है। ई-मित्र केन्द्र पर भी ये सुविधाएं उपलब्ध हैं। 
4.   आवेदन पत्र में अपनी पसंद के तीन तीर्थ-स्थल वरीयता क्रम (Preference) में अंकित किया जाए। 
5.   आवेदन के उपरांत उसकी प्रिंटेड प्रति सुविधा हेतु रख लें।
    नोटः- आवेदकों को सलाह दी जाती है कि आवेदन से पूर्व ही भामाशाह कार्ड हेतु पंजीयन की कार्यवाही पूर्ण कर लें। इससे आवेदक को फोटो व दस्तावेज अपलोड करने व अन्य विवरण भरने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

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आवेदन व पात्रता संबंधी अन्य मुख्य शर्तें व प्रावधान:-

1.   आवेदक को आवेदन में किन्हीं दो नाम निर्देशितियों के नाम, मोबाइल नंबर एवं अन्य विशिष्टियों का विवरण भी देना होगा, जिनसे किसी आपात स्थिति में उनसे तुरन्त संपर्क किया जा सके। 
2.   यात्रियों का चयन जिला मुख्यालय पर जिला कलक्टर द्वारा लॉटरी द्वारा किया जाएगा। चयनित यात्रियों की सूची जिला मुख्यालय एवं उपखण्ड मुख्यालय तथा देवस्थान विभाग के वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाएगी।
3.   चयनित यात्री को यात्रा से पूर्व स्वास्थ्य संबंधी निर्धारित चिकित्सकीय प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेना होगा।
4.  चयन के उपरान्त यदि किसी कारणवश आवेदक तीर्थयात्रा नहीं करता, तो उसे विभाग द्वारा निर्धारित हेल्पलाइन पर समय से पूर्व सूचना देनी आवश्यक होगी, अन्यथा उसे भविष्य में इस योजना हेतु पात्र नहीं माना जायेगा।

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चयन की प्रक्रिया:-

1.     यात्रियों का चयन जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा निम्न लिखित प्रक्रिया के अन्तर्गत किया जाएगा.
2.     प्रत्येक स्थान की यात्रा हेतु जिलावार कोटा निर्धारित किया जायेगा, जिसमें आवेदकों की संख्या के साथ उस जिले के वरिष्ठ नागरिकों की जनसंख्या के अनुपात को अधिभार देते हुए कोटा निर्धारित किया जायेगा. यदि निर्धारित कोटे से अधिक संख्या में आवेदन प्राप्त होते हैं, तो लॉटरी (कम्प्यूटराईज्ड ड्रा आफ लाट्स) द्वारा यात्रियों का चयन किया जायेगा। कोटे के 100 प्रतिशत अतिरिक्त व्यक्तियों की प्रतीक्षा सूची (Waiting List) भी बनायी जायेगी। आवश्यकतानुसार शेष अन्य आवेदकों की भी अतिरिक्त आरक्षित सूची (Additional Reserve List) भी बनायी जा सकेगी।
3.     चयनित यात्री के यात्रा पर न जाने की स्थिति में प्रतीक्षा सूची में सम्मिलित व्यक्ति को यात्रा पर भेजा जा सकेगा। इसमें भी यात्री कम पड़ने पर अतिरिक्त आरक्षित सूची से बुलाया जा सकेगा. प्रतीक्षा सूची एवं अतिरिक्त आरक्षित सूची में से यात्रा हेतु चयन मूल चयन सूची में से यात्रियों के उपलब्ध न होने पर ही किया जायेगा ।
4.     लॉटरी निकालते समय आवेदक के साथ उसकी पत्नी अथवा पति या सहायक को एक मानते हुए लॉटरी निकाली जायेगी एवं लॉटरी में चयन होने पर यात्रा के लिये उपलब्ध बर्थ/सीटों में से उतनी संख्या कम कर दी जायेगी। 
5.     रेल एवं हवाई यात्रियों की लॉटरी एक साथ निकाली जायेगी, सबसे पहले हवाई यात्रा हेतु लॉटरी निकाली जायेगी, उसके उपरान्त शेष में से रेल यात्रा हेतु यात्रियों का चयन किया जायेगा।
6. चयनित यात्रियों एवं प्रतीक्षा सूची को देवस्थान विभाग के पोर्टल, कलक्टर कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर एवं अन्य ऐसे माध्यम से हो कि उचित समझे, प्रसारित किया जायेगा।
7.     केवल वह व्यक्ति ही जिसका चयन किया गया है, यात्रा पर जा सकेगा। वह अपने साथ अन्य किसी व्यक्ति को नहीं ले जा सकेगा।.  

