Devasthan Department, Rajasthan

वार्षिक रिपोर्ट

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राजस्थान सरकार 
देवस्थान विभाग 
वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन वर्ष 2018-19

भाग-1

विभागीय परिचय, कार्य-कलाप, उद्देश्य एवं प्रतिबद्धतायें

-:विभागीय परिचय:-

देवस्‍थान विभाग मन्दिर संस्‍कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन का विभाग है। इस विभाग का गठन भूतपूर्व राजपूताना राज्‍य की  छोटी-बडी 22 रियासतों के विलीनीकरण के पश्‍चात, पूर्व देशी राज्‍यों द्वारा राजकोष के माध्यम से संचालित मन्दिरों, मठों, धर्मशालाओं आदि के प्रबंधन एवं सुचारू संचालन हेतु वर्ष 1949 में बने वृहत् राजस्‍थान राज्‍य के साथ-साथ हुआ.

राजस्‍थान  का गौरवशाली अतीत पूर्व शासकों की धार्मिक निष्‍ठा एवं धर्म पालन के  बलिदानों के लिए विख्‍यात है। देशी राज्‍यों के अनेक शासकों ने रियासत का राजा स्वयं को नहीं मानकर अपने इष्‍ट देवता के नाम की मोहरें एवं राजपत्र में अंकित मुद्राओं से शासन किया। ऐसे में राजस्थान के राजाओं और राजकुलों ने विपुल संख्या में मंदिरों, धार्मिक स्‍थलों और धर्मशालाओं का न केवल राजस्‍थान में निर्माण कराया अपितु  राज्‍य के बाहर भी अनेक मन्दिर एवं धर्म स्‍थलों का निर्माण कराया है ,

विभिन्न तीर्थ स्‍थलों पर बने राज्‍य के मन्दिर एवं पूजा स्‍थल मध्‍यकाल से ही धार्मिक, नैतिक, सामाजिक, आध्‍यात्मिक तथा शैक्षणिक प्रवृत्तियों के केन्‍द्र रहे हैं। इनके माध्‍यम से ज्‍योतिष, आयुर्वेद, कर्मकाण्‍ड, धर्मशास्‍त्र, संगीत, शिल्‍प, चित्रकला, मूर्तिकला, लोकगीत, भजन, नृत्‍य परम्‍परा आदि का संरक्षण, प्रसार एवं प्रशिक्षण होता रहा है। इस प्रक्रिया में अनेक धर्मज्ञ विद्वानों, निराश्रितों, विद्यार्थियों, साधु-संतों को सहयोग, प्रोत्‍साहन एवं संरक्षण भी मिलता रहा है। समय के अनुरूप सामाजिक परिवर्तनों के उपरान्‍त भी ये मन्दिर एवं पूजा स्‍थल आज भी धार्मिक सौहार्द व सामाजिक आवश्‍यकताओं की पूर्ति में महत्‍वपूर्ण भूमि‍का निभा रहे हैं। प्राचीन स्‍थापत्‍य कला, शिल्‍पकला व चित्रशालाओं के ये अनूठे भण्‍डार अर्वाचीन भारत की अमूल्‍य निधि है। नवीन राजस्‍थान राज्‍य के निर्माण के पश्‍चात इस विपुल मन्दिर संपदा के प्रबंध व संरक्षण का उत्‍तरदायित्‍व वर्तमान देवस्‍थान विभाग के पास है।

वर्तमान देवस्‍थान विभाग विरासत में प्राप्‍त ऐसी ही धार्मिक एवं पुण्‍य प्रयोजनार्थ स्‍थापित संस्‍थाओं एवं राजकीय मन्दिरों, मठों, लोक प्रन्‍यासों का नियमन करने, उनके प्रशासन हेतु मार्गदर्शन देने, उन्‍हें आर्थिक सहयोग देने जैसे धार्मिक एवं सामाजिक कर्तव्‍यों का निर्वहन करता है।

प्रारंभिक वर्षों में देवस्‍थान विभाग की पहचान मात्र मन्दिरों की सेवा-पूजा और उनकी सम्‍पत्ति के प्रबंधकर्ता विभाग की रही है, किन्‍तु कालांतर में परिवर्तित परिस्थितियों के अनुसार समय-समय पर राज्‍य सरकार द्वारा विभागीय कार्यकलापों का विस्‍तार किया गया तथा नवीन दायित्‍व सौंपे गये ।

ऐसे ही राज्य गठन के एक दशक के बाद ही नवीन आवश्यकताओं के अनुसार राजस्‍थान सार्वजनिक प्रन्‍यास अधिनियम, 1959 अस्तित्व में आया और इसके साथ ही न्‍यासों का पंजीकरण, शिकायतों की जांच और उनके पर्यवेक्षण का दायित्व सौंपा गया.

इसी प्रकार भूमि सुधार कार्यक्रमों के फलस्‍वरूप मन्दिरों / मठों की भूमियों के पुन: ग्रहण के पश्‍चात निर्धारित वार्षिकी के भुगतान तथा मन्दिरों / संस्‍थाओं का सहायता अनुदान स्‍वीकृत करने के कार्यकलाप भी इस विभाग के कार्यक्षेत्र में विस्‍तारित हुए है।

समय के साथ राज्‍य सरकार द्वारा विभाग का बजट बढ़ाया गया है, मन्दिरों एवं संस्‍थाओं के अनुरक्षण एवं जीर्णोद्धार हेतु बड़ी परियोजनाएँ बनाई और क्रियान्वित की गयी हैं, विभागीय मन्दिरों एवं संस्‍थाओं ही नहीं, ट्रस्ट द्वारा संचालित व अन्य धर्म-स्थलों का भी विकास किया गया है, मंदिर परिसर ही नहीं, सड़क, ड्रेनेज, यात्री विश्राम स्थल आदि सुविधाओं और आधारभूत संरचनाओं के विकास पर भी प्रचुर व्यय किया गया है. शासन की नवीन नीति में तीर्थाटन एवं देशाटन को बढावा देने हेतु नयी योजनाएँ बनाई गयी हैं. राज्य के तीर्थयात्रियों को राज्य से बाहर तीर्थयात्रा की अनेक योजनाएँ संचालित हैं, जिसमें भारत के विभिन्न पर्यटन व तीर्थ स्थानों की निःशुल्क यात्रा व्यवस्था की जाती है.

विभागीय कार्य-कलाप, उद्देश्य एवं प्रतिबद्धताएं
देवस्थान विभाग द्वारा मुख्यतया निम्नांकित कार्य संपादित किये जाते हैः-

  • राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार (Direct Charge), राजकीय आत्म निर्भर (Self-Supporting) एवं सुपुर्दगी (Handed Over) श्रेणी के मंदिरों एवं धार्मिक संस्थानों की संपदाओं का प्रबन्ध एवं नियंत्रण व पूजा, नैवेद्य, आरोगण, उत्सव आदि की व्यवस्था।
  • राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास अधिनियम, 1959 एवं नियम- 1962 के अन्तर्गत पंजीयन योग्य सार्वजनिक प्रन्यासों का पंजीकरण, पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण संबंधी कार्य।
  • मंदिरों, धार्मिक एवं पुण्यार्थ संस्थाओं को सहायतार्थ नकद अनुदान राशि का भुगतान तथा तत्सम्बन्धी नियंत्रण।
  • मंदिरों एवं धार्मिक तथा पुण्यार्थ संस्थाओं आदि की माफी व जागीरों के पुनर्ग्रहण किये जाने के फलस्वरूप जागीर विभाग द्वारा निश्चित की गई शाश्‍वत वार्षिकी का प्रतिवर्ष राजस्व अधिकारियों द्वारा निश्चित किश्तों में भुगतान एवं नियंत्रण।
  • प्रमुख राजकीय धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थानों पर यात्रियों की सुविधा के लिए धर्मशालाओं व विश्रान्तिगृहों का निर्माण एवं उनके संरक्षण व संचालन की व्यवस्था करना तथा उनके विकास की योजनायें क्रियान्वित करना।
  • मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों के वंश-परंपरागत नियुक्त महन्तों, पुजारियों, मठाधीशों आदि के उत्तराधिकारी की नियुक्ति करना व तत्सम्बन्धी कार्यवाही।
  • राजकीय मंदिरों के बहुमूल्य जेवरात व अन्य वस्तुओं का मूल्यांकन व सत्यापन करना।
  • धर्मार्थ एवं पुण्यार्थ कृत्यों हेतु आयोजित होने वाले मेलों, उत्सवों, यज्ञ इत्यादि को प्रोत्साहन देना एवं राजकीय मंदिरों में धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन करना ।
  • मंदिर संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु विभिन्न कार्य योजनाओं को क्रियान्वित करना तथा राजस्थान राज्य के प्रमुख मंदिरों एवं तीर्थ स्थलों के संबंध में जनहितार्थ सामग्री का प्रकाशन-प्रसारण एवं अभिलेखों का संग्रहण करना एवं तीर्थाटन व देशाटन को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न कार्य योजनाओं को क्रियान्वित करना ।
  • राजकीय मंदिरों (धर्मस्थानों) एवं धर्मार्थ पुण्यार्थ संस्थानों की संपदाओं के अतिक्रमियों को बेदखल करना एवं राजस्थान सरकारी स्थान (अप्राधिकृत अधिवासियों की बेदखली) अधिनियम, 1964 के प्रावधानों की क्रियान्विति।
  • राजकीय मंदिरों (धर्मस्थानों), धर्मार्थ एवं पुण्यार्थ संस्थानों की श्रेणी का निर्धारण।

यहाँ उल्लेखनीय है कि मंदिरों एवं धर्मस्थलों की प्रकृति व श्रेणी अलग-अलग प्रकार की हो सकती है, जिनमें देवस्थान विभाग के द्वारा प्रत्यक्षतः  केवल राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार (Direct Charge), राजकीय आत्म निर्भर (Self-Supporting) एवं सुपुर्दगी (Handed Over) श्रेणी के मंदिरों एवं धार्मिक संस्थानों की संपदाओं का प्रबन्ध एवं नियंत्रण व पूजा, नैवेद्य, आरोगण, उत्सव आदि की व्यवस्था की जाती है।

राज्य में विद्यमान विभिन्न श्रेणी के मंदिरों का विवरण

क्रम सं.

मंदिर

विवरण

1

राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी मंदिर

विलीनीकरण के पश्चात वर्तमान राज्य शासन को उत्तरदायित्व में प्राप्त हुये मन्दिर, जिनकी परिसम्पतियों का सीधा प्रबंधन एवं नियंत्रण देवस्थान विभाग के द्वारा किया जाता है।

2

राजकीय आत्म निर्भर श्रेणी मंदिर

विलीनीकरण के पश्चात वर्तमान राज्य शासन को उत्तरदायित्व में प्राप्त हुये मन्दिर, जिनकी परिसम्पतियों के प्रबंधन हेतु देवस्थान विभाग के द्वारा उनके पुजारियों को अधिकृत किया गया है।

3

राजकीय सुपुर्दगी श्रेणी मंदिर

सुपुर्दगी श्रेणी के मंदिरों के प्रबंध एवं सम्पति के रख-रखाव का दायित्व संबंधित सुपुर्दगार का होता है। इनमें सुपुर्दगार के रूप में कुछ मंदिर प्रन्यास के अधीन श्रेणी के मंदिर भी हैं। इसके अन्तर्गत मुख्यतः दो प्रकार के मंदिर हैं:-

  1. पूर्व देशी राज्यों के शासकों द्वारा विभिन्न पण्डितों/महन्तों/गोस्वामियों/विद्वानों एवं संस्थाओं को सेवा पूजा एवं सम्पति की देखभाल हेतु सुपुर्द किये गये मन्दिर
  2. देवस्थान विभाग द्वारा कालान्तर में विभिन्न संस्थाओं/व्यक्तियों को सुपुर्द किये गये मन्दिर

4

राजकीय सहायता प्राप्त मंदिर

विलीनीकरण के पूर्व रियासतों द्वारा मन्दिरों की सेवा-पूजा धूप-दीप नैवेद्य आदि के लिये स्वीकृत की गई सहायता राशि /सहायता अनुदान का परम्परागत वार्षिक भुगतान वाले मंदिर।

5

वार्षिकी (एन्यूइटी) प्राप्त मंदिर

मन्दिरों/मठों की जागीरों के पुनर्ग्रहण के फलस्वरूप जागीर विभाग द्वारा निर्धारित वार्षिकी (एन्यूटी) वाले मंदिर।

6

मंदिर मंडल अधिनियम के अंतर्गत मंदिर

ऐसे मंदिर जिनके लिए पृथक से विशेष मंदिर मण्डल अधिनियम बनाये गये हैं। ऐसे मंदिरों की संख्या केवल दो हैः-

  1. श्रीनाथ जी मंदिर, नाथद्वारा, राजसमंद, राजस्थान
  2. साँवलिया जी मंदिर, चितौडगढ़, राजस्थान

7

प्रन्यास के अधीन मंदिर

राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास अधिनियम 1959 के प्रावधानों के अन्तर्गत गठित प्रन्यासों (ट्रस्टों) के अधीन मंदिर। इनमें कुछ मंदिर सुपुर्दगी श्रेणी के मंदिर भी हैं।

8

ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान माफी/कृषि भूमि वाले अपंजीकृत/पंजीकृत मंदिर

राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे मंदिर भी हैं जो न तो देवस्थान विभाग के प्रत्यक्ष रूप से अधीन है और न ही देवस्थान विभाग में राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास अधिनियम के अन्तर्गत गठित प्रन्यासों (ट्रस्टों) के अधीन हैं। इनके प्रबंधन हेतु प्रशासनिक सुधार विभाग के आदेश दिनांक 07.12.2009 के अन्तर्गत उपखण्ड अधिकारी की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय समिति गठित हैं।

9

निजी मंदिर

ऐसे मंदिर जो कालान्तर में निजी रूप में बनवाये गये हैं।

10

अन्य मंदिर

ऐसे मंदिर जो विभिन्न सार्वजनिक भूमियों पर निर्मित हैं, किन्तु उनका और उनकी भूमि पर उनके स्वामित्व का कोई स्पष्ट या वैध अभिलेख उपलब्ध नहीं है।

विभाग के पर्यवेक्षणाधीन/अनुदानित मंदिर, प्रन्यास, धर्मशालायें व परिसंपत्तियाँ निम्नानुसार हैं-

देवस्थान विभाग के पर्यवेक्षणाधीन/अनुदानित मंदिर, प्रन्यास, धर्मशालायें व परिसंपत्तियाँ 

क्रम सं.

मंदिर/ संपदा/संस्था

संख्या

राजस्थान राज्य में स्थित

राज्य से बाहर अन्य प्रदेशों में स्थित

A

मंदिर

1

राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी मंदिर

390

365

25

2

राजकीय आत्म निर्भर श्रेणी मंदिर

203

187

16

3

राजकीय सुपुर्दगी श्रेणी मंदिर

343

305

38

4

राजकीय सहायता प्राप्त मंदिर

10009

9935

74

5

वार्षिकी (एन्यूटी) प्राप्त मंदिर

48466

48466

 

6

मंदिर मंडल अधिनियम के अंतर्गत मंदिर

2

2

 

 

योग

59413

59260

153

B

किराये योग्य संपदा/भवन

1

किराये योग्य संपदा/भवन (आवासीय)

625

544

81

2

किराये योग्य संपदा/भवन (व्यावसायिक)

1608

1498

110

3

किराये योग्य संपदा/भवन (राजकीय)

45

45

0

4

अन्य

3

3

 

 

योग

2281

2090

191

C

धर्मशालायें

17

11

6

D

पंजीकृत प्रन्यास

9066

9066

0

भाग-02

देवस्थान विभाग की वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था

शासन स्तर

क्रम

नाम

पद

1

श्री विष्वेन्द्र सिंह

माननीय मंत्रीए देवस्थान विभाग एवं पर्यटन विभाग

2

श्री गोविन्द सिंह डोटासरा

माननीय राज्यसमंत्रीए देवस्थान विभाग एवं पर्यटन विभाग

3

श्री राघवेन्द्र पारीक

निजी सहायक, माननीय मंत्री महोदय

4

श्री मातादीन मीणा

विशिष्ठ सहायक, माननीय राज्यमंत्री महोदय

5

श्री आलोक गुप्ता

शासन सचिव

6

केसर लाल मीना

संयुक्त शासन सचिव

7

रिक्त

शासन उप सचिव

8

श्री कमल मीना ‘सादर’

सहायक शासन सचिव

9

श्री गौतम बनर्जी

एनालिस्ट कम प्रोग्रामर (उप निदेशक)

10

श्री चन्द्र प्रकाश कटारिया

अनुभाग अधिकारी

विभागाध्यक्ष स्तर

1

श्री कृष्ण कुणाल

आयुक्त, देवस्थान, उदयपुर

2

रिक्त

अतिरिक्त आयुक्त, देवस्थान, उदयपुर

3

श्री सुनील मत्तड़

उपायुक्त, देवस्थान, उदयपुर

4

श्री संजय सिंह

वित्तीय सलाहकार, देवस्थान, उदयपुर

5

श्रीमती सीमा माहेश्वरी

उपविधि परामर्शी, देवस्थान, उदयपुर

6

रिक्त

तहसीलदार

7

श्री महेन्द्र सिंह सीमार

लेखाधिकारी, देवस्थान, उदयपुर (आदेष दिनांक 26.06.2018 से उक्त पद को शासन सचिवालय, जयपुर कर दिया गया है)

