Devasthan Department, Rajasthan
 

 

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राजस्थान लोक न्यास नियम, 1962 

(The Rajasthan Public Trust (RPT) Rules 1962)

(अधिसूचना सं. एफ 3(एफ) (11) रे.वे./ए./59 दिनांक 7.6.1962, जो राजस्थान राजपत्र असाधारण, भाग-4 ग में दिनांक 11.6.1962 को प्रकाशित की गयी )

राजस्थान लोक न्यास अधिनियम, 1959 (959 का अधिनियम संख्याक 42) की धारा 76 की उप-धारा (2) के साथ पठित उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार इसके द्वारा निम्नलिखित नियम बनाती है, जिनका पूर्व प्रकाशन को चुका है :-

भाग-1

प्रारभिक

1. सक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ :- (1) इन नियमों का नाम राजस्थान लोक न्यास नियम, 1962 है।

(2) उस तारीख को तथा से जिसको तथा जिससे ,और जिस सीमा तक अधिनियम का कोई अध्याय लागू हो, इन नियमों में से ऐसे नियम जहां तक उपरोक्त अध्याय से संबंधित हों, लागू हो जायेंगें

2. परिभाषायें :- इन नियमां मे, जब तक विषय या संदर्भ द्वारा अन्यथा अपेक्षित न हो :-

(क) ‘‘ अधिनियम’’ से तात्पर्य  राजस्थान लोक न्यास अधिनियम, 1959 (राजस्थान अधिनियम संख्या 42 सन् 1959) से है ;
(ख) ‘‘बजट’’ से तात्पर्य किसी लोक न्यास की प्राप्तियों तथा व्ययों के अनुमान के विवरण से है ;
(ग) ‘‘तुलन पत्र’’ से तात्पर्य किसी लोक न्यास के बजट तुलन-पत्र (बैलेन्स शीट ) से है ;
(घ) ‘‘ प्रबंध समिति’’ से तात्पर्य अधिनियम के अध्याय 10 के अन्तर्गत नियुक्त समिति से है ;
(ङ)  से‘‘प्रपत्र’’  तात्पर्य इन नियमों के साथ लगे प्रपत्र से है ;
(च) ‘‘फीस’’ से तात्पर्य इन नियमों के अन्तर्गत लगाई गई फीस से है ;
(छ) ‘‘क्षेत्र’’ से तात्पर्य उस क्षेत्र की स्थानीय सीमाओं से है जिसमें सहायक आयुक्त अधिकारिता रखता है ;
(ज) ‘‘सचिव’’ से ताप्तर्य राजस्थान लोक न्यास बोर्ड या क्षेत्रीय सलाहकार समिति के सरकार द्वारा नियुक्ति सचित से है ;
(झ) ‘‘धारा’’ से तात्पर्य अधिनियम की धारा से है ;
(´) ‘‘वर्ष’’ से तात्पर्य दिनांक 1 अप्रेल को प्रारंभ और आगामी दिनांक 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष से है।

भाग-2

धारा 10 के प्रावधानों को कार्यान्वित करने के लिए नियम 

3.सेवा शर्तो का नियमन :- ऐसे समस्त अधिकारियों, निरीक्षको, अन्य अधीनस्थ अधिकारियों एवं सेवकों की सेवा शर्ते, जो अधिनियम के अधीन नियुक्त किये जायें उस समय प्रवृत्त राजस्थान सेवा नियमों द्वारा नियमित एवं नियंत्रित होगी।

भाग-3

नीचे लिखी धाराओं के प्रावधानों को कार्यान्वित करने के लिये नियमः-

धारा-11 (1) तथा (5)
धारा-12 (1)  (घ)
धारा-13 (1) तथा (5)
धारा-14 (2)
धारा-15 (1)

4. सलाहकार बोर्ड का गठन: - राजस्थान लोक न्यास बोर्ड में नीचे लिखे अनुसार प्रत्येक वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले कुल 21 सदस्य होंगे :-

वर्ग

 

सदस्य संख्या

(1) हिन्दू

 

19

(क)  जैन

4

 

(ख)  सिख

1

 

   (ग) अन्य हिन्दू

14

 

(2) ईसाई

 

1

(3) पारसी

 

1

 

 

21

(2) बोर्ड की बैठकों में उपस्थित होने के लिये की गई यात्रा के अलावा सभापति या सदस्य द्वारा, राज्य सरकार या ऐसे अन्य अधिकारी, जिसे इस निमित्त सरकार द्वारा प्राधिकृत किया जाये, की बिना अनुमति कोई यात्रा नहीं की जायेगी।

(3) विलोपित।,,

7. सलाहकार समिति का गठन :-क्षेत्रीय सलाहकार समिति में नीचे बताये गये अनुसार प्रदेश के प्रत्येक वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले कुल 21 सदस्य होगे :-

वर्ग

 

सदस्य संख्या

(1) हिन्दू

 

19

(क)  जैन

4

 

(ख)  सिख

1

 

   (ग) अन्य हिन्दू

14

 

(2) ईसाई

 