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यात्रा की प्रक्रिया:-

1.     जिला कलक्टर द्वारा चयनित यात्रियों की सूची देवस्थान विभाग द्वारा निर्धारित एजेन्सी को सौंपी जायेगी। 
2.     निर्धारित एजेन्सी यात्रियों के समूह को यात्रा पर ले जाने की व्यवस्था करेगी।
3.     यात्रियों के यात्रा व्यय एवं उन्हें उपलब्ध कराये जाने वाली सुविधाओं का विनिश्चय देवस्थान विभाग / राज्य सरकार द्वारा किया जायेगा।
4.     यात्रियों के साथ अनुरक्षक(एस्कार्ट) के रूप में देवस्थान विभाग, राजस्व, पर्यटन विभाग के राजकीय अधिकारियों/ कर्मचारियों को भेजा जायेगा। इन विभागों के कर्मचारियों के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अन्य विभागों एवं राजकीय निगम/ मण्डल/ आयोग के अधिकारियों के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अन्य विभागों एवं राजकीय निगम/मण्डल/आयोग के अधिकारियों /कर्मचारियों को भी भेजा जा सकेगा। उक्त व्यवस्था पर होने वाला व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। प्रत्येक ट्रेन में एक अधिकारी ट्रेन प्रभारी के रूप में लगाया जायेगा। देवस्थान विभाग द्वारा अतिरिक्त रूप से अपने विभागीय ट्रेन प्रभारी लगाये जा सकेंगे।
5.     यात्रियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्था जिला स्तरीय गठित समिति द्वारा सुनिश्चित की जायेगी।
6.    एक बार यात्रा शुरू करने पर यात्री यदि बीच में यात्रा छोड़ना चाहेगा. तो उसे ऐसी सुविधा सरकार की ओर से नहीं दी जायेगी।
7. हवाई यात्रा में चयन होने पर यात्रियों को निर्धारित तीर्थ स्थान के नजदीकी एयरपोर्ट तक हवाई जहाज द्वारा तथा वहां से तीर्थ स्थान तक बस द्वारा यात्रा करवाई जायेगी।
8. सभी तीर्थ यात्रियों को यात्रा हेतु निर्धारित प्रस्थान स्थल (रेलवे स्टेशन / एयरपोर्ट)  तक स्वयं के व्यय से पहुंचना होगा।

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यात्रियों के समूह:-

यात्रा केवल सामूहिक रूप से आयोजित की जायेगी। उक्त समूहों का निर्धारण राज्य सरकार अथवा सरकार द्वारा अधिकृत प्राधिकारी/एजेन्सी द्वारा किया जायेगा। किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम संख्या में यात्री उपलब्ध होने पर ही यात्रा प्रारंभ की जायेगी। योजना के अन्तर्गत चयन होने मात्र से ही किसी व्यक्ति को यात्रा कराने हेतु राज्य सरकार बाध्य नहीं होगी।

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अन्य व्यक्तियों के यात्रा करने पर प्रतिबन्ध:-

केवल वह व्यक्ति ही, जिसका चयन इस योजना के अन्तर्गत यात्रा हेतु किया गया है, इस यात्रा पर जा सकेगा। वह अपने साथ अन्य किसी व्यक्ति को, भले ही वह यात्रा का व्यय देने हेतु तैयार हो, यात्रा में साथ नहीं ले जा सकेगा। ट्रेन एवं वाहनों में केवल चयनित व्यक्ति ही यात्रा करेगा और एक सीट/बर्थ पर केवल एक ही व्यक्ति यात्रा करेगा।

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अतिरिक्त व्यय के संबंध में:-

यदि कोई यात्री, यात्रा के दौरान सरकार द्वारा निर्धारित मापदण्डों/ सुविधाओं के अतिरिक्त सुविधायें प्राप्त करना चाहता है तो उसका भुगतान उसे स्वयं करना होगा।

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यात्रा के दौरान अपेक्षाएँ:-

1.   यात्री किसी तरह के ज्वलनशील पदार्थ या मादक पदार्थ किसी भी रूप में साथ नहीं ले जा सकेंगे।
2.   यात्री अपने साथ कोई मूल्यवान वस्तु तथा आभूषण आदि भी नहीं ले जा सकेंगे।
3.   यात्री तीर्थ की मर्यादा के अनुसार आचरण करेंगे, ताकि प्रदेश की छवि अन्यथा प्रभावित न हों।
4.   यात्री अपने निर्धारित सम्पर्क अधिकारी के निर्देश का पालन करेंगे।
5.   यात्रियों द्वारा उपरोक्त आचार संहिता के पालन करने संबंधी आशय का शपथ पत्र दिया जायेगा।