8

रिक्त

प्रोग्रामर

9

रिक्त

सहायक लेखाधिकारी ग्रेड-I, देवस्थान, उदयपुर

10

श्री भगवती लाल निमावत

सहायक लेखाधिकारी ग्रेड-II, देवस्थान, उदयपुर

11

श्री गौतम सिंह

सहायक अभियन्ता (मुख्यालय), उदयपुर

12

श्री देवकृष्ण जोशी

अतिरिक्त निजी सचिव, आयुक्त देवस्थान

सहायक आयुक्त कार्यालय (संभाग/जिला स्तरीय) अधिकारी

क्रम

नाम

सहायक आयुक्त कार्यालय

अधीनस्थ जिले

1

श्री मुकेश्‍ कायतवाल       

सहायक आयुक्त, जयपुर(प्रथम)

जयपुर एवं दौसा

2

डॉ. प्रियंका भट्ट

सहायक आयुक्त, उदयपुर

उदयपुर (तहसील खेरवाड़ा व ऋषभेदव के अतिरिक्त) चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, राजसमंद,

3

श्री महेन्द्र देवतवाल

सहायक आयुक्त, जयपुर (द्वितीय)

सीकर, झुन्झुनु, अलवर

4

श्री कृष्ण कुमार खण्डेलवाल

सहायक आयुक्त, कोटा

कोटा, बून्दी, झालावाड़, बारां

5

श्री जतिन कुमार गांधी

सहायक आयुक्त, जोधपुर

जोधपुर, पाली, बाड़मेर, जालौर, सिरौही, जैसलमेर

6

सुश्री दीपिका मेघवाल

सहायक आयुक्त, ऋषभदेव

उदयपुर (तहसली खेरवाड़ा व ऋषभेदव), डूंगरपुर, बांसवाड़ा तथा गुजरात एवं महाराष्ट्र स्थित विभागीय मन्दिर व सम्पदाएं

7

श्री ओम प्रकाश पालीवाल

सहायक आयुक्त, बीकानेर

बीकानेर, चुरू

8

श्री गिरीश बच्चानी

सहायक आयुक्त, अजमेर

अजमेर, नागौर, टोंक, भीलवाड़ा

9

श्री गौरव सोनी              

सहायक आयुक्त, भरतपुर

भरतपुर, धौलपुर, सवाईमाधोपुर एवं करौली

10

श्री गौरव सोनी(अतिरिक्त कार्यभार)

सहायक आयुक्त, वृन्दावन

उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड एवं दिल्ली राज्यों में स्थित विभागीय मन्दिर एवं सम्पदाएं

11

श्री ओम प्रकाश पालीवाल (अतिरिक्त कार्यभार)

सहायक आयुक्त, हनुमानगढ़

श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़

राज्य सेवा में संवर्गवार स्वीकृत, कार्यरत एवं रिक्त पदों का विवरण

क्र.सं.

नाम पद

संवर्ग

स्वीकृत पद

कार्यरत

रिक्त पद

वि0 वि0

1

आयुक्त

 भारतीय  प्रशासनिक सेवा

1

1

0

 

2

अतिरिक्त आयुक्त

राजस्थान प्रशासनिक सेवा

1

0

1

3

वित्तीय सलाहकार

राजस्थान लेखा सेवा

1

1

0

 

4

उप विधि परामर्शी

राजस्थान विधि सेवा

1

0

1

 

5

उपायुक्त

राजस्थान देवस्थान सेवा

1

1

0

 

6

सहायक आयुक्त

राजस्थान देवस्थान राज्य सेवा

12

10

2

 

7

एनालिस्ट कम प्रोग्रामर

राजस्थान तकनीकी सूचना एवं प्रौद्योगिकी सेवा

1

0

1

 

8

प्रोग्रामर

राजस्थान तकनीकी सूचना एवं प्रौद्योगिकी सेवा

1

0

1

 

9

अतिरिक्त निजी सचिव सचिव, (मुख्यालय)

राजस्थान अधीनस्थ कार्यालय मंत्रालयिक सेवा

1

1

0

 

10

तहसीलदार

राजस्थान तहसीलदार सेवा

1

0

1

 

11

लेखाधिकारी

राजस्थान लेखा सेवा

2

2

0

 

12

सहायक लेखाधिकारी प्रथम

राजस्थान अधीनस्थ लेखा सेवा

1

1

0

 

13

निरीक्षक प्रथम श्रेणी

राजस्थान देवस्थान अधीनस्थ सेवा

15

2

13

 

14

निरीक्षक द्वितीय श्रेणी

राजस्थान देवस्थान अधीनस्थ सेवा

21

17

4

 

15

प्रशासनिक अधिकारी 

राजस्थान अधीनस्थ कार्यालय मंत्रालयिक सेवा

1

0

1

 

16

अति. प्रशासनिक अधिकारी

राजस्थान अधीनस्थ कार्यालय मंत्रालयिक सेवा

3

1

2

16

सहायक प्रशासनिक अधिकारी

राजस्थान अधीनस्थ कार्यालय मंत्रालयिक सेवा

11

8

3

 

17

शीघ्र लिपिक

राजस्थान अधीनस्थ कार्यालय मंत्रालयिक सेवा

2

0

2

 

18

वरिष्‍ठ  सहायक

राजस्थान अधीनस्थ कार्यालय मंत्रालयिक सेवा

23

19

4

 

19

कनिष्‍ठ सहायक

राजस्थान अधीनस्थ कार्यालय मंत्रालयिक सेवा

29

20

9

 

20

सहायक लेखाधिकारी-।।

राजस्थान अधीनस्थ लेखा सेवा

14

10

4

 

21

सहायक अभियन्ता

राजस्थान राज्य तकनीकी सेवा

1

0

1

 

22

कनिष्ठ अभियन्ता

राजस्थान अधीनस्थ तकनीकी सेवा

1

0

1

 

23

कनिष्ठ लेखाकार

राजस्थान अधीनस्थ लेखा सेवा

4

4

0

 

24

कनिष्ठ विधि अधिकारी

राजस्थान अधीनस्थ विधिक सेवा

3

3

0

 

25

भू अभिलेख निरीक्षक

राजस्व अधीनस्थ सेवा

1

0

1

 

26

पटवारी

राजस्व अधीनस्थ सेवा

2

0

2

 

27

मैनेजर प्रथम श्रेणी

राजस्थान देवस्थान अधीनस्थ सेवा

11

1

10

 

28

मैनेजर द्वितीय श्रेणी

राजस्थान देवस्थान अधीनस्थ सेवा

14

4

10

 

29

पुजारी

राजस्थान देवस्थान अधीनस्थ सेवा

94

26

68

 

30

सेवागीर

राजस्थान देवस्थान अधीनस्थ सेवा

144

64

80

 

31

जमादार

राजस्थान चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सेवा

4

1

3

 

32

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी

राजस्थान चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सेवा

51

30

21

 

 

योग :-

 

473

227

246

निधि सेवा में स्वीकृत, कार्यरत एवं रिक्त पदों की स्थिति

क्र.सं.

पदनाम

स्वीकृत पद

कार्यरत

रिक्त पद

वेतन श्रृंखला

पे बैण्ड

ग्रेड पे

1

कनिष्ठ लेखाकार

1

0

1

3080-90-3980-110-6180

2

फोर्स अधिकारी/सुरक्षा अधिकारी

2

0

2

2750-90-3650-110-5850

3

मुंतजिम/प्रभारी अधिकारी

2

0

2

2750-90-3650-110-5850

4

क0 प्रारूपकार

1

1

0

5200-20200

2800

5

निधि लिपिक

36

22

14

5200-20200

2400

6

वाहन चालक

3

3

0

5200-20200

2400

7

हवलदार/जमादार/ दरोगा/ गुमाश्ता

3

3

0

5200-20200

1900

8

सिपाही

66

46

20

5200-20200

1700

9

प्रबंधक

13

6

7

5200-20200

1900

10

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी

13

8

5

5200-20200

1700

11

पुजारी

12

6

6

5200-20200

1700

12

मुखिया

15

4

11

5200-20200

1700

13

अन्यः- 
हवलदार, जमादार, दरोगा, मुखिया, सेवागीर, छड़ीदार, फर्राश, सईस, स्नानघर पर, चौकीदार, प्रहरी, हरिजन, गोटेदार, बागबान

56

30

26

5200-20200

1700

 

योगः-

223

129          

94

 

 


जिला स्तार निरीक्षक कार्यालय

1

निरीक्षक, देवस्थान

अलवर

2

निरीक्षक, देवस्थान

करौली

3

निरीक्षक, देवस्थान

धौलपुर

4

निरीक्षक, देवस्थान

बून्दी

5

निरीक्षक, देवस्थान

बांसवाड़ा

भाग-3
देवस्थान विभाग से सम्बंधित प्रमुख नियम/अधिनियम
Major Acts & Rules Related to Devasthan Department

क्र.सं.

अधिनियम व नियम

विभाग  से सम्बंधित सामान्य अधिनियम व नियम

1

सहायता अनुदान नियम, 1958

Grant in Aid Rules, 1958

2

राजस्थान देवस्थान निधि सेवा नियम, 1959

Rajasthan Fund Service Rules 1959

3

राजस्थान देवस्थान निधि बजट एवं लेखा नियम, 2015

Rajasthan Nidhi Budget and Account Rules, 2015

4

राजस्थान लोक न्यास अधिनियम, 1959

Rajasthan Public Trust Act 1959

5

राजस्थान लोक  न्यास नियम, 1962

Rajasthan Public Trust Rules 1962

6

राजस्थान देवस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम, 2000

Rajasthan Devasthan State and Subordinate Service Rules, 2000

7

राजस्थान मंदिर व धार्मिक एवं दातव्य संस्था अनुदान नियम, 2010

Rajasthan Grant In Aid to Temples And Other Religious and Charitable Institution Rules, 2010

मंदिर विशेष से सम्बंधित अधिनियम व नियम

1

नाथद्वारा मंदिर मण्डल अधिनियम, 1959

Nathdwara Temple Board Act 1959

2

नाथद्वारा मंदिर मण्डल  नियम, 1973

Nathdwara Temple Board Rules, 1973

3

सांवलिया जी मंदिर मण्डल नियम, 1991

Sanwariaji Temple Board Rules, 1991

4

सांवलिया जी मंदिर मण्डल अधिनियम , 1992

Sanwariaji Temple Board Act, 1992

अन्य सामान्य अधिनियम व नियम

1

राजस्थान सार्वजनिक भू-गृहादि (अप्राधिकृत अधिवासियों की बेदखली) अधिनियम, 1964

Rajasthan Public Premises (Eviction of Unauthorized Occupants) Act, 1964

2

राजस्थान सार्वजनिक भू-गृहादि (अप्राधिकृत अधिवासियों की बेदखली) नियम, 1966

Rajasthan Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Rules, 1966

3

देवस्‍था विभाग से संबंधित मन्दिरों के जेवर, सोना, चांदी, जेवरात व सोना चांदी के बर्तनों की सुरक्षा नियम, 1970

Rules for Security of Jewellery Golden, Silver ornaments and Untensil of the Temple releted to Devasthan Department, 1970

भारत सरकार के न्यास व धर्मस्थल से सम्बंधित प्रमुख अधिनियम और नियम*

1

The Religious Endowments Act, 1863

2

The Charitable Endowments Act, 1890

3

The Indian Trusts Act, 1882

4

The Charitable and Religious Trusts Act, 1920

 

* संदर्भार्थ


नीतियाँ

क्र.सं.

नीति

दिनांक

पत्र क्रमांक

खनन नीति

18.04.2000

प 07(16)देव/1991/4 दिनांक 18.4.2000

किराया नीति

06.06.2000

प 07(32)देव/1998/4 दिनांक  6.6.2000


अन्य प्रावधान

क्र.सं.

नीति

दिनांक

पत्र क्रमांक

1

मन्दिर सुर्पुदगी सम्बन्धी प्रावधान

11.09.1997

 

2

अपना धाम-अपना काम-अपना नाम योजना

2008

 

भाग-4

देवस्थान विभाग का बजट प्रावधान और विभाग द्वारा राजस्व संग्रहण
वर्ष 2014-15 से वर्ष 2018-19 में बजट प्रावधान एवं व्यय की स्थितिः- राज्य योजना मद

( राशि लाखों मे )

विवरण

2014-15

2015-16

2016-17

2017-18

2018-19

आवंटन राशि

व्यय राशि

आवंटन राशि

व्यय राशि

आवंटन राशि

व्यय राशि

आवंटन राशि

व्यय 
राशि

आवंटन राशि

व्यय 
राशि

मंदिरों के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं विकास कार्य

1500.00

676.76

1506.66

816.93

660.48

539.39

1982.49

618.88

454.37

384.65

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना

1500.00

1128.45

1550.00

1421.68

1500.00

1499.70

3200.00

2908.91

1430.83

1143.31

कैलाश मान सरोवर तीर्थ यात्रा योजना

50.00

47.00

100.00

99.91

100.00

93.00

110.00

76.00

176.00

163.00

ट्रस्ट मंदिर सहायता योजना

-

-

0.00

0.00

2058.56

1458.56

768.75

734.27

418.00

283.00

योग :-

3050.00

1852.21

3156.66

2338.52

4319.04

3590.65

6061.24

4338.06

2479.20

1973.86

वर्ष 2019-20 में बजट प्रावधान

 

विवरण

2019-20

आवंटन राशि

1.

मंदिरों के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं विकास कार्य

717.95

2.

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना, सिन्धु दर्शन तीर्थयात्रा योजना

1400.00

3.

कैलाश मान सरोवर तीर्थ यात्रा योजना

100.00

4.

ट्रस्ट मंदिर सहायता योजना

321.40

 

योग :-

2539.35

वर्ष 2019-20 में उपलब्ध बजट प्रावधान एवं व्यय की स्थिति 
  राज्य आयोजना मद  जुलाई 2019 तक सूचना

( राशि लाखों मे )

क्र.सं.

बजट शीर्ष

बजट प्रावधान 

व्यय राशि दिसम्बर 2018 तक

प्रयोजन

1

1

4250-00-800--03--(00)-72 (विभाग के माध्यम से निर्माण कार्य)

34.35

3.98

निर्माण एवं विकास कार्य हेतु

2

4250-00-796--(03) (00) 72 (टीएसपी क्षेत्र के मन्दिर के जीर्णोद्धार विकास कार्य विभाग के माध्यम से)

15.00

0.00

3

2

4250-00-800--(02) (90) उपमद-17 पीडब्ल्युडी के माध्यम से तीर्थ यात्रियों के लिए वृहद निर्माण कार्य

587.00

0.00

4

4250.00.796-(03)(00)-PWD TSP

81.60

0.00

5

3

2250 - ट्रस्ट सहायता TSP

  31.40

0.00

6

2250-00-800-03  (सहायता अनुदान)

  290.00

0.00

7

4

2250-00-800-02-01(Non TSP) वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 
2250-00-796-01-01(TSP)
2250-00-789-02-01(SCSP)

  1400.00

9.43

तीर्थ यात्रा योजना हेतु

8

5

2250-00-800-02-02(Non TSP) 
2250-00-796-03-01(TSP)
2250-00-789-01-01(SCSP)
कैलाश मानसरोवर यात्रा योजना

  100.00

0.00

 

 

योग -

  2539.35

13.41

 

 वित्तीय राशि आवंटन एवं व्यय का विवरण 
वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक 
सूचना- जुलाई 2019 तक

(राशि लाखों में) 

 

आवंटन

व्यय

क्र. सं.

वर्ष

निर्माण

अन्य योजना

योग

वर्ष

निर्माण

अन्य योजना

योग

1

2015-16

1506.66

1650.00

3156.66

2015-16

816.93

1521.59

2338.52

2

2016-17

2719.04

1600.00

4319.04

2016-17

1997.95

1592.70

3590.65

3

2017-18

2751.24

3310.00

6061.24

2017-18

1353.15

2984.91

4338.06

4

2018-19

872.37

1606.83

2479.20

2018-19

667.65

1306.21

1973.86

5

2019-20

1039.35

1500.

2539.35

व्‍यय 2019-20 जुलाई

3.98

9.43

13.41

 

योग

8888.66

9666.

18555.49

योग

4839.66

7414.84

12254.50

राज्यमद (योजना) एवं राज्य मद के अन्तर्गत वर्ष 2015-16 से 2018-19  तक बजट प्रावधान
राशि का विवरणः- राज्यमद (योजना)

क्र.सं.

वर्ष

बजट शीर्ष

प्रावधित राशि रुपये लाखों में

व्यय राशि रुपये 
लाखों में

विशेष विवरण

1

2015-16

2250-00-800-02-024250-00-800-02-90
4250-00-796-04-00
4250-00-800-02-01

1506.66

816.93

मन्दिर मरम्मत एवं जीर्णोद्धार एवं श्रद्धालुओं की सुविधार्थ विकास कार्य

2

2250-00-800-02-01

1550.00

1421.68

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा एवं सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा योजना के संचालन हेतु

3

2250-00-800-02-02

100.00

99.91

कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा योजना

4

2016-17

4250-00-800-03-00
4250-00-800-02-90
4250-00-796-04-00
4250-00-796-03-90

660.48

539.39

मन्दिर मरम्मत एवं जीर्णोद्धार एवं श्रद्धालुओं की सुविधार्थ विकास कार्य

5

2250-00-800-03-00

1500.00

1000.00

श्री डिग्गी कल्याण जी, श्री पुष्कर, श्री खाटूष्यामजी, श्री मेहन्दीपुर बाला जी विकास कार्यों हेतु सहायता अनुदान ।

6

2250-00-796-02-01

458.56

458.56

बैणेष्वर धाम विकास कार्यों हेतु सहायता अनुदान ।

7

2250-00-800-02-02

1500.00

1499.70

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा एवं सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा योजना के संचालन हेतु

8

2250-00-800-02-02

100.00

93.00

कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा योजना

9

2017 -18

4250-00-800-03-00
4250-00-800-02-90
4250-00-796-04-00
4250-00-796-03-90

1982.59

618.88

मन्दिर मरम्मत एवं जीर्णोद्धार एवं श्रद्धालुओं की सुविधार्थ विकास कार्य

10

 

2250-00-800-03-00
 (ट्रस्ट मंदिरों को सहायता)

518.75

484.27

श्री डिग्गी कल्याण, श्री पुष्कर, श्री खाटू श्याम जी, श्री मेहन्दीपुर बालाजी विकास कार्य हेतु सहायता अनुदान

11

 

2250-00-796-02-01 (ट्रस्ट मंदिरों को सहायता, टी.एस.पी.)