1

(3) पारसी

 

1

 

 

21

8. क्षेत्रीय सलाहकार समिति के सभापति तथा सदस्यों के लिये यात्रा भत्ता तथा अन्य भत्ते :-1* प्रादेशिक सलाहकार समिति का कोई सदस्य या सभापति जो बैठक में उपस्थित होता है अथवा समिति के काम के संबंध में सरकारी कर्त्तव्य का पालन करने हेतु कोई यात्रा करता है तो समिति के सभापति तथा सदस्यों को राजस्थान भत्ता नियम, 1971 के अनुसार यात्रा भत्ता देय होगा तथा उनका वर्गीकरण निम्नानुसार किया जायेगा-

 

मील भत्ता

विराम भत्ता

 

राजस्थान यात्रा भत्ता नियम के नियम 4(1) अनुसार वर्गीकृत

राजस्थान यात्रा भत्ता नियम के नियम 4(1) अनुसार वर्गीकृत

1. अध्यक्ष, प्रादेशिक सलाकार समिति  

क श्रेणी

प्रवर्ग III 

2. सदस्यगण, प्रादेशिक सलाकार समिति

ख श्रेणी

प्रवर्ग III

9. क्षेत्रीय सलाहकार समिति के अतिरिक्त कार्य :- नियम 6 के उप-नियम (2) के अधीन रहते हुए,क्षेत्रीय सलाहकार समिति का सभापति और ऐसे सदस्य,जो उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हों, जिससे संबंधित लोक न्यास हो, मौक पर जांच या निरीक्षण करने के लिये उक्त न्यास से संबंधित किसी स्थान को जा सकेंगें ।

10. बोर्ड के कार्य संचालन का तरीका-बैठकें व प्रक्रिया :-(1) बोर्ड अपनी बैठकों का आयोजन सामान्यतया ऐसे मध्यान्तरों पर जैसा सभापति निदेश दे अथवा बोर्ड के कुल सदस्यों में से 2/3 सदस्यों की लिखित प्रार्थना पर, आयुक्त के मुख्यावास पर करेगा,

परन्तु उचित मध्यान्तरों पर वर्ष में कम से कम दो बैठकें अवश्य होंगी।

(2) बोर्ड की प्रत्येक बैठक की तारीख, समय तथा स्थान सभापति द्वारा नियत किये जायेंगे और उनकी सूचना सदस्यों को बोर्ड के सचिव द्वारा, उक्त रूपेण नियत की गई तारीख से कम से कम तीन सप्ताह पहले भेजी जायेगी।

(3) सचिव प्रत्येक बैठक की कार्यसूची सभापति के आदशों के अनुसार तैयार करेगा और उसे सदस्यों के पास बैठक प्रारभ होने से पहले भेज देगा।

(4) सभापति स्वविवेक से अधिनियम तथा इसके अन्तर्गत बनाये गये नियमों से संगत ऐसे किसी प्रश्न या मद पर जिसे वह उचित समझे, किसी बैठक में, बिना पूर्व सूचना के विचार-विमर्श किये जाने की अनुमति दे सकेगा।

(5) कार्य सूची में विचार-विमर्श के लिये सम्मिलित विषयों से संबंधित सम्पूर्ण रेकार्ड तथा अन्य आवश्यक सूचना आयुक्त द्वारा, बैठक प्रांरभ होने के पहले, बांट दी जायेगी।

(6) (क) उन मामलों में जो कि धारा 12 की उप-धारा (2) के अन्तर्गत सहायक आयुक्त द्वारा बोर्ड को निदेशित किये गये हो, बोर्ड अपना निर्णय सीधे सहायक आयुक्त को प्रेषित करेगा।
ख) अन्य मामलों मे, बोर्ड अपने विचार राज्य सरकार को प्रेषित कर सकेगा जिनके बारे में राज्य सरकार ऐसी कार्रवाई कर सकेगी, जो वह उचित समझे।

(7) सामान्यतः बोर्ड की बैठकों की अध्यक्षता, सभापति करेगा, किन्तु जब वह उपस्थित होने में असमर्थ हो तो बैठक में उपस्थित सदस्य, अपने में से एक सदस्य को बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए चुनेगें।

(8) सभापति बोर्ड की ओर से सब पत्रों, ज्ञापनों तथा कागजों पर दस्तखत करेगा तथा दैनिक सामान्य काम निपटायेगा और ऐसे कागजों पर जो वह उचित समझे, सचिव को दस्तखत करने के लिये लिखित में साधारण या विशेष आज्ञा द्वारा प्राधिकृत करेगा।

(9) बोर्ड की बैठक के लिये, बोर्ड के कुल सदस्यों के 1/3 (एक तिहाई) सदस्यों का कोरम होगा। यदि कोरम पूरा न हो तो बैठक आगे की तारीख के लिये स्थगित कर दी जायेगी।

(10) यदि विवादग्रस्त मामला ऐसे न्यास से संबंधित हो जिससे कोई सदस्य व्यक्तिगत रूप से किसी न किसी प्रकार संबंधित हो तो वह सदस्य विचार-विमर्श में भाग नही लेगा, न अपना वोट देगा अथवा न अपने विचार प्रकट करेगा।