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यात्रा के दौरान अप्रत्याशित परिस्थितियाँ:-

यात्रा के दौरान होने वाली किसी दुर्घटना अथवा कठिनाई के लिये राज्य शासन अथवा उसका कोई अधिकारी/ कर्मचारी उत्तरदायी नहीं होगा।

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योजना का व्यय:-

योजना के क्रियान्वयन हेतु व्यय (बजट सीमा तक) जिसमें यात्रा व्यय, अन्य प्रशासनिक व्यय तथा परिवहन, दूरभाष, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार, व्यावसायिक एवं परामर्श सेवायें प्राप्त करना, सत्कार व्यय तथा यात्री बीमा व्यय आदि सम्मिलित हैं, करने के लिये प्रमुख शासन सचिव/ शासन सचिव, देवस्थान/ आयुक्त, देवस्थान विभाग सक्षम होंगे।

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संचालक:-

योजना के दिन प्रतिदिन संचालन/ मोनिटरिंग हेतु एक अधिकारी की नियुक्ति की जायेगी। उसको आवश्यकतानुसार वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियां देवस्थान विभाग द्वारा प्रत्यायोजित की जा सकेगी।

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परिभाषाएँ:-

इन नियमों में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो- 
(क) ‘‘तीर्थ स्थान’’  से तात्पर्य उस स्थान/स्थानों से है जो कि देवस्थान विभाग द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किये जायें।
(ख) ‘‘यात्रा’’ से तात्पर्य नियम 3 (क) में उल्लेखित स्थान की यात्रा एवं उक्त स्थान की यात्रा के लिये की गई आनुषंगिक यात्राओं से है।
(ग) ‘‘यात्री’’ से तात्पर्य उस व्यक्ति/व्यक्तियों के समूह से है जो नियम 3 (क) में उल्लेखित स्थान/ स्थानों की यात्रा प्रारंभ करता है।
(घ) ‘‘आवेदक’’ से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति/ व्यक्तियों के समूह से है जो कि नियम 3(क) में उल्लेखित स्थान की यात्रा करने हेतु आवेदन प्रस्तुत करता है।
(ड) ‘‘सहायक’’ से तात्पर्य उस पुरुष/महिला से है जो कि 70 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के आवेदक के साथ यात्रा पर जाता है। सहायक की पात्रता 21 से 50 वर्ष होगी।
(च) ‘‘कोटा’’ से तात्पर्य यात्रियों की उस संख्या से है जो राज्य सरकार/ देवस्थान विभाग राज्य, जिला अथवा अन्य प्रकार से निर्धारित करें।
(छ) ‘‘एजेन्सी’’ से तात्पर्य उस संस्था अथवा संगठन से है जिसका चयन राज्य सरकार इस नियम के अन्तर्गत यात्राएँ आयोजित करने हेतु करे। रेल यात्रा हेतु प्रथमतः आई.आर.सी.टी.सी. के पैकेज के अनुसार यात्रियों को भेजा जाएगा। किसी तीर्थ के लिये चयनित आवेदकों की संख्या कम रहने पर बस की व्यवस्था भी की जा सकेगी।
(ज) ‘‘संचालक’’ से तात्पर्य उस अधिकारी से है, जिसे योजना के संचालन हेतु देवस्थान विभाग द्वारा अधिकृत किया जाये।
(झ) ‘‘जीवन साथी’’ से तात्पर्य यात्री की पुरुष अथवा पति से है। 
(ञ) ‘‘अनुरक्षक’’ (एस्कार्ट) से तात्पर्य उस अधिकारी / कर्मचारी अथवा व्यक्ति से है, जो आवेदक/ आवेदकों के साथ राज्य सरकार की ओर से यात्रा पर भेजा जाएगा।

22

तीर्थयात्रा योजना हेतु राज्य स्तर पर प्रबंध व्यवस्था:-

विभिन्न तीर्थ स्थानों की यात्रा हेतु यात्रियों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य स्तर पर देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा।
1. इस हेतु देवस्थान मंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तर पर वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा समिति का गठन किया जायेगा।
2. उक्त समिति में निम्नानुसार सदस्य होंगे-