250.00

250.00

श्री बेणेश्वर धाम विकास कार्य हेतु सहायता अनुदान

12

 

2250-00-800-02-01

3200.00

2908.91

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा एवं सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा योजना के संचालन हेतु

13

 

2250-00-800-02-02

110.00

76.00

कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा योजना

14

2018 -19

4250-00-800-03-00
4250-00-800-02-90
4250-00-796-04-00
4250-00-796-03-90

454.37

384.65

मन्दिर मरम्मत एवं जीर्णोद्धार एवं श्रद्धालुओं की सुविधार्थ विकास कार्य

15

 

2250-00-800-03-00(ट्रस्ट मंदिरों को सहायता)

418.00

283.00

ट्रस्ट मंदिरों  केविकास कार्य हेतु सहायता अनुदान

17

 

2250-00-800-02-01

1430.83

1143.31

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा एवं सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा योजना के संचालन हेतु(दिसम्बर 2018 तक

18

 

2250-00-800-02-02

176.00

163.00

कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा योजना

राज्यमद

क्र.सं.

वर्ष

बजट शीर्ष

प्रावधित राशि (लाखों में)

व्यय राशि (लाखों में)

विशेष विवरण

1

2015-16

2250 राज्यमद

1426.88

1343.94

कार्मिकों के वेतन भत्ते मन्दिर संस्कृति एवं अनुरक्षण व्यय

 

3604 एन्यूटी

33.41

10.97

वेतन भत्ते एवं एन्यूटी भुगतान

2

2016-17

2250 राज्यमद

1487.10

1044.16

कार्मिकों के वेतन भत्ते मन्दिर संस्कृति एवं अनुरक्षण व्यय

 

3604 एन्यूटी

19.51

3.21

वेतन भत्ते एवं एन्यूटी भुगतान

3

2017-18

2250 राज्यमद

  1732.10

1580.55

कार्मिकों के वेतन भत्ते मन्दिर संस्कृति एवं अनुरक्षण व्यय

 

 

3604 एन्यूटी

19.52

11.31

वेतन भत्ते एवं एन्यूटी भुगतान

4

2018-19

2250 राज्यमद

2105.30

1427.32

कार्मिकों के वेतन भत्ते मन्दिर संस्कृति एवं अनुरक्षण व्यय(31.12.2018तक)

 

 

3604 एन्यूटी

20.72

5.68

वेतन भत्ते एवं एन्यूटी भुगतान 31.12.2018तक)

निधिमद (राशि लाखों मे)

विवरण

2015-16

2016-17

2017-18

2018-19

आवंटन
राशि

व्यय
राशि

आवंटन
राशि

व्यय
राशि

आवंटन
राशि

व्यय
राशि

आवंटन
राशि

व्यय (राशि दिस.18 तक

मंदिरों के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं विकास कार्य

2552.54

739.00

764.69

613.63

1969.93

1160.00

702.00

600.00

बजट घोषणायें
Budget Announcements of Devasthan Department

क्र  .सं.

बजट पैरा

बजट वर्ष

बजट घोषणा

1

54.0.0

2015-2016

गत वर्ष स्वीकृत किये गये कार्यों को जारी रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु 20 करोड़ रूपये की लागत से विभिन्न मंदिरों की मरम्मत जीर्णोद्धार एवं विकास कार्य करवाये जायेंगे।

2

343.0.0

2015-2016

इस वर्ष मंदिर श्री रूपनारायण जी, सेवन्त्री-राजसमन्द, श्री बेणेश्वर धाम-डूंगरपुर, श्री गोटिया अम्बा महादेवजी-बांसवाड़ा, श्री मातृ कुण्डिया-चित्तौड़गढ, श्री चौथमाता मंदिर-सवाई माधोपुर, श्री बिहारी जी मंदिर-भरतपुर, श्री डिग्गी कल्याणजी-मालपुरा, श्री राजकलेश्वर- टोंक, तीर्थगुरू पुष्कर राज-अजमेर, बूढ़ा पुष्कर, श्री रामदेवरा-जैसलमेर, श्री केशवराय-केशवरायपाटन, श्री झरनेश्वर महादेव, श्री नागणेचा-बाड़मेर, श्री नागणेचा मंदिर-बीकानेर में जीर्णोद्धार और विकास कार्य किए जायेंगे।

3

60.0.0

2016-2017

प्रदेश के 12 प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों- खाटू श्यामजी-सीकर, डिग्गी मालपुरा-टोंक, चौथमाता का बरवाड़ा- सवाईमाधोपुर, मातृकुण्डिया-चित्तौड़गढ़, मेंहदीपुर बालाजी-करौली, बेणेश्वरधाम-डूंगरपुर, रामदेवरा लुधरवा-जैसलमेर, सालासर हनुमानजी-चूरू, पुष्कर एवं बुढ़ा पुष्कर-अजमेर, रूपनारायणजी मंदिर, चारभुजाजी मंदिर-राजसमन्द तथा मगरा मेरवाड़ा के क्षेत्र का विकास 35 करोड़ रुपये की लागत से चरणबद्ध रूप से करवाया जायेगा। 

4

61.0.0

2016-2017

राज्य के प्रत्यक्ष प्रभार मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं अन्य विकास कार्य हेतु 5 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।

5

69.0.0

2017-2018

बिहारी जी का मंदिर, गंगा मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, भरतपुर, केशवराय मंदिर, केशवरायपाटन-बूँदी एवं सूर्य मंदिर झालरापाटन- झालावाड़ में 20 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य करवाये जायेंगे।

6

70.01.0

2017-2018

आगामी वर्ष इस योजना के तहत 20 हजार वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक स्थलों की यात्रा करवाई जायेगी, जिनमें से 5 हजार वरिष्ठ नागरिकों को हवाई मार्ग से यात्रा करवाई जायेगी।

7

71.0.0

2017-2018

राज्य के प्रत्यक्ष प्रभार के 40 मंदिरों के लिए भोगराग हेतु  36 हजार रुपये वार्षिक तथा 350 मंदिरों हेतु प्रति मंदिर एक हजार 200 रुपये वार्षिक का प्रावधान है। आगामी वर्ष में इस राशि को बढ़ाकर दुगुना किया जायेगा। 

8

72.0.0

2017-2018

बनारस-उत्तर प्रदेश में गंगा किनारे मणिकर्णिका घाट के पास स्थित महादेव मंदिर एवं कुंड, जो अलवर मंदिर के नाम से विख्यात है, के जीर्णोद्धार एवं मरम्मत का कार्य एक करोड़ रुपये की लागत से करवाया जायेगा।

9

73.0.0

2017-2018

उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित श्रीराधा माधव जी मंदिर, जो जयपुर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है, की स्थापना का शताब्दी वर्ष मई 2017 में धूमधाम से मनाया जायेगा। इस उपलक्ष्य में मंदिर के सौंदर्यकरण, प्रकाश व्यवस्था इत्यादि के लिए 50 लाख रुपये की घोषणा ।

10

74.0.0

2017-2018

राज्य सरकार  तिरुपति बालाजी तथा बद्रीनाथ के धार्मिक महत्व को देखते हुए वहाँ पर धर्मशालाओं की व्यवस्था करवायेगी। 

11

193.0.0

2018-2019

गत वर्षों में प्रारम्भ किये गये मंदिर व धार्मिक स्थलों के विकास कार्यो को प्राथमिकता से पूरा करवाते हुए वर्ष 2018-19 में श्री विजवा माता मंदिर डूंगरपुर, श्री लोहार्गल तीर्थ झून्झूनु और मुरली मनोहर जी तथा रघुनाथ जी मंदिर रतनगढ चूरू के विकास हेतु 10-00 करोड का प्रावधान किया गया हैं।

12

196.0.0

2018-2019

लम्बे समय से मंदिर माफी से जुडे हुए विभिन्न विषयों एवं समस्याओं के समाधान हेतु एक उच्च स्तरीय समिति गठन किए जाने की घोषणा।

13

328.0.0

2018-2019

राज्य में मंदिर माफी के संबंध में स्पष्ट किराया व विकास नीति नहीं होने से उनका आवश्यकता अनुरूप वैधानिक उपयोग नहीं हो पाता हैं एवं इससे इनका समुचित विकास नहीं हो पाता हैं। इस संबंध में बेहतर आय संवर्धन उपयोग करने हेतु समुचित किराये नीति निर्धारित करने की घोषणा की गई हैं।

14

156

2019-20    

156- डिजिटाईजेशन करने वाली फर्म से चर्चा की जा रही हैं, सम्पूर्ण अभिलेखों का डिजिटाईजेशन करने हेतु फर्म से अपेक्षित बजट मांग प्राप्त होते ही सूचना उपलब्ध करवाई जा सकेगी। वर्तमान में अनुमानित राशि रूपयें 20.00 लाख की मांग इस बजट घोषणा हेतु प्रस्तावित की जा रही हैं। इस प्रस्तावित राशि में रूपयें 3.90 लाख का प्रावधान उपलब्ध हैं। अपेक्षित बजट मांग के अनुसार आर.इ. वर्ष 2019-20 के प्रस्ताव में आवश्यक संशोधन किए जा सकेगें।

15

157

 

2019-20

 वरिष्ट नागरिक तीर्थ यात्रा योजना में काठमाण्डू, नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर शामिल -  वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना हेतु वर्ष 2019-20 में राशि रूपयें 1400.00 लाख का प्रावधान किया गया हैं। इस वर्ष बजट घोषणा की पालना में योजना के तहत काठमाण्डू नेपाल पशुपतिनाथ मंदिर की तीर्थ यात्रा भी प्रस्तावित की गई हैं। वर्ष 2019-20 की तीर्थ यात्रा हेतु कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई हैं। वरिष्ठ नागरिको के आवेदन पत्र भी विभाग को प्राप्त हो चुके हैं, जिसके तहत सर्वाधिक आवेदकों द्वारा पशुपतिनाथ मंदिर की यात्रा हेतु आवेदन किये गये हैं। पशुपतिनाथ मंदिर एवं अन्य चयनित प्रतुख तीर्थ स्थलों की यात्रा हेतु सफल आवेदकों का चयन लॉटरी के माध्यम से किया जायेगा। वर्तमान में बजट में राशि रूपयें 1400 लाख उपलब्ध हैं, अतिरिक्त बजट प्रावधान का आंकलन यात्रियों के चयन के उपरान्त ही उपलब्ध हो सकेगा, जिसकी सूचना यात्रियों की चयन प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के पश्चात् उपलब्ध करवा दी जायेगी।

16

157

2019-20

बीपीएल कार्ड धारको को राज्य से बाहर स्थित धर्मशालाओं में निःशुल्क ठहरने की सुविधा - यह घोषणा देवस्थान विभाग की राज्य के बाहर अवस्थित सभी धर्मशालाओं में निःशुल्क ठहरने की सुविधा से संबंघित हैं, जो कि विभागीय नीतिगत विषय से संबंधित हैं, जिसमें किसी प्रकार की अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं होगी।

राज्यमद (योजना) एवं राज्य मद के अन्तर्गत वर्ष 2015-16 से 2018-19 तक बजट प्रावधान एव व्यय राशि का विवरणः- राज्यमद (योजना)

क्र.सं.

वर्ष

बजट शीर्ष

प्रावधित राशि रुपये लाखों में

व्यय राशि रुपये लाखों म

विशेष विवरण

1

2015-16

2250-00-800-02-024250-00-800-02-90
4250-00-796-04-00
4250-00-800-02-01

1506.66

816.93

मन्दिर मरम्मत एवं जीर्णोद्धार एवं श्रद्धालुओं की सुविधार्थ विकास कार्य

2

2250-00-800-02-01

1550.00

1421.68

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा एवं सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा योजना के संचालन हेतु

3

2250-00-800-02-02

100.00

99.91

कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा योजना

4

2016-17

4250-00-800-03-00
4250-00-800-02-90
4250-00-796-04-00
4250-00-796-03-90

660.48

539.39

मन्दिर मरम्मत एवं जीर्णोद्धार एवं श्रद्धालुओं की सुविधार्थ विकास कार्य

5

2250-00-800-03-00

1500.00

1000.00

श्री डिग्गी कल्याण जी, श्री पुष्कर, श्री खाटूष्यामजी, श्री मेहन्दीपुर बाला जी विकास कार्यों हेतु सहायता अनुदान ।

6

2250-00-796-02-01

458.56

458.56

बैणेष्वर धाम विकास कार्यों हेतु सहायता अनुदान ।

7

2250-00-800-02-02

1500.00

1499.70

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा एवं सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा योजना के संचालन हेतु

8

2250-00-800-02-02

100.00

93.00

कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा योजना

9

2017 -18

4250-00-800-03-00
4250-00-800-02-90
4250-00-796-04-00
4250-00-796-03-90

1982.59

618.88

मन्दिर मरम्मत एवं जीर्णोद्धार एवं श्रद्धालुओं की सुविधार्थ विकास कार्य

10

 

2250-00-800-03-00
 (ट्रस्ट मंदिरों को सहायता)

518.75

484.27

श्री डिग्गी कल्याण, श्री पुष्कर, श्री खाटू श्याम जी, श्री मेहन्दीपुर बालाजी विकास कार्य हेतु सहायता अनुदान

11

 

2250-00-796-02-01 (ट्रस्ट मंदिरों को सहायता, टी.एस.पी.)

250.00

250.00

श्री बेणेश्वर धाम विकास कार्य हेतु सहायता अनुदान

12

 

2250-00-800-02-01

3200.00

2908.91

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा एवं सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा योजना के संचालन हेतु

13

 

2250-00-800-02-02

110.00

76.00

कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा योजना

14

2018 -19

4250-00-800-03-00
4250-00-800-02-90
4250-00-796-04-00
4250-00-796-03-90

454.37

384.65

मन्दिर मरम्मत एवं जीर्णोद्धार एवं श्रद्धालुओं की सुविधार्थ विकास कार्य

15

 

2250-00-800-03-00
 (ट्रस्ट मंदिरों को सहायता)

418.00

283.00

ट्रस्ट मंदिरों  केविकास कार्य हेतु सहायता अनुदान

16

 

2250-00-800-02-01

1430.83

1143.31

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा एवं सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा योजना के संचालन हेतु

17

 

2250-00-800-02-02

176.00

163.00

कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा योजना

18

योग

15916.24

12241.19

अराजकीय मन्दिरों की मुआवजा राशि हेतु पृथक से निजी निक्षेप खाताः-

राजस्थान  सार्वजनिक प्रन्यास अधिनियम,1959 के प्रावधानों के अनुसार सार्वजनिक मन्दिर लोक न्यास की परिभाषा में आने से अधिनियम की धारा 37 के तहत आयुक्त, देवस्थान को राजस्थान राज्य में स्थित समस्त पुण्यार्थ संस्थाओं के कोषाध्यक्ष की शक्तियां प्रदत्त होने से विभाग में जमा  5044.06  लाख रुपये दिनांक 31.12.2018 तक अराजकीय मन्दिरों की भूमि अवाप्ति के फलस्वरूप प्राप्त मुआवजा राशि पर प्रभावी पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण हेतु पृथक से कोषालय उदयपुर में निजी निक्षेप खाता वित्त विभाग(मार्गोपाय अनुभाग) के आदेश क्रमांक प. 8(7)वि.मा/2008 दिनांक 5.4.2012 की अनुपालना में नवीन रूप से खुलवाया जाकर संधारित किया जा रहा है।

आयोजना मद के अन्तर्गत राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार मंदिरों की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य हेतु आयोजना मद में 3.30 करोड के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्यः-

आयोजना मद के अन्तर्गत वर्ष 2018-19 में  स्वीकृत बजट राशि रू. 3.30 करोड़ के विरूद्ध ( o"kZ 2018-19) esa 38 विकास कार्य चल रहे है। इसके अतिरिक्त राज्य के 11 चयनित प्रमुख मंदिरों में विकास एवं सौन्दर्यकरण कार्य हेतु पीडीकोर द्वारा चयनित कंसलटेंसी फर्म द्वारा मास्टर प्लान तैयार कर लिए गए है। इनमें से 6 मंदिरों की डीपीआर तैयार करने हेतु कन्सलटेंसी फर्म से अनुबन्ध निष्पादन किए जाकर कार्यादेश जारी किये गए हैं। राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण लिमिटेड द्वारा निम्न 6 मंदिरों के प्रथम चरण में कराये जाने वाले विकास कार्यों हेतु 24.90 करोड़ राज्य मद एवं 5.20 करोड़ निधि मद से स्वीकृति जारी की गयी है-

क्र.सं.

मंदिर नाम

विकास की अनुमानित लागत
(राशि करोड़ों में) प्रथम चरण

1.

मंदिर श्री बेणेश्वर धाम

4.90 (राज्य मद)

2.