(11) बोर्ड का प्रत्येक निर्णय, मौजूद सदस्यों के बहुमत द्वारा किया जायेगा और बराबर मतों की दशा में चेयरमैन को दूसरा मत देने का अधिकार होगा।

11.  क्षेत्रीय सलाहकार समितियों में कार्य संचालन का तरीका- बैठकें और प्रक्रिया :-

(1) क्षेत्रीय सलाहकार समिति का सचिव, सभापति के आदेश के अनुसार जब कभी आवश्यक समझा जाये, समिति की बैठक, क्षेत्र के सहायक आयुक्त के मुख्यावास पर बुलायेगाः
बशर्ते कि उक्त मध्यान्तरों पर वर्ष में कम से कम दो बैठकें अवश्य हांगी।

(2) समिति का सभापति, ऐसी बैठक की अध्यक्षता करेगा। ऐसी दशा में जबकि सभापति अनुपस्थित हो तो उपस्थित सदस्य अपने में से एक सदस्य को अध्यक्षता करने के लिये चुन सकेंगे।

(3) समिति, यथोचित विचार-विमर्श करने के बाद में अपनी सलाह सहायक आयुक्त को लिखित में भेजा करेगी और उसके साथ असहमति का नोट यदि कोई हो, भी भेजा जायेगा।

(4) सचिव, सदस्यों तथा सभापति को बैठक की सूचना समय के काफी पहले देगा और उक्त बैठक की कार्यसूची, तारीख, समय तथा स्थान संबंधी सूचना भी, सभापति की स्वीकृति से प्रेषित करेगा।

(5) समिति की सलाह के लिये निदेशित मामले से संबंधित सब संगत रेकार्ड तथा सूचना बैठक प्रारंभ होनेसे पहले सहायक आयुक्त द्वारा, समिति की मेज पर रखी जायेगी।

(6) समिति की बैठक के लिये, समिति के कुल सदस्यों के एक-तिहाई सदस्यों का कोरम (गणपूर्ति) होगा। यदि कोरम पूरा न हो तो बैठक किसी अन्य तारीख के लिये स्थगित कर दी जायेगी। बैठक में समस्त निर्णय बैठक में उपस्थित सदस्यों के बहुमत से किये जायेंगे और मतों की समानता की दशा में, सभापति को दूसरा मत देने का अधिकारी होगा।

(7) सभापति समिति की ओर से समस्त पत्रों ज्ञापनों तथा अन्य कागजातों पर दस्तखत करेगा और दैनिक सामान्य कार्य, यदि कोर्ठ हो, निपटायेगा और सचिव को, ऐसे कागजातों पर जो सभापति ठीक समझे, हस्ताक्षर करने तथा उन्हे निपटाने के लिये प्राधिकृत कर सकेगा।

12. बोर्ड तथा क्षेत्रीय सलाहकार समितियों के सदस्यों की अयोग्यतायें :-एक व्यक्ति बोर्ड या समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त करने के लिये या सदस्य होने के लिये अयोग्य होगा, यदि वह -

(क) इक्कीस वर्ष से कम उम्र का है, अथवा
(ख) किसी आपराधिक न्यायालय द्वारा ऐसे अपराध का दोषी ठहराया गया है जिसमें नैतिक पतन शामिल हो, अथवा
(ग) विकृत मस्तिष्क का है और किसी सक्षम न्यायालय द्वारा वैसा घोषित कर दिया जाये, या
(घ) अननुमोचित दिवालिया है, अथवा
(ङ) दुराचरण का दोषी पाया गया है, अथवा
(च) जिस धर्म या धार्मिक विश्वास का वह समिति में प्रतिनिधित्व करता है, उससे विरत हो गया है, अथवा
(छ) निरक्षर है, अथवा
(ज) अन्यथा अयोग्य है।

13. बोर्ड या समिति के सभापति एवं सदस्यों को हटाया जाना :- यदि राज्य सरकार को ऐसा प्रतीत हो कि बोर्ड अथवा समिति का सभापति अथवा कोई सदस्य, नियम 12 में वर्णित किसी अयोग्यता का शिकार हो गया है अथवा उसने अधिनियम अथवा उसके अधीन के नियमों के किन्हीं प्रावधानों का उल्लंघन किया है अथवा काम करने से मना करता है या काम करने के अयोग्य है अथवा बोर्ड अथवा समिति, जो भी हो, की लगातार तीन बैठकों में बिना पर्याप्त कारण उपस्थित नहीं हुआ है, तो राज्य सरकार उक्त सभापति अथवा सदस्य हो, कारण बताने का अवसर देने के पश्चात् और इस प्रकार बताये गये किसी कारण पर विचार करने के पश्चात् उसे उसके पद से हटा सकेगी और राज्य सरकार का इस ओर निर्णय अंतिम होगा।