I

देवस्थान मंत्री

अध्यक्ष

II

राज्य मंत्री/उपमंत्री

सह अध्यक्ष

III

अतिरिक्त मुख्य सचिव, देवस्थान विभाग

सदस्य

IV

अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग

सदस्य

V

प्रमुख शासन सचिव, पर्यटन

सदस्य

VI

प्रमुख शासन सचिव, अल्प संख्यक मामलात्

सदस्य

VII

प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग

सदस्य

VIII

आयुक्त, देवस्थान विभाग

सदस्य-सचिव

समिति के किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण समिति की कार्यवाही को प्रश्नगत नहीं किया जायेगा।

23

तीर्थयात्रा योजना हेतु देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार के कर्तव्यः-

1-राज्य सरकार निम्नलिखित कर्तव्यों का निर्वहन करेगीः-

वरिष्ठ नागरिकों की यात्राओं के लिये आवश्यक और उपयोगी जानकारी का संग्रहण एवं प्रचार-प्रसार।

यात्रियों की शिकायतों/ समस्याओं को स्थानीय अधिकारियों के ध्यान में लाकर उनका निराकरण करना।

यात्रियों की सुविधा के उद्देश्य से अन्य आवश्यक कार्य करना एवं सुझाव देना।

अन्य कार्य जो समय-समय पर सरकार द्वारा सौंपे जाये।

2-समिति अपने कर्तव्यों की पूर्ति के लिये समय-समय पर उप समितियाँ बना सकेगी।

24

तीर्थयात्रा योजना हेतु जिला स्तर पर प्रबंध समिति:-

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना हेतु जिला स्तर पर चयन एवं समुचित प्रबंध व्यवस्था समिति प्रभारी मंत्री/शासन सचिव की अध्यक्षता में राज्य सरकार गठित करेगी जिसमें जिला स्तर के निम्न सदस्य सम्मिलित होंगे-

1.

प्रभारी मंत्री/शासन सचिव

-

अध्यक्ष

2.

जिला कलक्टर

-

सदस्य

3.

पुलिस आयुक्त/अधीक्षक

-

सदस्य

4.

मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद

-

सदस्य-सचिव

5.

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

-

सदस्य

6.

उपनिदेशक, पर्यटन विभाग

-

सदस्य

7.

सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग

-

सदस्य

जिले के प्रभारी मंत्री/शासन सचिव की अनुपस्थिति में कलक्टर, समिति की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे।
समिति के किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण समिति की कार्यवाही को प्रश्नगत नहीं किया जायेगा।

25

तीर्थयात्रा योजना हेतु जिला स्तर पर प्रबंध समिति के कर्तव्यः-

1- जिला स्तरीय प्रबंध समिति निम्नलिखित कर्तव्यों का निर्वहन करेगीः-
(क) यात्रियों का चयन इसी समिति द्वारा किया जाएगा।
(ख) वरिष्ठ नागरिकों की यात्राओं के लिये आवश्यक उपयोगी जानकारी का संग्रहण एवं प्रचार- प्रसार।
(ग) यात्रियों की शिकायतों/समस्याओं को स्थानीय अधिकारियों के ध्यान में लाकर उनका निराकरण करना।
(घ) यात्रियों की सुविधा के उद्देश्य से अन्य आवश्यक कार्य करना एवं सुझाव देना।
(ड.) अन्य कार्य जो समय-समय पर सरकार द्वारा सौंपे जायें।
2- समिति अपने कर्तव्यों की पूर्ति हेतु समय-समय पर उप-समितियाँ बना सकेगी.

26

अन्य:-

उपरोक्त वर्णित नियमों में प्रावधान होते हुए भी योजना के क्रियान्वयन हेतु संसाधनों की उपलब्धता सुलभ कराने एवं प्रशासनिक निर्णय, जिसमें वित्तीय व्यय (बजट प्रावधान की सीमा तक) भी सम्मिलित हैं, के लिये आयुक्त, देवस्थान विभाग अधिकृत होंगे।

27

योजना का निर्वचन:-

उक्त विवरण केवल सरल संकेतक है। योजना संबंधी अन्य शर्तों, प्रावधानों के लिये मूल विभागीय आदेश व परिपत्रों का अवलोकन करें। विभाग द्वारा नियमों के अध्यधीन उपनियम बनाए जा सकेंगे।
योजना संबंधी किसी भी बिन्दु पर समस्या समाधान आयुक्त कार्यालय देवस्थान विभाग, उदयपुर से किया जा सकेगा। इस योजना के किसी भी दिशा निर्देश, आदेश की व्याख्या के लिये देवस्थान विभाग राजस्थान सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा।


Nodal Officer:- Dr. Priyanka Bhatt, Dy. Commissioner
Devasthan Department, Udaipur
Telephone No.: 0294-2524813 (Office), Mobile No.: - 94616-59777

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