मंदिर श्री खाटू श्याम

5.00 (राज्य मद)

3.

मंदिर श्री डिग्गी कल्याण

5.00 (राज्य मद)

4.

मंदिर श्री पुष्कर एवं बूढ़ा पुष्कर

5.00 (राज्य मद)

5.

मंदिर श्री मेहन्दीपुर बालाजी

5.00 (राज्य मद)

6.

मंदिर श्री चारभुजा गढ़बोर

5.20 (निधि मद)

390 राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार के मंदिरों में पूजा-अर्चना हेतु वर्ष 2018-19 में 270 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। 203 आत्म निर्भर मंदिरों की पूजा अर्चना के लिए 120 लाख रुपये का संयुक्त निधि कोष से व्यय करने का प्रावधान रखा गया है। राज्य सरकार द्वारा आलोच्य वर्ष 2018-19 में राज्‍य योजना मद में 330.09 लाख रुपये, राज्‍य  मद में 20.00 लाख रुपये एवं संयुक्त निधि मद में 534.69 लाख रुपये की लागत के 5 कार्य स्वीकृत किये गए हैं

विभागीय संयुक्त निधि मद से वर्ष 2017-18  में स्वीकृत मंदिरों के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं संधारण तथा नया निर्माण का विवरण जो वर्तमान में प्रगतिरत है ।

क्र.सं.

नाम मंदिर

शासन की स्वीकृति क्रमांक/दिनांक

स्वीकृत राशि (लाखों में)

1.

मंदिर श्री रूपनारायण जी ,सेवंत्री

प.3(15)देव/2014  जयपुर दिनांक 18.4.2017

545.00

2.

श्री बिहारी जी, भरतपुर

प.4(4)देव/2017  जयपुर दिनांक 23.5.2017

1030.18

3.

श्री सूर्य मंदिर, झालावाड. 

प.3(15)देव/2014  जयपुर दिनांक 18.4.2017

85.52

4.

श्री गंगा मंदिर, भरतपुर

प.3(15)देव/2014  जयपुर दिनांक 18.4.2017

186.06

5.

श्री लक्ष्‍मण मंदिर, भरतपुर

प.3(15)देव/2014  जयपुर दिनांक 18.4.2017

123.17

 

 

योग-

1969.93

विभागीय बजट की विगत 3 वर्षों की राजस्व प्राप्ति की तुलनात्मक स्थितिः-

(लाखों में)

मद

आवंटित लक्ष्य वर्ष 2015-16

राजस्व प्राप्ति वर्ष 2015-16

आवंटित लक्ष्य वर्ष 2016-17

राजस्व प्राप्ति वर्ष 2016-17

आवंटित लक्ष्य वर्ष 2017-18

राजस्व प्राप्ति वर्ष 2017-18

आवंटित लक्ष्य वर्ष 2018-19

राजस्व प्राप्ति वर्ष 2018-19
31.12.18

राजकीय

282.00

166.17

294.00

267.68

325.00

284.65

341.00

232.98

संयुक्त निधि

1230.00

731.10

989.00

890.14

1088.00

1085.59

1194.94

866.70

राजस्व संग्रहण की स्थितिः-
विभाग द्वारा आलोच्य वर्ष 2018-19 में राजस्व की प्राप्ति निम्नानुसार की गई हैः-

राशि (लाखों में)

मद

वर्ष 2018-19

आवंटित लक्ष्य

राजस्व प्राप्ति
(31-12-2018 तक)

राजकीय

341.00

232.98

संयुक्त निधि

1194.94

866.70

देवस्थान विभाग की विनियोजित राशि :-

देवस्थान विभाग द्वारा प्रबंधित एवं नियंत्रित राजकीय आत्म निर्भर श्रेणी के मंदिरों की आय मय ब्याज राशि एवं मंदिरों की मुआवजा राशि जो प्राप्त हुई है, उसका विनियोजन माह 12/2018 तक का निम्न प्रकार है :-

क्र.सं.

विवरण

जमा राशि (लाखों में)

1

राजकीय कोषालय निजी निक्षेप ब्याज खाता 1029

5524.58

2

राजकीय कोषालय निजी निक्षेप ब्याज खाता (मुआवजा राशि) ब्याज सहित 5644

5044.06

3

राजकीय कोषालय निजी निक्षेप बिना ब्याज खाता 1014

5.06

नोट-  देवस्थान विभाग को ऑनलाइन दान सहयोग राशि प्राप्त करने हेतु पृथक से बैंक एकाउंट खोलने की अनुमति के  बाद यह प्रक्रिया  पूरी की जा चुकी हैा

भाग— 5

 निर्माण कार्य

जिलावार देवस्थान विभागके माध्यम से तीर्थ स्थलों व मंदिरों के विकास पर विहित कुल राशि 
(स्वीकृत व प्रस्तावित मिला कर) 
वर्ष 2018-2019
(दिनांक- 31-12-2018तक की सूचना के अनुसार)

क्र.सं.

मंदिर

स्थान, जिला

कुल विकास राशि (राशि लाख में)

1

2

3

4

2

मंदिर श्री ब्रह्मा जी पुष्कर पुष्कर

अजमेर

500.00

3

दूधालेश्वर महादेव मंदिर

अजमेर

240.00

4

धूनी गाजी का मंदिर

अजमेर

6.00

5

झांक माता के मंदिर

अजमेर

15.00

6

श्यामगढ माता मंदिर

अजमेर

15.00

7

देवी जी का मंदिर

अजमेर

15.00

8

साडू माता मंदिर

अजमेर

15.00

9

मन्दिर श्री डाढ देवी माताजी

कोटा

18.00

10

मन्दिर श्री करणी  माता जी आमेड़ा

कोटा

15.00

11

मन्दिर श्री दाउ जी सूरजपोल

कोटा

6.00

12

मन्दिर श्री सूर्य नारायण जी

कोटा

8.10

13

मंदिर श्रीमंगलेश्‍वर महादेव जी,  मातृ कुण्डिया

चित्तौड़गढ

19.50 सांवलियां मंदिर मण्डल

14

मंदि श्री सालासर बालाजी

चूरू

27.10 पर्यटन विभाग

15

मन्दिर श्री आनन्द बिहारी जी बड़ी चौपड़

जयपुर

5.00

16

मन्दिर श्री जगतेश्वर जी, जौहरी बाजार

जयपुर

9.00

17

मन्दिर श्री कल्कि जी सिरह डयोढी

जयपुर

9.00

18

मन्दिर श्री चन्द्रेश्वर जी सिरहडयोढी

जयपुर

7.00

19

मंदिर श्री रामदेव जी रामदेवरा

जैसलमेर

57.64 मास्टर प्लान तैयार

20

मन्दिर श्री गिरधारी जी

जैसलमेर

15.00

21

मन्दिर श्री भुवनेश्वर महादेव मन्दिर आडा बाजार

जोधपुर

5.40

22

मन्दिर श्री राजरणछोड़ जी

जोधपुर

6.70

23

मन्दिर श्री जसवन्त सराय

जोधपुर

8.90

24

मन्दिर श्री जाडेची जी भवन

जोधपुर

9.00

25

मन्दिर श्री ज्वालामुखी जी पचेटिया  हिल्स

जोधपुर

10.00

26

मंदिर श्री पीपाजी, गागरोन

झालावाड

184.00

27

मंदिर श्री क्यासरा  जी

झालावाड

180.00

28

मंदिर श्री द्वारकाधीश , झालरापाटन , झालावाड

झालावाड

160.50

29

मन्दिर श्री राम जी सुनैल

झालावाड

6.00

30

मंदिर श्री झरनेश्वर महादेव जी

झालावाड़

60.00

31

श्री सूर्य मंदिर झालरापाटन,

झालावाड़

85.85

32

मंदिर श्री डिग्गी कल्याण जी, मालपुरा,

टोंक

500.00

33

मंदिर श्री राजकालेश्वर जी

टोंक

371.14

34

मंदिर श्री बेणेश्वर धाम

डूंगरपुर

1133.68

35

मन्दिर श्री वनेश्वर महादेव  जी

डूंगरपुर

10.00

36

मन्दिर श्री मुरली मनोहर जी घुघरा

डूंगरपुर

8.00

37

मंदिर श्री मेंहदीपुर बाला जी

दौसा

500.00

38

मंदिर श्री धारेश्वर

पाली

10.00

39

मंदिर  श्री देवनारायण

पाली

10.00

40

मंदिर श्री नागनेच्या माता

पाली

10.00

41

मंदिर श्री केशरिया कवर जी

पाली

10.00

42

मंदिर श्री मुण्डागर माता जी

पाली

20.00

43

मंदिर श्री कोलिय महादेव

पाली

35.00

44

मंदिर श्री मुण्डागर माता जी

पाली

20.00

45

मंदिर श्री रामदेव जी

पाली

50..0

46

मंदिर श्री रामदेव जी एवं अलख नाथ जी

पाली

18.45

47

मंदिर श्री माता जी

पाली

16.55

48

मंदिर श्री देवनारायण रामदेव जी एवं अलख नाथ जी मंदिर

पाली

27.50

49

मंदिर श्री नीलकण्ठ महादेव

पाली

28.50

50

मंदिर श्री प्रभुदास जी

पाली

50.00

51

मंदिर श्री काजलवास

पाली

50.00

52

मंदिर श्री वायड भैरू जी

पाली

50.00

53

मंदिर श्री कोटडा जी

पाली

40.00

54

मन्दिर श्री विजय राघव जी

प्रतापगढ़

9.09

55

मंदिर श्री गोटिया अम्बा महादेव जी

बांसवाड़ा

267.92

56

मंदिर श्री त्रिपुरासुंदरी जी

बांसवाड़ा

33.50

57

मंदिर श्री नागणेचा माता जी

बाड़मेर

208.00

58

मन्दिर श्री गोवर्धन नाथ जी अंता

बारां

10.00

59

मंदिर श्री नागणेचा माता जी

बीकानेर

139.25 (20.00 लिफ्ट कार्य)

60

मंदिर श्री लक्ष्मी नाथ जी

बीकानेर

100.00

61

मन्दिर श्री रघुनाथ जी नया कुआं

बीकानेर

25.00

62

मन्दिर श्री रघुनाथ जी (ख्वास जी-जेठा जी)

बीकानेर

20.00

63

मन्दिर श्री डूंगरेश्वर जी महादेव जी कोलायत

बीकानेर

9.00

64

मन्दिर श्री रतन प्रतिपालेश्वर जी कोलायत

बीकानेर

10.00

65

मन्दिर श्री देवगिरि जी समाधि गजनेर

बीकानेर

6.00

66

मंदिर श्री केशवराय जी केशवरायपाटन,

बूँदी

547.00

67

मंदिर श्री बिहारी जी

भरतपुर

1019.98

68

मंदिर श्री गंगा जी

भरतपुर

186.41

69

मंदिर श्री लक्ष्मण जी

भरतपुर

124.75

70

मन्दिर श्री मांजी सा का नया मन्दिर आसीन्द बावड़ी

भीलवाड़ा

10.00

71

मन्दिर श्री दुलेगोपाल जी  आसीन्द

भीलवाड़ा

10.00

72

मंदिर श्री चारभुजा जी गढबोर

राजसमंद

574.64

73

दादा देवराज मंदिर

राजसमंद

24.61

74

पीपलाज माता जी मंदिर

राजसमंद

46.14

75

माता जी कुण्ड 

राजसमंद

5.00

76

मंदिर श्री रूपनारायण जी सेवन्त्री

राजसमन्द

326.00

77

धंधेश्‍वरधाम, गंगापुर सिटी

सवाई माधोपुर

00.00

78

मंदिर श्री चौथ माता जी चौथ का बरवाडा

सवाई माधोपुर

28.00

79

मंदिर श्री खाटू श्याम जी

सीकर

521.14 पर्यटन विभाग

80

मंदिर श्री गोगा जी (गोगामेड़ी) नोहर

हनुमानगढ़

2527.00

81

मन्दिर श्री लल्ली स्मारक बाग भुवाली

नैनीताल

6.44

82

मन्दिर श्री कुशल बिहारी जी बरसाना

मथुरा

23.00

83

श्री महादेव मंदिर  मणिकर्णिका

वाराणसी

100.00

84

श्री राधामाधव मंदिर

वृंदावन

50.00

85

मन्दिर श्री राधा माघव जी (जयपुर मन्दिर)

वृन्दावन

20.00

86

मंदिर श्री कृष्णाय माता जी किशनगढ

बारां

52.00

87

श्री लोहार्गल तीर्थ स्थल

झुन्झुनू

200.00

88

मंदिर श्री मंगलेश्वर जी मगरदा नदी के समीप

बांसवाडा

181.60

89

मंदिर श्री गंगा जी गंगोत्री

उत्तराखण्ड़

30.00

90

फतह मेमोरियल सराय

उदयपुर

5.00

91

मंदिर श्री रसीक बिहारी जी

जोधपुर

6.70

92

मंदिर श्री बलदेव परशुराम जी

जयपुर

17.41

93

मंदिर श्री करणी माता जी

चुरू

35.00

94

मंदिर भैरू जी रतनगढ

चुरू

35.00

95

मंदिर श्री लक्ष्मीनारायण

चुरू

5.00

96

मंदिर श्री रघुनाथ जी

चुरू

75.00

97

मंदिर श्री मुरली मनोहर जी

चुरू

25.00

98

मंदिर श्री शनिमहाराज

चित्तौडगढ

50.00

99

मंदिर श्री सिद्धि विनायक

बांसवाडा

25.00

100

मंदिर श्री जोगणिया माता जी

बांसवाडा

10.00

101

मंदिर श्री नागणेची जी पचपदरा (द्वितीय चरण)

बाडमेर

225.00

102

मंदिर श्री निम्बेश्वर महादेव

पाली

100.00

103

मंदिर श्री नकलल महादेव

झालावाड

39.00

104

मंदिर श्री घुश्मेश्वर महादेव

स.माधोपुर

50.00

105

मंदिर श्री बालकानन्द आश्रम

टोंक

100.00

106

राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार के 100 मंदिरों में दान पात्र

-

20.00

देवस्थान विभाग का आधुनिकीकरण

राजस्थान राज्य के प्रमुख मंदिरों एवं तीर्थ स्थलों से संबंधित सूचनाये देशी विदेशी पर्यटकों, एवं श्रद्धालुओं तक पहुंचाने हेतु देवस्थान विभाग द्वारा तैयार वेबसाइट www.devasthan.rajasthan.gov.in पर अद्यतन की जाती है। इस वर्ष इसे नया रूप देते हुए अधिकांश सूचनाओं को ऑनलाइन किया गया है. इसके साथ ही ई- के रूप में विभिन्न प्रक्रियाओं का ऑनलाईन अंकन एवं उनकी प्रोसेसिंग की सुविधा प्रदान की गयी है, जिसका संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है-

क्र.सं.

कार्य/सुविधा

1

विभागीय पोर्टल का नवीन प्रारूप

2

विभिन्न विभागीय योजनाओं नीतियों/नियमों, अभिलेखों की सरल जानकारी की सुविधा

3

विभिन्न विभागीय योजनाओं के अन्तर्गत ऑनलाईन आवेदन एवं उसकी प्रोसेसिंग की सुविधा

4

मंदिरों की जी.आई.एस. मैपिंग

5

विभाग के द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों की मॉनिटरिंग करने एवं बनाए गए मास्टर प्लान को अपलोड करने की सुविधा

6

जनसामान्य से दान/सहयोग की राशि ऑनलाईन लिये जाने की सुविधा

7

विभाग द्वारा आयोजित किये जाने वाले मेलों/उत्सवों एवं कार्यक्रमों के कैलेण्डर के रूप में दर्ज किये जाने एवं प्रदर्शित किये जाने की सुविधा

8

न्यायिक प्रकरणों के अपडेशन एवं निस्तारण हेतु सुविधा

9

मंदिरों के सम्पदा रजिस्टर, इन्वेन्टरी रजिस्टर की स्कैनिंग

10

मंदिरों में विद्यमान विभिन्न सामग्री एवं बहुमूल्य आभूषणों के इन्वेन्टरी मैनेजमेंट की सुविधा

11

ट्रस्टों के अभिलेखों की स्कैनिंग

12

ट्रस्टों के द्वारा सबमिट की जाने वाली नियमित सूचनाओं को प्रपत्र के रूप में दर्ज किये जाने एवं अपलोड किये जाने की सुविधा

13

जिलेवार तहसीलों से प्राप्त मंदिर माफ़ी और डोली भूमि के अभिलेखों की स्कैनिंग

14

मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों के महंतों/पुजारियों का समुचित डाटाबेस संधारित करने की व्यवस्था

भाग—6
देवस्थान विभाग द्वारा संचालित तीर्थ यात्रा योजनायें

क्र.सं.