14. बोर्ड या समिति के सभापति तथा सदस्यों द्वारा त्यागपत्र- बोर्ड अथवा समिति का सभापति या कोई सदस्य, अपने हाथ से लिखकर और राज्य सरकार को संबोधित करके अपने पद से त्यागपत्र दे सकेगा :
परन्तु ऐसा सभापति अथवा सदस्य तब तक अपना पद धारण करता रहेगा, जब तक कि उसके उत्तराधिकारी की नियुक्ति सरकारी राजपत्र में अधिसूचित न की जाये।

15. बोर्ड और क्षेत्रीय सलाहकार समिति के लिये कर्मचारी वर्गः- बोर्ड के लिये-

(1) (क) बोर्ड के लिये एक सचिव की व्यवस्था की जायेगी, जो कि राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जायेगा।

(ख) आयुक्त अपने विभाग में से ऐसे अन्य कर्मचारी, जिन्हे बोर्ड, अधिनियम के अन्तर्गत अपने कार्यो के कुशल सम्पादन के लिये आवश्यक समझे, बोर्ड के अधिकार में रखेगा।

(ग) उक्त कर्मचारियों पर, यात्रा भत्ते और दैनिक भत्ते पर होने वाला व्यय और बोर्ड का अन्य आवर्तक तथा अनावर्तक व्यय आयुक्त के कार्यालय के बजट शीर्षक ‘‘बोर्ड व्यय’’ में से किया जायेगा।

क्षेत्रीय सलाहकार समिति के लिये-

(2) राज्य सरकार द्वारा क्षेत्रीय सलाहकार समिति के लिये एक सचिव की और ऐसी अन्य अधीनस्थ कर्मचारी वर्ग तथा चतुर्थ श्रेणी के सेवकों की व्यवस्था की जायेगी, जो राज्य सरकार  द्वारा क्षेत्रीय सलाहकार समिति के लिये आज्ञा द्वारा नियत किये जायें और उनके लिये उसी प्रयोजन हेतु पृथक बजट की व्यवस्था की जायेगी।

भाग-4

नीचे लिखी धाराओं के प्रावधानों को कार्यान्वित करने के लिये नियमः-

धारा-17 (3) तथा (4)
धारा-16 (2) 
धारा-18 (1) तथा (2)
धारा-23 (1) तथा (2)
धारा-24
धारा-25 (2)

16. सहायक आयुक्तों द्वारा रजिस्टर तथा पुस्तकों का रखा जाना :- लोक न्यासों के रजिस्ट्रेशन के संबंध में सहायक आयुक्त निम्नलिखित रजिस्टर तथा पुस्तकें रखेंगे, जो कि प्रत्येक के सामने लिखे प्रपत्रों में होगी :-

1

रजिस्टर लोक न्यास

प्रपत्र 1

2

रजिस्टर आयुक्त से प्राप्त विनिश्चय

प्रपत्र 2

3

रजिस्टर न्यायालय निर्णय, जो सहायक आयुक्त को भेजे गये

प्रपत्र 3

4

परिवर्तनों का रजिस्टर

प्रपत्र 4

5

रजिस्टर बाबत अचल सम्पत्ति, जो अन्य प्रदेश में पंजीकृत

प्रपत्र 5

 

लोक न्यास के प्रदेश में स्थित है।

 

17. रजिस्ट्रीकरण के लिये आवेदन :- (1) किसी लोक न्यास के रजिस्ट्रीकरण हेतु ओवदन में ऐसी तफसीलों के अलावा जो धारा 17 की उप-धारा (4) के खण्ड (1) से(9) में उल्लेखित है,निम्नलिखित विवरण समाविष्ट होंगे-

(i) आय के अन्य साधन,
(ii) न्यास सम्पत्ति पर भारों, यदि कोई हों, की तफसील,
(iii) न्यास सम्पत्ति तथा न्यास संलेख (यदि ऐसा संलेख निष्पादित किया गया हो तथा मौजूद हो) से संबंधित स्वत्व की तफसील और ऐसे न्यासियों के नाम, जिनके अधिपत्य में वे हों,
(iv) न्यास संबंधी योजना, यदि कोई हो, की तफसील।

(2) आवेदन पत्र प्रपत्र 6 में होगा।

18. रजिस्ट्रीकरण के लिये शुल्क :- आवेदन के साथ दिया जाने वाला शुल्क नकद होगा और उसकी राशि निम्नलिखित होगी :-

1

जब किसी लोक न्यास की सम्पत्ति का मूल्य

 

 

1000/- रू से अधिक न हो

1/- रूपया

2

जब किसी लोक न्यास की सम्पत्ति का मूल्य

 

 

1000/- रू से अधिक किन्तु 3000/- रू. से अधिक न हो

2/- रूपया

 

जब किसी लोक न्यास की सम्पत्ति का मूल्य

 

 

3000/- रू से अधिक किन्तु 5000/- रू. से अधिक न हो

3/- रूपया

 

जब सार्वजनिक लोक न्यास की सम्पत्ति का मूल्य

 

 

5000/- रू. से अधिक  हो

5/-रूपया

 

शुल्क राज्य की समकित निधि में जमा कराया जायेगा ।

 

19. रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणीकरण :- जब किसी लोक न्यास का नाम लोक न्यासों के रजिस्टर में लिख दिया जाये तो न्यासी को रजिस्ट्रीकरण के प्रतीक स्वरूप निम्नलिखित प्रपत्र में एक प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा। ऐसे प्रमाण पत्र पर रजिस्ट्रेशन के इंचार्ज सहायक आयुक्त द्वारा दस्तखत किये जायेंगे और उस पर कार्यालय की मुहर लगाई जायेंगी।

प्रमाण-पत्र का प्रपत्र

एतद्द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि नीचे वर्णित लोक न्यास राजस्थान लोक न्यास अधिनियम, 1959 (1959 का 42) के अधीन सहायक देवस्थान आयुक्त.............................के कार्यालय में आज के दिन रजिस्ट्रीकृत कर लिया गया है।
लोक न्यास का नाम..............................................................................................................................................लोक न्यास के रजिस्टर में संख्या......................................................................................................................
प्रमाण पत्र..................................................................को जारी किया गया। मेरे दस्तखतों से आज दिनांक.........................माह..............................सन् 200.......को दिया गया।

हस्ताक्षर...............................
दिनांक.................................

20. लोक न्यास के रजिस्ट्रीकरण हेतु जांच का तरीकाः- (1) धारा 17 के अधीन कोई आवेदन पत्र प्राप्त होने पर या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा आवेदन किये जाने पर जिसका किसी लोक न्यास में हित हो अथवा स्वविवेक से सहायक आयुक्त :-

(क) जांच की सार्वजनिक सूचना (नोटिस) देकर आपत्तियां प्रस्तुत किये जाने के लिये एक तारीख निश्चित करेगा और उक्त लोक न्यास में हित रखने वाले समस्त व्यक्तियों को ऐसे न्यास के बारे में, 60 दिन के भीतर आपत्तियां, यदि कोई हों, प्रस्तुत करने के लिये आमंत्रित करेगा,

(ख) यदि लोक न्यास में हित रखने वाले किसी व्यक्ति द्वारा आपत्तियां उठाई जाये, तो वह ऐसी आपत्तियों के लिये नियत की गई तारीख को उन्हें लेगा और उसी तारीख को या किन्हीं आगे की तारीखों को वाद पद कायम करेगा और आवेदक द्वारा एवं ऐसे व्यक्तियों द्वारा जिन्होंने आपत्तियां उठाई हो, प्रस्तुत की जाने वाली आवश्यक साक्ष्य लेगा,

(ग) उन्हें उनकी साक्ष्य को खंडित करने का और अवसर देने के पश्चात् ऐसी जांच, जो वह आवश्यक समझे, करेगा,

(घ) यदि निर्धारित अवधि के भीतर कोई आपत्तियां नहीं उठाई जाये तो एक तरफा जांच करेगा,  तथा

(ङ) जांच पूरी हो जाने पर जांच के अन्तर्गत आये मामलों के बारे में अपना निष्कर्ष कारणों सहित रेकार्ड करेगा।

(2) उपस्थिति :- किसी जांच में कोई पक्ष, स्वयं आप अपने मान्य एजेन्ट के मार्फत या ऐसे किसी वकील के जरिये, जिसे उसने अपनी ओर से कार्य करने हेतु कानूनानुसार नियुक्त किया हो, उपस्थित हो सकेगा :

परन्तु यदि सहायक आयुक्त ऐसा निदेश दे तो संबंधित पक्ष को स्वयं भी उपस्थित होना पडे़गा।

(3) सम्मन तामील किये जाने का तरीका :-

(क) किसी जांच या अन्य कार्यवाहियों में किसी व्यक्ति को चाहे वह कोई पक्ष का या गवाह हो, की उपस्थिति के लिये सम्मन डाक के जरिये अथवा किसी आदेशिका निर्वाहक के मार्फत तामील किया जायेगा।

(ख) सम्मन द्वारा बुलाये गये व्यक्ति पर सम्मन नियमानुसार तामील किया गया समझा जायेगा ;

(1) यदि सम्मन रजिस्टर्ड डाक से भेजा गया हो तो उसकी रसीद अथवा इनकारी प्राप्त हो गई हो, अथवा

(2) यदि संबंधित व्यक्तियों द्वारा सम्मन लेने से इंकार किया जाने पर दो गवाहों की उपस्थिति में मकान अथवा बस्ती के किसी प्रमुख स्थान पर सम्मन चिपका दिया जाये, अथवा

(3) यदि वह किसी ऐसे समाचार पत्र में जिसका उस बस्ती में परिचलन हो, प्रकाशित कर दिया जायें।

(ग) अधिनियम के अन्तर्गतम किसी जांच या अन्य कार्यवाहियों में किसी भी पक्ष के कहने पर किसी गवाह की उपस्थिति के लिये सम्मन तब तक जारी नहीं किया जायेगा जब तक की ऐसा पक्ष, आयुक्त या सहायक आयुक्त जो भी हो, के पास ऐसी धनराशि जमा नही करादे जो आयुक्त अथवा सहायक आयुक्त की राय में ऐसे गवाहों को उनके यात्रा संबंधी खर्चा एवं अन्य भत्ता जो देय हो, देने के लिये पर्याप्त हो।