योजना का नाम

तीर्थयात्रा हेतु 
अनुदान राशि

यात्रियों की सीमा

1

कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा योजना

कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा पर रूपये 
1,00,000/- (अक्षरे एक लाख रूपये ) 
प्रति यात्री की सहायता।

100

2

सिन्धु दर्शन तीर्थयात्रा योजना

यात्रा पर हुए व्यय के 50 प्रतिशत की 
प्रतिपूर्ति अधिकतम 10,000/- प्रति 
तीर्थयात्री तक

200

3

वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना

वरिष्ठ नागरिकों को उनके जीवनकाल में 
एक बार प्रदेश के बाहर विभिन्न
नाम निर्दिष्ट तीर्थस्थानों में से किसी एक 
स्थान की यात्रा (चयनित 16  तीर्थ स्थलों की यात्रा)

10000

 वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2019

1  

 वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना

2

 

2013 (2016 से हवाई यात्रा को सम्मिलित करते हुये वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के नाम से)

3

 

इस योजना का उद्देश्य राजस्थान के मूल निवासी वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष या अधिक आयु के व्यक्ति) को उनके जीवन काल में एक बार प्रदेश के बाहर देश में स्थित विभिन्न नाम निर्दिष्ट तीर्थ स्थानों में से किसी एक स्थान की यात्रा सुलभ कराने हेतु राजकीय सुविधा एवं सहायता प्रदान करना है।

4

 

स्वयं विभाग द्वारा यात्रा का आयोजन तथा निर्धारित यात्रा का व्यय वहन ।

5

 

3000 रेलमार्ग से।
7500 वायुयान से
इसमें देवस्थान विभाग द्वारा तीर्थ स्थल हेतु आवेदकों की संख्या तथा यात्रा की संभाव्यता के आधार पर उक्त संख्या तथा अनुपात में परिवर्तन किया जा सकेगा।

6

 

यात्रा हेतु तीर्थ स्थान इस प्रकार है:-
रेल द्वारा:-
1. जगन्नाथपुरी 2. रामेष्वरम 3. तिरूपति, 4. द्वारकापुरी 5, वैष्णोदवी
हवाई जहाज द्वारा:-

क्र.सं.

तीर्थ स्थान का नाम

यात्रा

1

रामेश्वरम-मीनाक्षी मंदिर, मदुरई

मदुरई तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

2

तिरूपति-श्रीपुरम लक्ष्मी स्वर्ण मंदिर, वेल्लोर तथा कांचीपुरम

तिरूपति या वेल्लोर तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा।

3

जगन्नाथपुरी-लिंगराज मंदिर- कोणार्क सूर्य मंदिर

भुवनेष्वर तक हवाई जहाज द्वारा आ्रगे बस द्वारा यात्रा ।

4

वैष्णो देवी

जम्मू तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा ।

5

द्वारकापुरी-सोमनाथ(त्रिवेणी-पांच पाण्डव गुफा)/नागेष्वर

जामनगर/राजकोट/केषोड तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा।

6

प्रयाग (इलाहबाद)-चित्रकूट-वाराणसी(काषी)- सारनाथ

इलाहबाद/वाराणसी तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा ।

7

बिहार शरीफ(नालंदा)-राजगीर-गया-बोध-गया-पटना साहिब

गया या पटना तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा ।

8

अमृतसर- आनन्दपुर साहिब

अमृतसर तक हवाई जहाज द्वारा, आगे बस द्वारा यात्रा

9

श्रवणबेलगोला- मैसूर

मैसूर/बंगलोर तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा

10

सम्मेद षिखर-गया-बोध गया/पटना-पावापुरी-कुण्डलपुर  (वैषाली)

रांची,पटना या गया तक  हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा ।

11

गोवा

गोवा तक हवाई जहाज

12

षिरडी-षनि सिंगनापुर-त्रयम्बकेष्वर-घृष्णेष्वर, अजन्ता-एलोरा

मुम्बई/औरंगाबाद/ षिरडी तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

13

कामाख्या-गुवाहाटी(राज्य संग्रहालय, कलाक्षेत्र)

गुवाहाटी तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा ।

14

उज्जैन(महाकालेष्वर, काल भैरव मंदिर,हरसिद्धि, नवग्रह मंदिर)ओंकारेष्वर

इंदौर तक हवाइ जहाज  आगे बस द्वारा यात्रा।

15

हरिद्वार-ऋषिकेष-मसूरी- देहरादून

देहरादून तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा।

16

कोच्चि,त्रिषूर, श्री सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर, गुरूवायुर

कोच्ची/मदुरई तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा ।

17

लखनऊ- अयोध्या

लखनऊ तक हवाई जहाज द्वारा आगे बस द्वारा यात्रा

नोटः- उक्त सूची में देवस्थान विभाग द्वारा और स्थानों को सम्मिलित अथवा कम किया जा सकेगा।
हवाई यात्रा में कुछ दूर तक बस द्वारा यात्रा भी की जायेगी, तीर्थ यात्रा हेतु निर्धारित प्रस्थान स्थल भी विज्ञप्ति में वर्णित होेगें।
7

यात्रा पर जाने के लिये पात्रता:-

 इस योजना के अन्तर्गत आवेदक को निम्नलिखित शर्तें पूर्ण करनी होंगी-

  1. राजस्थान का मूल निवासी हो एवं 60 वर्ष से अधिक आयु का हो। (आयु की गणना 1 अप्रैल, 2019 को आधार मान कर की जायेगी)
  2. आयकरदाता न हो ।
  3. आवेदक द्वारा पूर्व में वरिष्‍ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना का लाभ न उठाया गया हो ।
  4. इस यात्रा योजना के अन्तर्गत, पूर्व में यात्रा न किये जाने संबंधी आशय का Self-Declaration यात्री को देना होगा । यदि किसी भी समय यह पाया गया कि यात्री द्वारा इस शर्त का उल्लंघन किया गया है, तो यात्रा पर हुआ सम्पूर्ण व्यय एवं उस पर 25 प्रतिशत राशि दण्डात्मक देय होगी एवं राजकीय प्रावधानों के अन्तर्गत वसूली/दण्डात्मक कार्यवाही की जा सकेगी ।
  5. भिक्षावृत्ति पर जीवन यापन करने वाले योजना के पात्र नहीं होंगे ।
  6. यात्रा हेतु शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम हो और किसी संक्रामक रोग यथा टी0बी0, कांजेस्टिव कार्डियक, श्वांस में अवरोध संबंधी बीमारी, कॉरोनरी अपर्याप्तता (Coronary Insufficiency),  कॉरोनरी थ्रॉमबोसिस (Coronary Thrombosis), मानसिक व्याधि, संक्रामक कुष्ठ आदि से ग्रसित न हो ।
  7. वरिष्ठ नागरिक को, आवेदन पत्र के साथ चिकित्सा अधिकारी द्वारा इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि वह व्यक्ति प्रस्तावित यात्रा हेतु शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं सक्षम है। (यह प्रमाण पत्र आवेदन पत्र भरते समय ही अपलोड किया जाना है)
  8. जिन आवेदकों द्वारा विगत वर्षों में उक्‍त योजना अन्‍तर्गत आवेदन तो किया है, किन्‍तु उनका  उक्‍त योजना में यात्रा हेतु चयन नहीं हुआ है, वे आवेदन करने के पात्र होंगे ।
  9. किन्‍ही परिस्थितियों में रेल एवं हवाई यात्रा के दौरान स्‍थान रिक्‍त रहने पर आवश्‍यकता अनुसार ऐसे इच्‍छुक पात्र व्‍यक्ति जिन्‍होनें आवेदन किया हो, लेकिन अन्‍यथा यात्रा के पात्र है, ऐसे व्‍यक्ति को रिक्‍त रही सीटों पर यात्रा पर जाने हेतु अनुमत करने का अधिकार राज्‍य सरकार के अनुमोदन के पश्‍चात आयुक्‍त, देवस्‍थान विभाग को होगा ।
  10. केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/केन्द्र व राज्य सरकार के उपक्रम/स्थानीय निकाय से सेवानिवृत्त कर्मचारी/अधिकारी एवं उनके जीवन साथी यात्रा के पात्र होंगे इसके साथ-साथ प्रदेश के भारत के सैन्‍य बलों, अर्द्ध सैन्‍य बलों व पुलिस बलों से सेवानिवृत संबंधित राजस्‍थान राज्‍य के पात्र वरिष्‍ठजन भी यात्रा में सम्मिलित किए जा सकेंगे किन्‍तु उक्‍त सेवा के सेवानिवृत कर्मचारी/बल के वरिष्‍ठजन योजना की अन्‍य शर्तों की पूर्ति करने पर ही यात्रा के लिए पात्र होंगे । इस श्रेणी के आवेदक आयकर दाता नहीं होने चाहिए ।
  11. वे आवेदक जो विगत वर्षों में लॉटरी में चयनित हो चुके थे, लेकिन यात्रा के लिये आमंत्रित किये जाने के बाद भी उनके द्वारा यात्रा सम्पन्न नहीं की गई, ऐसे पूर्व आवेदक भी इस योजना में पात्र नहीं होंगे।
  12. योजना अन्‍तर्गत प्रदेश के ऐसे वरिष्‍ठ नागरिक जो पत्रकार/मीडिया से संबंधित हो जो योजना अन्‍तर्गत पात्रता रखते हो, आवेदन के पात्र होगें (सूचना एवं जनसम्‍पर्क निदेशालय द्वारा सुचियत), कोटा (Quota) 5 प्रतिशत की सीमा तक होगा
8

निरर्हता (अपात्रता) :-

1.   यदि यह पाया गया कि आवेदक/यात्री ने असत्य जानकारी देकर या तथ्यों को छिपाकर आवेदन किया है तो उसे किसी भी समय योजना के लाभों से वंचित किया जा सकेगा ।
2.   नियम 15 में वर्णित शर्तों के उल्लंघन पर भी आवेदक/ यात्री को योजना के लाभों से वंचित किया जा सकेगा ।
3.   नियम 8 (1) एवं (2) के अन्तर्गत निरर्ह व्यक्ति को भविष्य में आवेदन के लिये भी निरर्ह घोषित किया जा सकेगा एवं योजना के लाभ से वंचित रहेगा ।

9

मूल आवेदक  के साथ जीवनसाथी / सहायक की यात्रा के सम्बन्ध प्रावधान :-

1. आवेदक अपने साथ जीवन साथी अथवा सहायक में से किसी एक को ले जाने हेतु अनुमत  होगा । परन्तु आवेदन करते समय ही आवेदक को अपने आवेदन में ही यह बताना होगा कि उसका जीवन-साथी/सहायक भी उसके साथ यात्रा करने का इच्छुक है । 
2. आवेदक के जीवन साथी की आयु 60 वर्ष से कम होगी, तब भी आवेदक के साथ यात्रा कर सकेगा/सकेगी। 
3. पति/पत्नी के साथ-साथ यात्रा करने पर सहायक को साथ ले जाने की सुविधा नहीं रहेगी। 
4. यात्रा में सहायक को ले जाने की सुविधा तभी प्राप्त होगी जब - आवेदक की आयु 65 वर्ष से अधिक है  तथा उसने अकेले रेल यात्रा करने हेतु आवेदन किया है । हवाई यात्रा में सहायक का प्रावधान नहीं रहेगा, किन्‍तु मूल आवेदक पत्‍नी अथवा पति के होने की स्थिति में पति/पत्‍नी यात्रा में जाने के लिए अनुमत होंगे ।
5. रेल यात्रा में सहायक का यात्री का संबंधी होना आवश्यक नहीं है । सहायक मूल आवेदक के परिवार में से अथवा आवेदक के कोई परिचित हो सकते हैं। 
6. सहायक की न्‍यूनतम आयु 21 वर्ष से अधिकतम 50 वर्ष होनी चाहिए । सहायक को यात्रा पर ले जाने की दशा में उसे भी उसी प्रकार की सुविधा प्राप्त होगी, जो कि यात्री को अनुज्ञेय है ।
7. सहायक की आयु मूल यात्री की आयु से अधिक न हो, एवं सहायक केन्‍द्र/राज्‍य सरकार अथवा राजकीय निगम/मण्‍डल/आयोग/संस्‍था/उपक्रम/विभाग में कार्यरत् न हो ।

10

आवेदन की प्रक्रिया:-

1. आवेदन देवस्थान विभाग के पोर्टल पर दिये गये लिंक के माध्यम से केवल ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे ।
2. आवेदक व उसके साथ जाने वाले सहायक अथवा पति-पत्‍नी दोनों के पास भामाशाह कार्ड अवश्य होना चाहिए एवं आवेदकों का आधार कार्ड भी भामाशाह कार्ड से जुडा होना आवश्‍यक है ।
3. आवेदन पत्र में अपनी पसंद के तीन तीर्थ-स्थल वरीयता क्रम (Preference) में अंकित किए  जाए।
4. आवेदन के उपरांत उसकी प्रिंटेड प्रति सुविधा हेतु रख लें ।
नोटः- आवेदकों को सलाह दी जाती है कि आवेदन से पूर्व ही भामाशाह कार्ड हेतु पंजीयन की कार्यवाही पूर्ण कर लें । इससे आवेदक को फोटो व दस्तावेज अपलोड करने व अन्य विवरण भरने की आवश्यकता नहीं रहेगी ।

11

आवेदन व पात्रता संबंधी अन्य मुख्य शर्तें व प्रावधान:-

1. आवेदक को आवेदन में किन्हीं दो निर्देशितियों के नाम, मोबाइल नंबर एवं अन्य विशिष्टियों का विवरण भी देना होगा, जिससे किसी आपात स्थिति में उनसे तुरन्त संपर्क किया जा सके । (उक्‍त संपर्क सूत्र यात्रा के पूर्व तक स्‍वत: अपडेड करने की सुविधा विभागीय पोर्टल पर उपलब्‍ध रहेगी) 
2. यात्रियों का चयन जिला मुख्यालय पर जिला कलक्टर द्वारा लॉटरी द्वारा किया जाएगा । चयनित यात्रियों की सूची जिला मुख्यालय/उपखण्ड मुख्यालय/तहसील कार्यालय तथा देवस्थान विभाग की वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाएगी । 
3. चयनित यात्री को यात्रा से पूर्व स्वास्थ्य संबंधी निर्धारित चिकित्सकीय प्रमाण नियम-7 के बिन्‍दु-7 के अनुसार प्राप्‍त कर लाना होगा।
4. चयन के उपरान्त यदि किसी कारणवश आवेदक तीर्थयात्रा नहीं करता है, तो उसे विभाग द्वारा निर्धारित हेल्पलाइन पर समय से पूर्व सूचना देनी आवश्यक होगी, अन्यथा उसे भविष्य में इस योजना हेतु पात्र नहीं माना जायेगा।

12

चयन की प्रक्रिया:-

यात्रियों का चयन जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा निम्न लिखित प्रक्रिया के अन्तर्गत किया जाएगा:-

  1. प्रत्येक स्थान की यात्रा हेतु जिलावार कोटा निर्धारित किया जायेगा, जिसमें आवेदकों की संख्या के साथ उस जिले के वरिष्ठ नागरिकों की जनसंख्या के अनुपात को अधिभार देते हुए कोटा निर्धारित किया जायेगा . यदि निर्धारित कोटे से अधिक संख्या में आवेदन प्राप्त होते हैं , तो लॉटरी (कम्प्यूटराईज्ड ड्रा आफ लाट्स )  द्वारा यात्रियों का चयन किया जायेगा। कोटे के 100 प्रतिशत अतिरिक्त व्यक्तियों की प्रतीक्षा सूची (Waiting List) भी बनायी जायेगी   । आवश्यकतानुसार शेष अन्य आवेदकों की भी अतिरिक्त आरक्षित सूची (Additional Reserve List) भी बनायी जा सकेगी। 
  2. चयनित यात्री के यात्रा पर न जाने की स्थिति में प्रतीक्षा सूची में सम्मिलित व्यक्ति को यात्रा पर भेजा जा सकेगा । इसमें भी यात्री कम पड़ने पर अतिरिक्त आरक्षित सूची से बुलाया जा सकेगा . प्रतीक्षा सूची  एवं अतिरिक्त आरक्षित सूची में से यात्रा हेतु चयन , मूल चयन सूची में से यात्रियों के उपलब्ध न होने पर ही किया जायेगा । इसके पश्‍चात् भी रेल एवं हवाई यात्रा में सीटे रिक्‍त रहने की  स्थिति में योजना के नियम - 7 के बिन्‍दु - 9 में वर्णित पात्र व्‍यक्तियों को आयुक्‍त , देवस्‍थान की अनुमति से शामिल किया जा सकेगा ।
  3. लॉटरी निकालते समय आवेदक के साथ उसकी पत्नी अथवा पति या सहायक को एक मानते हुए लॉटरी निकाली जायेगी एवं लॉटरी में चयन होने पर यात्रा के लिये उपलब्ध बर्थ /सीटों में से उतनी संख्या कम कर दी जायेगी ।  
  4. रेल एवं हवाई यात्रियों की लॉटरी एक साथ निकाली जायेगी, सबसे पहले हवाई यात्रा हेतु लॉटरी निकाली जायेगी, उसके उपरान्त शेष में से रेल यात्रा हेतु यात्रियों का चयन किया जायेगा ।
  1. चयनित यात्रियों एवं प्रतीक्षा सूची को देवस्थान विभाग के पोर्टल, कलक्टर कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर एवं अन्य ऐसे माध्यम से जो कि उचित समझे जाए, प्रसारित किया जायेगा ।
  2. केवल वह व्यक्ति ही जिसका चयन किया गया है, यात्रा पर जा सकेगा। वह अपने साथ अन्य किसी व्यक्ति को नहीं ले जा सकेगा ।
13

यात्रा की प्रक्रिया:-

यात्रा की सामान्‍य प्रक्रिया :-
1. जिला कलक्टर द्वारा चयनित यात्रियों की सूची देवस्थान विभाग को सौंपी जायेगी । 
2. विभाग द्वारा यात्रा हेतु अधिकृत एजेन्सी को उक्‍त चयनित यात्रियों की सूची सौंपी जायेगी ।
3. निर्धारित एजेंसी यात्रियों के समूह को यात्रा पर ले जाने की व्यवस्था करेगी ।
4. यात्रियों के यात्रा का समुचित व्यय एवं उन्हें उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं का विनिश्चय राज्य सरकार द्वारा किया जायेगा ।
(अ) रेल द्वारा यात्रा :-
1. यात्रियों के साथ अनुरक्षक (एस्कार्ट) के रूप में देवस्थान विभाग/अन्‍य विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों को भेजा जायेगा । इन विभागों के कर्मचारियों के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में राजकीय निगम/मण्डल/आयोग के अधिकारियों/कर्मचारियों को भी भेजा जा सकेगा । उक्त व्यवस्था पर होने वाला व्यय राज्य सरकार वहन करेगी । प्रत्येक ट्रेन में एक अधिकारी ट्रेन प्रभारी के रूप में लगाया जायेगा । आयुक्‍त, देवस्थान विभाग द्वारा आवश्‍यकतानुसार अतिरिक्त रूप से अपने विभागीय ट्रेन प्रभारी लगाये जा सकेंगे। इसके अतिरिक्‍त प्रत्‍येक कोच में 2 अनुरक्षक की दर से कुल 30 अनुरक्षक, एक चिकित्‍सा अधिकारी, दो नर्सिंग स्‍टाफ, 1+4 का सुरक्षा जाप्‍ता तथा पृथक से एक पेन्‍ट्री इन्‍चार्ज रखा जायेगा। उक्‍त सभी स्‍टॉफ ट्रेन प्रभारी के पर्यवेक्षण में ड्यूटी देंगे तथा किसी भी प्रकार की ड्यूटी में लापरवाही होने पर ट्रेन प्रभारी के माध्‍यम से देवस्‍थान विभाग को सूचित करेंगे।
2. यात्रियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्था जिला स्तरीय गठित समिति द्वारा सुनिश्चित की जायेगी ।
3. एक बार यात्रा शुरू करने पर यात्री यदि बीच में यात्रा छोड़ना चाहेगा. तो उसे ऐसी सुविधा सरकार की ओर से नहीं दी जायेगी ।
(ब) हवाई जहाज  द्वारा यात्रा :-
1. यात्रियों के साथ अनुरक्षक (एस्कार्ट) के रूप में देवस्थान विभाग/संभागीय आयुक्‍त/जिला कलेक्‍टर्स के माध्‍यम से प्राप्‍त सूची अनुसार अधिकारियों/कर्मचारियों को भेजा जायेगा । इन विभागों के कर्मचारियों के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अन्‍य विभागों एवं राजकीय निगम/मण्डल/आयोग के अधिकारियों/कर्मचारियों को भी भेजा जा सकेगा । उक्त व्यवस्था पर होने वाला व्यय राज्य सरकार वहन करेगी । प्रत्येक हवाई जहाज यात्रा में 40 यात्रियों के समूह पर एक अधिकारी/कार्मिक अनुरक्षक के रूप में लगाया जायेगा । 40 से अधिक 80 यात्रियों तक के समूह में 2 अनुरक्षक तथा 80 से अधिक यात्रियों का समूह होने पर 3 अनुरक्षक लगाये जायेंगे। उक्‍त अनुरक्षक यात्रा के दौरान देवस्‍थान विभाग के निर्धारित कन्‍ट्रोल रूम में उपस्थित अधिकारी/कार्मिक के संपर्क में रहेगें तथा यात्रा के पश्‍चात यात्रा की रिपोर्ट मय यात्रियों के फीडबैक देवस्‍थान विभाग को प्रस्‍तुत करेंगे ।  इसके अतिरिक्‍त एक अनुरक्षक एजेंसी का भी यात्रा में साथ रहेगा । एक से अधिक अनुरक्षक कार्यरत् होने पर सबसे वरिष्‍ठ या विभाग द्वारा नामित अनुरक्षक प्रभारी के रूप में कार्य करेंगे। अनुरक्षक नियुक्ति में आयुक्‍त, देवस्‍थान विभाग का निर्णय अन्तिम होगा ।
2. हवाई यात्रा में चयन होने पर यात्रियों को निर्धारित तीर्थ स्थान के नजदीकी एयरपोर्ट तक हवाई जहाज द्वारा तथा वहां से तीर्थ स्थान तक बस द्वारा यात्रा करवाई जायेगी । 
नोट:- सभी तीर्थ यात्रियों को यात्रा हेतु निर्धारित प्रस्थान स्थल (रेलवे स्टेशन/एयरपोर्ट)  तक स्वयं के व्यय से पहुंचना होगा ।

14

यात्रियों के समूह:-

यात्रा केवल सामूहिक रूप से आयोजित की जायेगी । उक्त समूहों का निर्धारण राज्य सरकार अथवा राज्‍य सरकार द्वारा अधिकृत प्राधिकारी/एजेन्सी द्वारा किया जायेगा। किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम संख्या में यात्री उपलब्ध होने पर ही यात्रा प्रारंभ की जायेगी । योजना के अन्तर्गत चयन होने मात्र से ही किसी व्यक्ति को यात्रा कराने हेतु राज्य सरकार बाध्य नहीं होगी।

15

अन्य व्यक्तियों के यात्रा करने पर प्रतिबन्ध:-

केवल वह व्यक्ति ही, जिसका चयन इस योजना के अन्तर्गत यात्रा हेतु किया गया है, इस यात्रा पर जा सकेगा । वह अपने साथ अन्य किसी व्यक्ति को, भले ही वह यात्रा का व्यय देने हेतु तैयार हो, यात्रा में साथ नहीं ले जा सकेगा । ट्रेन एवं वाहनों में केवल चयनित व्यक्ति ही यात्रा करेगा और एक सीट/बर्थ पर केवल एक ही व्यक्ति यात्रा करेगा ।

16

अतिरिक्त व्यय के संबंध में:-

यदि कोई यात्री, यात्रा के दौरान सरकार द्वारा निर्धारित मापदण्डों/सुविधाओं के अतिरिक्त सुविधायें प्राप्त करना चाहता है तो उसका भुगतान उसे स्वयं करना होगा ।

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यात्रा के दौरान अपेक्षाएँ:-

1. यात्री किसी तरह के ज्वलनशील पदार्थ या मादक पदार्थ किसी भी रूप में साथ नहीं ले जा सकेंगे ।
2. यात्री तीर्थ की मर्यादा के अनुसार आचरण करेंगे, ताकि प्रदेश की छवि अन्यथा प्रभावित न हों।
3. यात्री अपने निर्धारित सम्पर्क अधिकारी/प्रभारी अधिकारी के निर्देशों का पालन करेंगे ।
4. यात्रियों द्वारा उपरोक्त आचार संहिता के पालन करने संबंधी आशय का शपथ पत्र दिया जायेगा ।

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यात्रा के दौरान अप्रत्याशित परिस्थितियाँ:-

यात्रा के दौरान होने वाली किसी दुर्घटना अथवा कठिनाई के लिये राज्य शासन अथवा उसका कोई अधिकारी/ कर्मचारी उत्तरदायी नहीं होगा ।

19

योजना का व्यय:-

योजना के क्रियान्वयन हेतु व्यय (बजट सीमा तक) जिसमें यात्रा व्यय, अन्य प्रशासनिक व्यय तथा परिवहन, दूरभाष, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, मेन विथ मशीन तथा सॉफ्टवेयर विकास, व्यावसायिक एवं परामर्श सेवायें प्राप्त करना, सत्कार व्यय तथा यात्री बीमा व्यय आदि सम्मिलित हैं, करने के लिये आयुक्त, देवस्थान विभाग सक्षम होंगे ।

20

संचालक:-

योजना के दिन प्रतिदिन संचालन/मोनिटरिंग हेतु एक अधिकारी की नियुक्ति की जायेगी । उसको आवश्यकतानुसार वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियां देवस्थान विभाग द्वारा प्रत्यायोजित की जा सकेगी । साथ ही योजना के प्रभावी एवं समय संचालन, प्रबंधन एवं फीडबैक हेतु एक पी.एम.यू. (प्रौजेक्‍ट मॉनिटरिंग यूनिट) का गठन किया जायेगा, जिसका व्‍यय योजना की प्रशासनिक मद से अनुमत होगा ।

21

परिभाषाएँ:-

इन नियमों में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो - 
(अ) ‘‘तीर्थ स्थान’’  से तात्पर्य उस स्थान/स्थानों से है जो कि देवस्थान विभाग द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किये जायें ।
(ब) ‘‘यात्रा’’ से तात्पर्य नियम 6 में उल्लेखित स्थान की यात्रा एवं उक्त स्थान की यात्रा के लिये की गई आनुषंगिक यात्राओं से है ।

(स) ‘‘यात्री’’ से तात्पर्य उस व्यक्ति/व्यक्तियों के समूह से है जो नियम 6 में उल्लेखित स्थान/ स्थानों की यात्रा प्रारंभ करता है।
(द) ‘‘आवेदक’’ से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति/ व्यक्तियों के समूह से है जो कि नियम 6 में उल्लेखित स्थान की यात्रा करने हेतु आवेदन प्रस्तुत करता है।
(य) ‘‘सहायक’’ से तात्पर्य उस पुरुष से है जो कि 65 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के आवेदक के साथ यात्रा पर जाता है । पुरूष सहायक की पात्रता आयु न्‍यूनतम 21 से 50 वर्ष होगी ।
(र) ‘‘कोटा’’ से तात्पर्य यात्रियों की उस संख्या से है जो राज्य सरकार/ देवस्थान विभाग राज्य, जिला स्‍तर अथवा अन्य प्रकार से निर्धारित करें।
(ल) ‘‘एजेन्सी’’ से तात्पर्य उस संस्था अथवा संगठन से है जिसका चयन देवस्‍थान विभाग इन नियमों के अन्तर्गत यात्राएँ आयोजित करने हेतु करे । रेल यात्रा हेतु प्रथमत: आई.आर.सी.टी.सी. के पैकेज के अनुसार यात्रियों को भेजा जाएगा ।
(व) ‘‘संचालक’’ से तात्पर्य उस एजेंसी से है , जिसे योजना के संचालन हेतु देवस्थान विभाग द्वारा अधिकृत किया जाये।
(झ) ‘‘जीवन साथी’’ से तात्पर्य यात्री की पत्‍नी अथवा पति से है । 
(ञ) ‘‘अनुरक्षक’’ (एस्कार्ट) से तात्पर्य उस अधिकारी / कर्मचारी अथवा व्यक्ति से है, जो आवेदक/ आवेदकों के साथ देवस्‍थान विभाग द्वारायात्रा पर भेजा जाएगा ।

22

तीर्थयात्रा योजना हेतु राज्य स्तर पर प्रबंध व्यवस्था:-

विभिन्न तीर्थ स्थानों की यात्रा हेतु यात्रियों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य स्तर पर देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा ।
1. इस राज्‍य स्‍तर पर वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा समिति का गठन किया जायेगा।
2. उक्त समिति में निम्नानुसार सदस्य होंगे-

I

देवस्थान मंत्री

अध्यक्ष

II

राज्य मंत्री/उपमंत्री

सह अध्यक्ष

III

अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख शासन सचिव/शासन सचिव, गृह विभाग

सदस्य

IV

अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख शासन सचिव/शासन सचिव, देवस्‍थान विभाग

सदस्य

V

अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख शासन सचिव/शासन सचिव, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग

सदस्य

VI

अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख शासन सचिव/शासन सचिव, पर्यटन विभाग

सदस्य

VII

अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख शासन सचिव/शासन सचिव, अल्‍प संख्‍यक मामलात विभाग

सदस्य

VIII

आयुक्त, देवस्थान विभाग

सदस्य-सचिव

अध्‍यक्ष किसी भी अन्‍य विभाग के अधिकारी को आवश्‍यकतानुसार बुला सकेंगे। समिति के किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण समिति की कार्यवाही को प्रश्नगत नहीं किया जायेगा।

23

तीर्थयात्रा योजना हेतु देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार के कर्तव्यः-

1- राज्य सरकार निम्नलिखित कर्तव्यों का निर्वहन करेगीः-

वरिष्ठ नागरिकों की यात्राओं के लिये आवश्यक और उपयोगी जानकारी का संग्रहण एवं प्रचार-प्रसार।

यात्रियों की शिकायतों/समस्याओं को स्थानीय अधिकारियों के ध्यान में लाकर उनका निराकरण करना।

यात्रियों की सुविधा के उद्देश्य से अन्य आवश्यक कार्य करना एवं सुझाव देना।

अन्य कार्य जो समय-समय पर सरकार द्वारा सौंपे जाये।

यात्रा योजना का सुदृढीकरण हेतु सूचना एवं प्रौद्योगिकी तथा मेन विथ मशीन के माध्‍यम से संबंधित साफ्टवेयर विकास तथा अन्‍य प्रभावी फीडबैक मेकेनिज्‍म तैयार करवाया जाना ।

2- समिति अपने कर्तव्यों की पूर्ति के लिये समय-समय पर उप समितियाँ बना सकेगी ।

24

तीर्थयात्रा योजना हेतु जिला स्तर पर प्रबंध समिति:-

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना हेतु जिला स्तर पर चयन, लॉटरी एवं समुचित प्रबंध व्यवस्था हेतु राज्‍य सरकार एक समिति गठित करेगी, जिसमें जिला स्‍तर के निम्‍न सदस्‍य सम्मिलित होंगे:-

1.

प्रभारी मंत्री/प्रभारी सचिव, संबंधित जिला

-

अध्यक्ष

2.

जिला कलक्टर

-

सदस्य

3.

पुलिस आयुक्त/अधीक्षक

-

सदस्य

4.

मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद

-

सदस्य-सचिव

5.

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

-

सदस्य

6.

उप निदेशक, पर्यटन विभाग

-

सदस्य

7.

सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग

-

सदस्य

जिले के प्रभारी मंत्री /प्रभारी सचिव की अनुपस्थिति में संबंधित  जिला कलक्टर, समिति की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे । समिति के किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण समिति की कार्यवाही को प्रश्नगत नहीं किया जायेगा  

25

तीर्थयात्रा योजना हेतु जिला स्तर पर प्रबंध समिति के कर्तव्यः-

1- जिला स्तरीय प्रबंध समिति निम्नलिखित कर्तव्यों का निर्वहन करेगीः-
(अ) यात्रियों का चयन, लॉटरी एवं सूची की तैयारी का कार्य  इसी समिति द्वारा किया जाएगा ।
(ब)  वरिष्ठ नागरिकों की यात्राओं के लिये आवश्यक उपयोगी जानकारी का संग्रहण एवं प्रचार- प्रसार ।
(स)  यात्रा के दौरान सुरक्षा एवं स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी दलों की नियुक्ति ।
(द)  यात्रियों की शिकायतों/समस्याओं को स्थानीय अधिकारियों के ध्यान में लाकर उनका निराकरण करना ।
(य)  यात्रियों की सुविधा के उद्देश्य से अन्य आवश्यक कार्य करना एवं सुझाव देना ।
(र)   अन्य कार्य जो समय-समय पर सरकार द्वारा सौंपे जायें ।

26

अन्य:-

उपरोक्त वर्णित नियमों में प्रावधान होते हुए भी योजना के क्रियान्वयन हेतु संसाधनों की उपलब्धता सुलभ कराने एवं प्रशासनिक निर्णय, जिसमें वित्तीय व्यय भी सम्मिलित हैं, के लिये आयुक्त, देवस्थान विभाग अधिकृत होंगे ।

27

योजना का निर्वचन:-

उक्त विवरण केवल सरल संकेतक है । योजना संबंधी अन्य शर्तों, प्रावधानों के लिये मूल विभागीय आदेश व परिपत्रों का अवलोकन करें । विभाग द्वारा नियमों के अध्यधीन उपनियम बनाए जा सकेंगे ।
योजना संबंधी किसी भी बिन्दु पर समस्या समाधान आयुक्त कार्यालय देवस्थान विभाग, उदयपुर से किया जा सकेगा । इस योजना के किसी भी दिशा निर्देश, आदेश की व्याख्या के लिये देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा ।

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना में यात्रा का संक्षिप्त विवरण

वर्ष

रेल
(यात्री सं0)

हवाई जहाज
(यात्री सं0)

योग

तीर्थ स्थलों की संख्या

कुल व्यय (लाख में)

2015-16

8710

0

8710

7

1421.68

2016-17

8207

762

8969

11

1499.70

2017-18

11312

4416

15728

13

2908.91

2018-19

4019

3293

3331

17

1146.82 

2019-20

5000

5000

10000 प्रस्‍तावित

16

-

कैलाश मानसरोवर योजना -

1

योजना का नाम

कैलाश मानसरोवर यात्रा हेतु श्रद्धालुओं को सहायता

2

योजना प्रारंभ वर्ष

1 अप्रेल 2011 से

3

योजना का उद्देश्य व संक्षिप्त विवरण

विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से कैलाश मानसरोवर की यात्रा सफलतापूर्वक सम्पन्न करने वाले राजस्थान के स्थायी मूल निवासियों को श्रद्धालुओं को रूपये 1,00,000/- (अक्षरे एक लाख रूपये) प्रति यात्री की सहायता।

4

तीर्थयात्रा हेतु अनुदान राशि

रूपये 1,00,000/- (अक्षरे एक लाख रूपये) प्रति यात्री की सहायता।

5

योजना की शर्ते/पात्रता

(1) इस योजना का लाभ केवल राजस्थान के स्थायी मूल निवासियों को ही देय होगा। 
(2) कैलाश मानसरोवर की यात्रा विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से की जानी होगी एवं 
(3) यात्रा समाप्ति के पश्चात विदेश मंत्रालय द्वारा सफलतापूर्वक यात्रा सम्पन्न किये जाने का प्रमाणीकरण संलग्न किया जाना होगा।
(4) जीवन काल में केवल एक बार अनुदान प्राप्त करने की पात्रता होगी।

6

आवेदन की प्रक्रिया

  1. कैलाश मानसरोवर की यात्रा हेतु आवेदन की प्रक्रिया विदेश मंत्रालय भारत सरकार के माध्यम से संपादित की जायेगी।
  2. अनुदान हेतु आवेदन की प्रक्रिया आनलाइन होगी, जिसकी तिथि विभागीय विज्ञप्ति अनुसार घोषित की जायेगी। सहायता अनुदान हेतु आवेदन-पत्र वांछित दस्तावेज सहित यात्रा करने के दो माह के अन्दर  जमा कराना होगा।
  3. ऑफलाइन की स्थिति में सहायता अनुदान हेतु आवेदन-पत्र विभागीय वेबसाईट से अपलोड कर सहायक आयुक्त कार्यालय देवस्थान विभाग में जमा कराना होगा।
  4. यदि निर्धारित कोटे से अधिक संख्या में आवेदन प्राप्त होते हैं, तो लाटरी (कम्प्यूटराईज्ड ड्रा आफ लाट्स) द्वारा यात्रियों का चयन किया जा सकेगा.