(4) दस्तावेजों की वापसीः-

(क)  कोई भी व्यक्ति, जो किसी ऐसे दस्तावेज क वापिस लेने का इच्छुक हो जो कि जांच के समय उसने पेश किया जो, उक्त दस्तावेज की वापसी का हकदार होगा, बशर्ते कि ऐसा दस्तावेज परिबद्ध न कर लिया गया हो, यदि कार्यवाही ऐसी हो, जिसमें दी गई आज्ञा पर किसी न्यायालय में दावा करके कोई आपत्ति न उठाई जा सके या दावा दायर किये जाने की अवधि,दावा दायर किये बिना ही समाप्त हो गई हो या यदि दावा दायर कर दिया हो तो उसका निपटारा हो गया हो :

परन्तु कोई दस्तावेज इस नियम द्वारा निर्धारित अवधि से पहले किसी भी समय वापिस लौटाया जा सकेगा यदि उसके लिये आवेदन करने वाला व्यक्ति सहायक आयुक्त अथवा आयुक्त, जो भी कोई हो, को एक प्रमाणित प्रतिलिपि मूल दस्तावेज के बदले में पेश किये जाने के लिये दे दे और यह वचन दे कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह मूल दस्तावेज प्रस्तुत कर देगा।

(ख) दस्तोवज की वापसी के लिये दिये गये आवेदन में दस्तावेज की तारीख मय ब्योरा, जिस कार्यवाही में उक्त दस्तोज प्रस्तुत किया गया हो उसकी संख्या व तारीख, जिसको पेश किया गया हो, दर्ज की जायेगी और एक्जिविट चिन्ह जो उस पर हो, बताये जायेंगे और दस्तावेज लौटाये जाने पर उसे लेने वाले व्यक्ति द्वारा एक रसीद दी जायेगी।

(5) गवाहों को भत्ता :-

(क) इस अधिनियम के अन्तर्गत किसी भी जांच अथवा अन्य कार्यवाहियों के सिलसिले में बुलाये गये गवाहो ंको दिये जाने वाले भत्ते उनकी हैसियत तथा परिस्थितियों के अनुसार कम या ज्यादा होंगे । ऐसे गवाहों को दी जाने वाली राशि निश्चित करने में आयुक्त तथा सहायक आयुक्त, जो भी कोई हो, अपने विवेक का प्रयोग करेंगे।

(ख) स्थानीय गवाहों को केवल सवारी भत्ता जो 1/- रू. से अधिक तथा 50 पैसे से कम नहीं होगा, दिया जा सकेगा।

(ग) बाहर के गवाहों को वास्तविक यात्रा और खुराक व्ययों की उचित रकम दी जा सकेगी।

21. प्रस्थापित जांच के लिये सार्वजनिक नोटिस का तरीका :-

(1) सहायक आयुक्त, ऐसी जांच, जो धारा 18 की उप-धारा (1) के अधीन किया जाना प्रस्थापित हो, का एक सार्वजनिक नोटिस प्रपत्र 7 में निम्नलिखित को देगा :-

(क) जांच से संबंधित पक्षकारों को,

(ख) न्यास के न्यासियों को।

(2) ऐसे नोटिस की एक प्रति सहायक आयुक्त के कार्यालय में नोटिस बोर्ड पर तथा उस बस्ती में, जहां संबधित न्यास सम्पत्ति स्थित हो, किसी प्रमुख स्थान पर चिपकाई जाकर प्रकाशित की जायेगी। नोटिस का ऐसा प्रकाशन उन व्यक्तियों के लिये, जो न्यास सम्पत्ति में कोई हित रखते हो, पर्याप्त सूचना समझी जायेगी।

(3) ऐसी स्थिति में जहां न्यास सम्पत्ति किसी शहर में या एक से अधिक जिलों में स्थित हो, नोटिस की एक प्रतिलिपि किसी ऐसे समाचार पत्र में भी जिसका उस बस्ती में परिचालन हो या राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित की जायेगी।

22. प्रपत्र तथा तरीका, जिसमें कार्यवाहक न्यासी परिवर्तनों की रिपोर्ट देगाः-

(क) कार्यवाहक न्यासी इन्द्राजों में हुए परिवर्तन अथवा प्रस्थापित परिर्वन संबंधी रिपोर्ट सहायक आयुक्त को निर्धारित अवधि के भीतर प्रपत्र 8 में देगा।

(ख) सहायक आयुक्त, आवश्यक जांच, यदि कोई हो, के पश्चात् रजिस्टर प्रपत्र संख्या 4 में रिकार्ड दिये गये निष्कर्ष के अनुसार इन्द्राजों में संशोधन करवायेगा।