7

चयन व आवंटन की पक्रिया

कैलाश मानसरोवर की विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से यात्रा करने वाले श्रद्धालु यात्रा समाप्ति के दो माह के अन्दर अपना आवेदन संबंधित उपखण्ड अधिकारी/सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग के कार्यालय में मय मूल दस्तावेज स्वयं उपस्थित होकर प्रस्तुत करेंगे। 
प्रस्तुतकर्ता अधिकरी संलग्न दस्तावेजों को मूल से मिलान कर, सही पाये जाने पर, इस आशय का नोट अंकित करेंगे। 
उपखण्ड अधिकारी प्राप्त आवेदन पत्रों को 15 दिवस के अन्दर संबंधित सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग को अग्रेषित करेंगे, जो 15 दिवस में बाद जांच स्वीकृति जारी करेंगे।

सिन्धु दर्शन यात्रा योजना

1

योजना का नाम

सिन्धु दर्शन तीर्थयात्रा

2

योजना प्रारंभ वर्ष

1 अप्रेल, 2016 से

3

योजना का उद्देश्य व संक्षिप्त विवरण

भारत के लद्दाख स्थित सिन्धु दर्शन की तीर्थयात्रा पर जाने वाला तीर्थयात्री को सहायता

4

तीर्थ यात्रा हेतु अनुदान राशि

यात्रा पर हुए व्यय के 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति अधिकतम 10,000/- प्रति तीर्थयात्री तक

5

योजना में कुल लाभर्थियों की विभागीय सीमा

200 तीर्थयात्री
तीर्थयात्रा हेतु अधिक आवेदक होने पर लाटरी द्वारा चयन

6

योजना की शर्ते/पात्रता

(1) तीर्थयात्री राजस्थान का मूल निवासी हो। 
(2) उम्र 60 वर्ष से कम न हो। 
(3) भिक्षावृति पर जीवन यापन करने वाला न हो। 
(4) आयकरदाता न हो। 
(5) केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/केन्द्र व राज्य सरकार के उपक्रम/स्थानीय निकाय से सेवानिवृत्त कर्मचारी/अधिकारी नहीं हो।
(6) यात्रा हेतु शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम हो और किसी संक्रामक रोग यथा टी0बी0, कांजिस्टिव कार्डियक, श्वास में अवरोध संबंधी बीमारी, Coronary अपर्याप्तता, Coronary thrombosis मानसिक व्याधि,संक्रामक कुष्ठ आदि से ग्रसित न हो। 
नोटः- देवस्थान विभाग, राजस्थान द्वारा चयनित व्यक्ति ही योजना का लाभ प्राप्त करने का पात्र है।

7

आवेदन की प्रक्रिया

आवेदन की प्रक्रिया आनलाइन होगी, जिसकी तिथि विभागीय विज्ञप्ति अनुसार घोषित की जायेगी। सहायता अनुदान हेतु आवेदन-पत्र वांछित दस्तावेज सहित यात्रा करने के दो माह के अन्दर  जमा कराना होगा।
ऑफलाइन की स्थिति में सहायता अनुदान हेतु आवेदन-पत्र विभागीय वेबसाईट से अपलोड कर सहायक आयुक्त कार्यालय देवस्थान विभाग में जमा कराना होगा।

8

आवेदन के साथ वांछित दस्तावेज

  1. राजस्थान के मूल निवास प्रमाण पत्र की प्रमाणित फोटो प्रति।
  2. जन्म प्रमाण-पत्र
  3. आधार कार्ड/मतदाता पहचान-पत्र/ भामशाह कार्ड की फोटो प्रति।
  4. लद्दाख स्थित सरकारी विभाग/समाज का रजिस्टर्ड ट्रस्ट या गठित कमेटी का सत्यापित प्रमाण-पत्र।

9

चयन व आवंटन की पक्रिया

(1) राजस्थान के ऐसे व्यक्ति जिन्हें देवस्थान विभाग द्वारा चयनित व्यक्ति की सूची में स्थान पाते हुए उनके द्वारा लद्दाख स्थित सिन्धु दर्शन की यात्रा पूर्ण कर ली हो तो उन्हें यात्रा उपरान्त यात्रा पर हुए वास्तविक व्यय का प्रमाण पत्र (टिकट, रसीदें इत्यादि) प्रस्तुत करना होगा और ऐसी यात्रा पर हुए 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति अधिकतम 10,000/- प्रति तीर्थ यात्री तक राज्य शासन द्वारा की जायेगी। 
(2) अनुदान प्राप्त करने हेतु पात्र व्यक्ति अपने दावे निर्धारित प्रपत्र में प्रमाणित अभिलेख सहित आनलाइन/संबंधित सहायक आयुक्त को यात्रा समाप्ति के 60 दिवस की समयावधि में प्रस्तुत करेगा।
(3) निर्धारित तिथि तक प्राप्त प्रार्थना पत्रों एवं दस्तावेजों का सहायक आयुक्त देवस्थान द्वारा परीक्षण कर पात्र यात्रियों के आवेदन पत्र मय सूची आयुक्त, देवस्थान कार्यालय उदयपुर को भिजवाये जायेंगे। 
(4) यदि निर्धारित कोटे से अधिक संख्या में आवेदन प्राप्त होते हैं, तो लाटरी (कम्प्यूटराईज्ड ड्रा आफ लाट्स) द्वारा यात्रियों का चयन किया जायेगा।
(5) लाटरी निकालते समय आवेदक के आवेदन के साथ उसकी पत्नी अथवा पति (यदि उनके द्वारा भी यात्रा कर ली हो) को एक मानते हुए लाटरी निकाली जायेगी एवं लाटरी में चयन होने पर दोनों अनुदान के पात्र होंगे। 

 

वर्षवार कैलाष मानसरोवर योजना तथा सिंधु दर्षन योजना की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति

(राशि लाखों में)

वर्ष

कैलाष मानसरोवर तीर्थ यात्रा योजना

सिंधु दर्षन तीर्थ यात्रा योजना

लाभान्वितों की संख्या

व्यय राषि (आर्थिक सहायता राषि का भुगतान)

लाभान्वितों की संख्या

व्यय राषि (आर्थिक सहायता राषि का भुगतान)

2015-16

100

99.90

-

-

2016-17

93

93.00

-

-

2017-18

76

76.00

3

0.30

2018-19

68

68.00

-

-

2018-19 

100

99.90

-

-

2019-20    

163

163.00

 

 

भाग-7

देवस्थान विभाग द्वारा मेलों एवं कार्यक्रमों का आयोजन

मंदिर संस्कृति पुर्नजीवन :-

देवस्थान विभाग द्वारा प्रबंधित एवं नियंत्रित मंदिरों तथा विभिन्न सार्वजनिक मंदिरों में मंदिर परम्परा अनुसार उत्सव एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया गया है। इसके अतिरिक्त नव संवत्सर, नवरात्र, वसन्तोसव, बेणेश्वर मेला, महाशिवरात्रि, होली, ऋषभदेव जन्मोत्सव, वैशाख पूर्णिमा, पाटोत्सव, जन्माष्टमी आदि पर्वों पर विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित करवाये जाते हैं।

5. धार्मिक मेलों का आयोजन :-

विभाग द्वारा आलौच्य वर्ष में राजकीय मंदिरों में होने वाले उत्सवों, जयंतियों एवं मेलों की परंपरा को निरन्तर बनाये रखने के विशेष प्रयास किये गये हैं। विभाग द्वारा मुख्यतया निम्न राजकीय मंदिरों में प्रतिवर्ष स्थायी रूप से बड़े स्तर पर मेलों का आयोजन किया जाता हैः-

  1. मंदिर श्री गोगाजी, गोगामेड़ी, तहसील नोहर जिला हनुमानगढ़।
  2. मंदिर श्री केलादेवीजी, झीलकावाड़ा, भरतपुर।
  3. मंदिर श्री ऋषभदेवजी, धूलेव, जिला उदयपुर।
  4. मंदिर श्री माताजी मावलियान, आमेर, जिला जयपुर।
  5. मंदिर श्री चारभुजा जी, गढ़बोर, जिला राजसमन्द।
  6. मंदिर श्री मंगलेश्वर महादेव मातृकुडिया, तहसील राषमी जिला चित्तोडगढ़।
  7. मन्दिर श्री भद्रकाली, हनुमानगढ़।
  8. मन्दिर श्री घोटिया अम्बा जी, बांसवाडा।
उपरोक्त मंदिरों के अतिरिक्त विभाग द्वारा प्रबंधित एवं नियंत्रित छोटे-बड़े मंदिरों में एवं सार्वजनिक प्रन्यासों में भी मेले आयोजित होते हैं तथा उनकी व्यवस्था स्थानीय ग्राम पंचायत/नगरपालिका अथवा श्रद्धालु नागरिकों एवं प्रन्यासों द्वारा अपने स्तर पर की जाती है। देवस्थान विभाग द्वारा मंदिरों एवं तीर्थस्थलों पर आयोजित होने वाले प्रमुख उत्सवों, मेलों, एवं पर्वों का तिथिवार एक सूचना कैलेण्डर भी तैयार किया गया है ।

भाग— 8

विभागीय संपदाओं का प्रबंध एवं अनुरक्षण

1. अचल संपदा का प्रबंध :-

देवस्थान विभाग द्वारा प्रबन्धित एवं नियन्त्रित मन्दिरों को प्रबंध एवं नियंत्रण की दृष्टि से निम्नानुसार वर्गीकृत किया गया हैः-

मंदिर एवं संस्थान

संख्या

राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी के मंदिर एवं संस्थान

390

राजकीय आत्मनिर्भर श्रेणी के मंदिर एवं संस्थान

203

राजकीय सुपुर्दगी श्रेणी के मंदिर

343

 

936

उपरोक्त श्रेणियों में से राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी के 390 एवं राजकीय आत्मनिर्भर श्रेणी के 203 कुल 593 मंदिरों एवं संस्थानों का सीधा प्रबन्ध एवं रख-रखाव देवस्थान विभाग द्वारा किया जाता है। सुपुर्दगी श्रेणी के 401 मंदिरों में से राज्य सरकार के आदेश क्रमांक प.5(23)देव/94 जयपुर दिनांक 29.9.08 द्वारा 58 मंदिरों की राजस्थान लोक न्यास अधिनियम 1959 के अन्तर्गत प्रन्यास पंजीयन की कार्यवाही पूर्ण हो जाने से राज्य सरकार की अधिसूचना संख्या प.14(17)देव/82 दिनांक 29.1.97 द्वारा प्रसारित सूची में से विलोपित किया गया है।

2. राज्य के बाहर स्थित मंदिर एवं संपदायें :-

राजस्थान राज्य के बाहर देवस्थान विभाग के प्रबंध एवं नियंत्रणाधीन मंदिर एवं संपदाएं प्रमुख तीर्थ स्थलों पर स्थित हैं। विभागीय मंदिर एवं उनके साथ संलग्न संपदाएं उत्तर प्रदेश राज्य में वृन्दावन, मथुरा, सोरो, गोवर्धन, राधाकुण्ड बरसाना,बनारस आदि स्थानों पर स्थित हैं। उत्तराखंड राज्य में हरिद्वार, भुवाली (नैनीताल) एवं उत्तर काशी, घराली, गंगोत्री में, गुजरात राज्य में द्वारिका एवं महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद एवं अमरावती में तथा नई दिल्ली में स्थित हैं। 

3. किराया प्रकरणों का निस्तारण :-

विभागीय मंदिरों की संपदाओं में आवासीय एवं व्यावसायिक 2052 किरायेदार हैं। इन किरायेदारों के किराया प्रकरणों के निस्तारण हेतु राज्य सरकार द्वारा किराया नीति दिनांक 6.6.2000 बनाई हुई है ।

देवस्थान विभाग के अंतर्गत किराए योग्य परिसंपत्तियाँ 
Rental Properties of Devasthan Department
(2018-19)
(वर्गीकरण - जिला / श्रेणी वार)  

क्र. सं.

जिला

परिसंपत्ति

वार्षिक आय*

कुल

आवासीय

व्यावसायिक

राजकीय

अन्य

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

1

अजमेर

7

7

0

0

0

0

07

07

0

0

0

0

0

0

0

205500

2

अलवर

32

23

09

18

16

2

13

6

7

1

1

0

0

0

0

239400

3

बांसवाड़ा

16

16

0

1

1

0

15

15

0

0

0

0

0

0

0

266460

4

बारां

24

19

05

2

2

0

22

17

5

0

0

0

0

0

0

503004

5

बाड़मेर

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

6

भरतपुर

464

452

12

190

187

3

273

263

10

1

1

0

0

0

0

5526936

7

भीलवाड़ा

37

32

05

0

0

0

37

32

5

0

0

0

0

0

0

140988

8

बीकानेर

164

159

05

22

22

0

140

135

5

2

2

0

0

0

0

1137792

9

बूंदी

60

51

09

9

8

1

47

42

5

1

1

0

3

0

3

860268

10

चित्तौड़गढ़

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

11

चुरु

12

12

0

0

0

0

11

11

0

1

1

0

0

0

0

688800

12

दौसा

16

14

02

0

0

0

16

14

2

0

0

0

0

0

0

33768

13

धौलपुर

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

14

डूंगरपुर

5

5

0

0

0

0

5

5

0

0

0

0

0

0

0

14556

15

हनुमानगढ़

3

2

01

0

0

0

03

02

01

0

0

0

0

0

0

29832

16

जयपुर

344

320

24

95

93

02

234

212

22

15

15

0

0

0

0

11221164

17

जैसलमेर

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

18

जालौर

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

19

झालावाड़

48

40

08

05

02

03

43

38

05

0

0

0

0

0

0

948216

20

झुंझुनू

10

04

06

03

01

02

06

02

04

01

01

0

0

0

0

247140

21

जोधपुर

367

334

33

99

96

03

258

228

30

10

10

0

0

0

0

7019820

22

करौली

34

33

01

26

26

0

07

07

0

01

0

01

0

0

0

103140

23

कोटा

44

32

12

17

13

04

27

19

08

0

0

0

0

0

0

370488

24

नागौर

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

25

पाली

09

09

0

0

0

0

09

09

0

0

0

0

0

0

0

46512

26

प्रतापगढ़

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

27

राजसमंद

69

64

05

05

05

0

63

58

05

01

01

0

0

0

0

528120

28

सवाई माधोपुर

08

08

0

08

08

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

22632

29

सीकर

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

30

सिरोही

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

31

श्रीगंगानगर

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

32

टोंक

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

33

उदयपुर

153

153

0

37

37

0

108

108

0

08

08

0

0

0

0

7046976

 

ऋषभदेव

164

164

0

07

07

0

154

154

0

03

03

0

0

0

0

1818072

 

योग

2090

1953

137

544

524

20

1498

1384

114

45

44

1

3

0

3

39019584

राजस्थान राज्य के बाहर स्थित परिसंपत्ति का विवरण

क्र. सं.

जिला

परिसंपत्ति

वार्षिक आय

कुल

आवासीय

व्यावसायिक

राजकीय

अन्य

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

1

मथुरा

124

122

02

60

60

0

64

62

2

0

0

0

0

0

0

304032

2

उत्तरकाशी

30

30

0

04

04

0

26

26

0

0

0

0

0

0

0

180060

3

हरिद्वार

11

11

0

02

02

0

09

09

0

0

0

0

0

0

0

30432

4

वाराणसी

25

25

0

15

15

0

10

10

0

0

0

0

0

0

0

32136

5

द्वारिका

01

01

0

0

0

0

01

01

0

0

0

0

0

0

0

9972

 

योग

191

189

02

81

81

0

110

108

2

0

0

0

0

0

0

556632



राजस्थान राज्य व राज्य के बाहर परिसंपत्ति का सम्मिलित विवरण

राज्य

कुल

आवासीय

व्यावसायिक

राजकीय

अन्य

वार्षिक आय

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

कुल

आवंटित

रिक्त

योग

राजस्थान राज्य

2090

1953

137

544

524

20

1498

1384

114

45

44

1

3

0

3

39019584

राज्य के बाहर

191

189

02

81

81

0

110

108

2

0

0

0

0

0

0

556632

महायोग

2281

2142

139

625

605

20

1608

1492

116

45

44

1

3

0

3

39576216

देवस्थान विभाग में खनन लीज की सूचना 
(वर्ष 2018-19)

क्र.सं.