23. सहायक आयुक्त द्वारा आगे जांचः- जैसा कि धारा 24 में प्रावधान किया गया है, यदि सहायक आयुक्त को ऐसा प्रतीत हो कि किसी लोक न्यास से संबंधित किसी ‘‘तफसील’’ की, जो धारा 18 अथवा धारा 23 की उप-धारा (2) के अन्तर्गत जांच की विषयवस्तु नहीं थी, जांच की जानी है तो वह उसी तरीके से जो धारा 18 की उप-धारा (1) के अन्तर्गत प्रथम जांच की जानी संबंधी नियमों में प्रावधान किया हुआ है, आगे जांच कर सकेगा और अपने निष्कर्ष रिकार्ड कर सकेगा तथा लिये गये विनिश्चय के अनुसार रजिस्टर में प्रविष्टयां कर सकेगा अथवा इन्हें संशोधित कर सकेगा।

24.धारा 25 की उप-धारा (2) के अधीन प्रविष्टि पुस्तक :- वह पुस्तक जिसमें प्रविष्टियों अथवा संशोधित प्रविष्टियों की तफसील को लिखा जाना धारा 25 की उप-धारा (2) के अधीन आवश्यक है, प्रपत्र संख्या 5 में रखी जायेगी। 

भाग-5

धारा 31 (2) के प्रावधानों को प्रभावी करने हेतु नियम

25. न्यास संपत्तियों के कतिपय हस्तांतरणों हेतु पूर्व स्वीकृति के लिये आवेदन :- (1)

धारा 31 की उप-धारा (2) के अधीन स्वीकृति के लिये दिये जाने वाले प्रत्येक आवेदन पत्र में निम्नलिखित मदों के बारे में सूचना का समावेश होगा-

(i) अन्तरण के कारण,

(ii) प्रस्तावित अन्तरण किस प्रकार लोक न्यास के हित में है,

(iii) पट्टे की दशा में पिछले पट्टों की, यदि कोई हो, अवधि,

(iv) क्या न्यास संलेख में ऐसी अचल सम्पत्ति के अन्तरण संबंधी कोई निर्देश दिये गये है।

(2) ऐसा आवेदन प्रपत्र संख्या 9 में होगा।

भाग-6

नीचे लिखी धाराओं के प्रावधानों को प्रभावी करने के लिये नियमः-

धारा-32

धारा-33 की उप-धारा (2), (3) तथा (5)

धारा-35 तथा 36

26. लेखे रखा जाना :- ऐसे किसी लोक न्यास का कार्यवाहक न्यासी अथवा प्रबंधक, जो अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत कर दिया गया है, प्रपत्र संख्या 10 तथा 11 में नियमित लेखे रखेगा, जिनमें समस्त चल तथा अचल सम्पत्तियों के विवरण रखे जायेंगे।

27.लेखे के वार्षिक अंकेक्षण की रीतिः- न्यासी लेखे का ऑडिट प्रतिवर्ष ऑडिटर से करवायेगा, जो अंकेक्षण किये हुए लेखे संबंधी रिपोर्ट, जिसमें धारा 34 की उप-धारा (2) द्वारा चाही गई सूचना के अतिरिक्त निम्नलिखित विवरण भी देगा, तैयार करेगा-

(क) आया हिसाब-किताब नियमित रूप से तथा अधिनियम एवं इसके अन्तर्गत बनाये गये नियमों के प्रावधानों के अनुसरण में रखे जाते है ;

(ख) आया आमद तथा चुकारा हिसाब-किताब में उपयुक्त व सही रीति से बताये गये है ;

(ग) आया अंकेक्षण की तारीख को प्रबंधक अथवा कार्यवाहक न्यासी के संरक्षण में जो नकद अतिशेष अथवा वाउचर थे, उनका लेखे के साथ ठीक मिलान हो रहा था;

(घ) आया अंकेक्षक द्वारा चाही गई सभी पुस्तकें, विलेख, लेखे, वाउचर या अन्य दस्तावेज या अभिलेख उसके समक्ष प्रस्तुत किये गये थे;

(ङ) आया लोक न्यास की चल सम्पत्ति की सूची प्रबंधक अथवा कार्यवाहक न्यासी द्वारा प्रमाणित हुई दशा में रखी गई है ;

(च) आया प्रबंधक अथवा कार्यवाहक न्यासी अथवा कोई अन्य व्यक्ति, जिसकी उपस्थिति के लिये अंकेक्षक द्वारा मांग की गई हो, उसके समक्ष उपस्थित हुआ, तथा मांगी गई आवश्यक सूचना उसने प्रस्तुत की;

(छ) आया न्यास की कोई सम्पत्ति अथवा अन्य निधियां न्यास के उद्देश्य या प्रयोजन से भिन्न उद्देश्य या प्रयोजन के लिये काम में लाई गई ;

(ज) ऐसी रकमें, जो एक वर्ष से अधिक समय से बकाया निकल रही थी तथा ये रकमें जो बट्टा खाते लिखी गई, यदि कोई हो;

(झ) आया मरम्मत अथवा निर्माण के ऐसे कार्यो के लिये, जिनमें 1000/- रूपये से अधिक का खर्च हो, टेण्डर मांगे गये हो;