नाम जिला

नाम मंदिर

लीज हेतु कुल NOC धारक/ 
Non NOC धारक

वार्षिक आय

1

झालावाड

मंदिर श्री द्वारिकाधीशजी, झालरापाटन

6

44026

2

उदयपुर

मंदिर श्री ठाकुर जी श्याम सुन्दर जी, उदयपुर

24

1813348

3

उदयपुर

मंदिर श्री ऋषभदेवजी (रा.आ. निर्भर)

24

2536939

 

 

योग

54

4394313

4. बहुमूल्य आभूषणों का भौतिक सत्यापन एवं मूल्यांकन :-

देवस्थान विभाग द्वारा प्रबन्धित एवं नियंत्रित विभागीय मंदिरों के बहुमूल्य आभूषणों की कुल संख्या 20,825 हैं। इन आभूषणों में से दस लाख रुपये से अधिक की चल संपदा वाले 52 मंदिरों के 17077 आभूषणों का भौतिक सत्यापन राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष अंकेक्षण दलों के माध्यम से करवाया जा चुका है। दस लाख रुपये से कम मूल्य की चल संपदा वाले मंदिरों के आभूषणों का भौतिक सत्यापन एवं मूल्यांकन सहायक आयुक्त स्तर पर गठित समिति द्वारा किया जाता है ।

भाग— 9

मंदिरों  व धर्मस्थलों के लिए सहायता अनुदान तथा शाश्वत वार्षिकी का भुगतान

देवस्थान विभाग द्वारा अपने प्रबंधन व नियंत्रण से भिन्न मंदिरों  व धर्मस्थलों के लिए भी सहायता अनुदान तथा शाश्वत वार्षिकी का भुगतान किया जाता है, जिसके मुख्यतः दो रूप हैं-

1. मंदिरों व संस्थानों को सहायता अनुदान :-

राजस्थान राज्य के पूर्व देशी रियासतों के शासकों द्वारा मंदिरों की सेवा पूजा, धूप-दीप, नैवेद्य आदि के लिए अनुदान स्वीकृत किया जाता था। विलीनीकरण के पश्चात् इस उत्तरदायित्व का निर्वहन देवस्थान विभाग द्वारा किया जा रहा है। इस हेतु वर्ष 2018-19 के लिए विभागीय बजट में 15.00 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया था।  अलग-अलग मंदिरों/संस्थाओं की सहायता अनुदान राशि अलग- अलग है. इस सूची में विभिन्न  धर्मों व राज्यों के धर्मस्थल भी विद्यमान हैं.

वर्ष 2011-12 की बजट घोषणा संख्या 191 के तहत की गई घोषणा की पालना के क्रम में राज्य सरकार के आदेश क्रमांक- प-3 (3) देव/2012 दिनांक 18.05.12 द्वारा निम्नानुसार आदेश प्रसारित किए गए थे-
बजट घोषणा संख्या 191.0.0 के अनुसार अनुदान सहायता प्राप्त मंदिरों को दी जानेवाली वार्षिक अनुदान राशि में दुगनी वृद्धि किए जाने के संबंध में वित्त विभाग में लेखा शीर्ष 2250- 00-102-(01)12(NP) में राशि रुपये 120.43 लाख (एक सौ बीस लाख तैयालीस हजार) का अतिरिक्त प्रावधान कर दिया है। अत: इसकी वित्तीय स्वीकृति एतद्वारा जारी की जाती है। विभागाध्यक्ष का यह दायित्व होगा कि वह इस राशि का प्रावधान अनुमान/ अनुपूरक मांग में सम्मिलित कर यथासमय प्रस्ताव वित्त विभाग को भिजवाया जाना सुनिश्चित करे.

यह स्वीकृति वित्त (व्यय-2) विभाग के अंतर्विभागीय सहमति क्रमांक 1012015 दिनांक 10.05.2012 के अंतर्गत जारी की गई।

2. शाश्वत वार्षिकी (Annuity) का भुगतानः-

राजस्थान भूमि सुधार एवं जागीर पुनर्ग्रहण अधिनियम, 1952 के अन्तर्गत 48,466 मंदिरों, मठों एवं धर्मस्थलों की जागीरों के पुनर्ग्रहण के फलस्वरूप जागीर विभाग द्वारा मंदिरों, धार्मिक स्थलों के पुजारियों/प्रबंधकों/महन्तों आदि के क्लेम का निस्तारण कर वार्षिकी (Annuity) का निर्धारण प्रपत्र 12 (क) में किया जाता है। जागीर विभाग द्वारा निर्धारित वार्षिकी (Annuity) के भुगतान हेतु देवस्थान विभाग के बजट में राशि का प्रावधान स्वीकृत होता है। जागीर विभाग द्वारा स्वीकृत वार्षिकी (Annuity) के भुगतान हेतु देवस्थान विभाग द्वारा प्रपत्र 12 (ख) जारी किया जाता है। संबंधित जिला कलक्टर/उप खण्ड अधिकारी/तहसीलदार के माध्यम से राशि का भुगतान किया जाता है। इस सूची में विभिन्न  धर्मों के धर्मस्थल भी विद्यमान हैं.

वर्ष 2011-12 की बजट घोषणा संख्या-214 के तहत की गई घोषणा की पालना के क्रम में राज्य सरकार के आदेश क्रमांक- एफ-7(43) देव/2004/पार्ट दिनांक 12.12.2012 द्वारा निम्नानुसार आदेश प्रसारित किए गए थे-

राजस्थान भूमि सुधार एवं जागीर पुनर्ग्रहण अधिनियम, 1952 के तहत शाश्वत वार्षिकी राशि प्राप्त ऐसे मंदिर एवं पूजा स्थल, जिन्हें वर्तमान में नकद सहायता अनुदान नियम, 1958 के तहत अनुदान राशि स्वीकृत नहीं है, को भी वित्तीय वर्ष 2012-13 से नकद सहायता अनुदान नियम, 1958 के नियम 7 (ए) के तहत आवर्ती प्रकृति की सहायता अनुदान राशि रुपये 1200/- वार्षिक प्रत्येक मंदिर एवं पूजा स्थल को दिए जाने की प्रशासनिक स्वीकृति एतद्द्वारा प्रदान की जाती है। तदनुरूप ऐसे मंदिरों को भी न्यूनतम राशि 1200 रुपए प्रति वर्ष  सहायता अनुदान राशि दिए जाने का प्रावधान किया जा चुका है.

सहायता अनुदान प्राप्त मंदिरों एवं शाश्वत वार्षिकी राशि प्राप्तमंदिरों के लियेस्वीकृत राशिएवंवितरित राशिका विवरण निम्नानुसार है- (राशि लाख रुपए)

वित्तीय वर्ष

सहायताअनुदान प्राप्तमंदिर

शाश्वत वार्षिकी राशि प्राप्त मंदिर

स्वीकृत राशि

वितरित राशि

स्वीकृत राशि

वितरित राशि

2015-16

38.00

14.12

50.00

7.67 

2016-17

18.00

13.13

30.00

2.58 

2017-18

15.00

13.78

15.00

7.38 

2018-19 ( 31.12.2018 तक)

15.00

2.37

15.00

2.56

भाग- 10

सार्वजनिक प्रन्यासों का पंजीयन, पर्यवेक्षण एवं नियमन

राजस्थान राज्य में सार्वजनिक मंदिरों, मठों एवं अन्य धार्मिक व पुण्यार्थ संस्थानों का पंजीयन करने एवं उनके प्रशासन हेतु राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास अधिनियम, 1959 के प्रावधान दिनांक 1-7-1962 से लागू किये गये हैं। इस अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्रन्यासों के सर्वेक्षण, पंजीकरण, संपत्ति विनियोजन, लेखा नियंत्रण, अंकेक्षण तथा प्रन्यासों के संबंध में प्राप्त होने वाली शिकायतों की जांच के दायित्व का निर्वहन देवस्थान विभाग द्वारा किया जाता है। अधिनियम के प्रावधानों के तहत विभाग के सहायक आयुक्तों को पंजीकरण एवं जाँच तथा लेखा नियंत्रण की शक्तियाँ प्रदत्त हैं। आयुक्त, देवस्थान विभाग, अधिनियम की धारा 37 के अनुसार राजस्थान राज्य में स्थित समस्त पुण्यार्थ न्यासों के कोषाध्यक्ष हैं तथा उन्हें अधिनियम की धारा 7 के तहत राजस्थान राज्य में स्थित समस्त धार्मिक एवं पुण्यार्थ लोक न्यासों के अधीक्षण की शक्तियाँ प्रदत्त है। उक्त अधिनियम के प्रावधानों को क्रियान्वित करने तथा सार्वजनिक प्रन्यासों के प्रशासन पर अधीक्षण करने का दायित्व आयुक्त देवस्थान को सौंपा गया है। राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास अधिनियम, 1959 के प्रावधानों के तहत दिनांक 31.12.2018 तक 9066 प्रन्यासों का पंजीयन सहायक आयुक्तों द्वारा किया जा चुका है। पंजीकृत प्रन्यासों की जिले एवं खण्डवार स्थिति निम्नानुसार है :-

पंजीकृत प्रन्यासों की खण्डवार स्थिति

क्र.सं.

संभाग

जिला

31.12.2017 तक कुल पंजीकृत प्रन्यास

दिनांक 1.1.2018 से 31.12.2018 तक नये पंजीकृत

31.12.2018 तक कुल पंजीकृत प्रन्यास

1

जयपुर (प्र0)

जयपुर

1822

50

1872

 

 

दौसा

116

02

118

 

 

योग

1938

52

1990

2

जयपुर (द्वि0)

झुन्झुनूं

173

1

174

 

 

सीकर

232

8

240

 

 

अलवर

331

13

344

 

 

योग

736

22

758

3

भरतपुर

भरतपुर

367

2

369

 

 

सवाई माधोपुर

129

0

129

 

 

धौलपुर

59

1

60

 

 

करौली

119

3

122

 

 

योग

674

6

680

4

जोधपुर

जोधपुर

708

53

761

 

 

पाली

392

5

397

 

 

बाड़मेर

69

2

71

 

 

जालौर

146

1

147

 

 

सिरोही

252

2

254

 

 

जैसलमेर

82

1

83

 

 

योग

1649

64

1713

5

बीकानेर

बीकानेर

388

10

398

 

 

चुरू

198

0

198

 

 

योग

586

10

596

6

हनुमानगढ़

श्रीगंगानगर

217

21

238

 

 

हनुमानगढ़

186

11

197

 

 

योग

403

32

435

7

उदयपुर

उदयपुर

787

38

825

 

 

चित्तौड़गढ़

128

9

137

 

 

प्रतापगढ़

47

1

48

 

 

राजसमन्द

76

2

78

 

 

योग

1038

50

1088

8

कोटा

कोटा

414

12

426

 

 

बून्दी

149

2

151

 

 

झालावाड़

97

3

100

 

 

बारां

85

2

87

 

 

योग

745

19

764

9

अजमेर

अजमेर

384

7

391

 

 

नागौर

210

5

215

 

 

टोंक

87

4

91

 

 

भीलवाड़ा

157

4

161

 

 

योग

838

20

858

10

ऋषभदेव

ऋषभदेव

24

1

25

 

 

डूंगरपुर

69

1

70

 

 

बांसवाड़ा

89

0

89

 

 

योग

182

2

184

 

 

महायोग

8789

277

9066

7. यात्रियों के लिये विश्राम स्थलों की व्यवस्था :-

राजस्थान राज्य एवं राज्य के बाहर देवस्थान विभाग द्वारा प्रबंधित एवं नियंत्रित मंदिरों एवं संस्थानों में संचालित निम्नांकित धर्मशालाओं, विश्रान्ति गृहों में यात्रियों के लिये ठहरने की सुविधा उपलब्ध हैः-

क्र.सं.

नाम संस्था

क्षमता
कमरों की संख्या

1

होटल देव दर्शन (देवस्थान विश्रान्ति गृह), उदयपुर

62

2

सराय फतह मेमोरियल, उदयपुर

31

3

मांजी की सराय, पुराना स्टेशन रोड, उदयपुर

20

4

धर्मशाला ऋषभदेव, धुलेव तहसील ऋषभदेव, जिला उदयपुर

154

5

धर्मशाला मंदिर श्री चारभुजा जी, गढ़बोर, जिला राजसमन्द

70

6

जसवन्त सराय, स्टेशन रोड़, जोधपुर

63

7

विश्राम गृह मंदिर श्री राधा माधव जी,(जयपुर मंदिर) वृन्दावन (उ0प्र0)

2

8

विश्राम गृह मंदिर श्री कुशल बिहारी जी, बरसाना, जिला मथुरा (उ0 प्र0)

10

9

धर्मशाला मंदिर श्री गंगाजी, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)

3

10

धर्मशाला मंदिर श्री एकादश रुद्र जी, उत्तरकाशी (उत्तराखण्ड)

3

11

धर्मशाला, जोधपुर (नवनिर्मित)

23

12

धर्मशाला, बीकानेर (नवनिर्मित)

23

13

धर्मशाला, गोगामेड़ी (नवनिर्मित)

20

14

धर्मशाला, जयपुर (नवनिर्मित)

23

15

धर्मशाला, धराली, उत्तराखण्ड (नवनिर्मित)

4 कमरे मय किचन बरामदा

16

धर्मशाला, द्वारका, गुजरात (नवनिर्मित)

4

17

धर्मषाला रूपनारायण जी, सेवंत्री (नवनिर्मित)

14

सम्‍पर्क सूत्र

शासन सचिवालय

क्र0सं0

मंत्री महोदय/नाम अधिकारी

दूरभाष नं0 कार्यालय

 ई- मेल आई.डी.

1

श्री विश्‍वेन्‍द्र सिंह जी , केबीनेट मंत्री

0141-2227852 
0141-5153222 
 EX -21262,21263

2

श्री गोविन्‍द सिंह डोटासरा जी, राज्‍यमंत्री

0141-2227538
0141-5153222
EX -21271,21272

3

श्री आलोक गुप्‍ता  IAS
शासन सचिव

0141-2227587 
0141-5153222 
EX -21431

secretary.devasthan@rajasthan.gov.in


आयुक्त कार्यालय

क्र0सं0

नाम अधिकारी

दूरभाष नं0 कार्यालय

 ई- मेल आई.डी.

1.

 श्री कृष्‍ण  कुणाल, IAS 
 आयुक्त देवस्थान, 
पंचवटी एम. जी. कॉलेज रोड 
उदयपुर - 313001राजस्थान

91 - 294 - 2426130, 2524813
फैक्स नं91 - 294 - 2423440 

hq.dev@rajasthan.gov.in

devasthan@hotmail.com 
devasthanrajasthan@gmail.com

सहायक आयुक्त कार्यालय

क्र.सं.

सहायक आयुक्त का मुख्यालय

कार्य-क्षेत्र (जिले एवं राज्य)

कार्यालय के दूरभाष नंबर

ई.मेल आई डी संख्या

1

सहायक आयुक्त, (मुख्यालय) उदयपुर

उदयपुर (मुख्यालय)

0294.2524813

devasthan@hotmail.com 
AC.UDAIPUR.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

2

सहायक आयुक्त (प्रथम), जयपुर

जयपुर एवं दौसा जिले

0141.2614404

acdevasthan_jpr@yahoo.co.in
AC.JAIPUR1.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

3

सहायक आयुक्त (द्वितीय)  जयपुर

सीकर, झुन्झुनूं एवं अलवर जिले ।

0141.2611341

aciidevasthanjaipur@rocketmail.com
AC.JAIPUR2.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

4

सहायक आयुक्त, भरतपुर

भरतपुर, धौलपुर, सवाई माधोपुर एवं करोली जिले ।

05644.228405

devbhp405@gmail.com
AC.BHARATPUR.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

5

सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, जोधपुर

जोधपुर,पाली,बाड़मेर, जालौर, सिरोही एवं जैसलमेर जिले ।

0291.2650361

devasthanjodhpur@yahoo.co.in
devasthanjodhpur@gmail.com 
AC.JODHPUR.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

6

सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, बीकानेर

बीकानेर एवं चूरू जिले।

0151.2226711

devsthan_bkn09@yahoo.in
AC.BIKANER.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

7

सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, हनुमानगढ़

श्री गंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिले

01552.230110

devsthanhmo@gmail.com 
AC.HANUMANGARH.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

8

सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, उदयपुर

उदयपुर, (तहसील खैरवाड़ा व ऋषभदेव को छोडकर) चितौड़गढ़ प्रतापगढ़ एवं राजसमंद जिले।

0294.2420546

acdev_udaipur@ymail.com
AC.UDAIPUR.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

9

सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, कोटा

कोटा, बूंदी, झालावाड एवं बारां जिले ।

0744.2326031

1ac.kota@gmail.com
AC.KOTA.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

10

सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, ऋषभदेव, जिला उदयपुर

उदयपुर जिले की खैरवाडा व ऋषभदेव तहसीलें तथा डूंगरपुर और बांसवाडा जिले एवं गुजरात तथा महाराष्ट्र राज्यो में स्थित विभागीय मंदिर व संपदायें।

02907. 230023

devasthanrishabhdeo@yahoo.com
AC.RISHBDEV.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

11

सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, अजमेर

अजमेर, नागौर, टोंक, भीलवाड़ा

0145.2625423

ajmdevasthan@yahoo.co.in
AC.AJMER.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

12

सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, वृन्दावन

उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड एवं दिल्ली राज्यों में स्थित विभागीय मंदिर और संपदायें।

0565.2455146

radha_madhav08@yahoo.com
AC.VRINDAVAN.DEV@RAJASTHAN.GOV.IN

 

Nodal Officer:- Sh. Sunil Mattad, Dy. Commissioner
Devasthan Department, Udaipur
Telephone No.: 0294-2524813 (Office), Mobile No.: - 8696917101

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