(´) आया 100. रूपये से अधिक कीमत की चीजों को खरीदने के लिये कीमत-दरें (कोटेशन) आमिंत्रत की गई थीं;

(ट) आया लोक न्यास की कोई रकम अधिनियम के प्रावधानों के प्रतिकूल विनियोजित की गई है;

(ठ) अधिनियम के प्रावधानों के प्रतिकूल अचल सम्पत्ति के अन्य संक्रामण, यदि कोई हो, का मामला अंकेक्षक के ध्यान में आया हो ;

(ड) कोई विशेष मामला, जिसको सहायक आयुक्त के ध्यान में लाना अंकेक्षक उचित अथवा आवश्यक समझे।

28. अंकेक्षण का समय तथा अंकेक्षण रिपोर्ट पेश किया जाना :-(1) न्यासी लेखा संतुलन की तारीख से 6 माह के भीतर लेखे ऑडिट करवायेगा।

(2) सहायक आयुक्तों के कार्यालय में धारा 34 के अधीन प्राप्त अंकेक्षण प्रतिवेदनों का एक रजिस्टर रखा जायेगा, जो प्रपत्र संख्या 12 में होगा।

29. अंकेक्षण के प्रयोजनार्थ शक्ति :- अंकेक्षण के प्रयोजनार्थ, सहायक आयुक्त स्वविवेक से अथवा अंकेक्षक के निवेदन पर :-

(1) किसी न्यासी को ऑडिटर (अंकेक्षक) के समक्ष ऐसी पुस्तक, विलेख, लेखा, वाउचर अथवा अन्य दस्तावेज अथवा अभिलेख प्रस्तुत करने के लिये कह सकेगा, जो उपयुक्त रीति से अंकेक्षण किये जाने के लिये आवश्यक हो ;

(2) ऐसे किसी न्यासी अथवा व्यक्ति को, जिसके अभिरक्षण अथवा नियन्त्रण में अथवा अत्तरदायित्व के अधीन उक्त कोई पुस्तक, विलेख, लेखा, वाउचर अथवा अन्य दस्तावेज या अभिलेख हों, अंकेक्षक के सम्मुख व्यक्तिगत रूप में उपस्थित होने के लिये कह सकेगा ;

(3) किसी न्यासी से या उक्त किसी व्यक्ति से ऐसी सूचना, जो उपरोक्त प्रयोजन के लिये आवश्यक हो, अंकेक्षक देने को कह सकेगा ;

(4) ऐसे किसी न्यासी  व्यक्ति से, जिसके समारक्षण या नियंत्रण अथवा उत्तरदायित्व के अधीन न्यास की कोई चल सम्पत्ति हो, अंकेक्षक के निरीक्षण हेतु उस सम्पत्ति को प्रस्तुत करने तथा उससे संबंधित ऐसी सूचना, जो उसके लिये जरूरी हो, देने के लिये कह सकेगा।

30. विशेष अंकेक्षण के लिये शुल्क :-(1) धारा 33 की उप-धारा (5) के अन्तर्गत विशेष अंकेक्षण के लिये शुल्क सहायक आयुक्त द्वारा प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के अनुसार तय किया जायेगा :

परन्तु किसी भी दशा में इस प्रकार दिया जाने वाला शुल्क लोक न्यास की सकल वार्षिक आय के ढाई प्रतिशत से अधिक नहीं होगा या 25/- रू. से कम नहीं होगा।

(2) धारा 33 की उप-धारा (4) के अधीन किसी विशेष अंकेक्षण का निदेश देने से पहले, सहायक आयुक्त प्रबंधक या संबंधित कार्यवाहक न्यासी से या उस व्यक्ति से, जिसने विशेष अंकेक्षण के लिये सहायक आयुक्त को आवेदन किया हो, ऐसी रकम जमा कराने क लिये कह सकेगा, जो सहायक आयुक्त की राय में विशेष अंकेक्षण क व्यय की पूर्ति के लिये पर्याप्त हो।

(3) यदि उक्त शुल्क किसी प्रबंधक अथवा कार्यवाहक न्यासी द्वारा दिया जाना हो, तो वह न्यास के कोष में से दिया जायेगा।

31. बजट :- प्रत्येक लोक न्यास जिसकी सकल वार्षिक आय 3,600/- रूपयो से अधिक हो, प्रतिवर्ष 31 दिसम्बर से पहले प्रपत्र 13 व 14 में एक बजट तैयार करके प्रस्तुत करेगा, जिसमें आगामी वित्तीय वर्ष में न्यास की होने वाली अनुमानित आमद तथा व्यय दिखाये गये हों।

32. निरीक्षण तथा प्रतिलिपियां :- 

(1)

(क) किसी लोक न्यास में हित रखने वाला कोई व्यक्ति सहायक आयुक्त को, ऐसे दस्तावेज, जिसके निरीक्षण की अनुमति धारा 36 के अधीन हो, की पहचान के लिये, आवश्यक सूचना का वर्णन करते हुए आवेदन कर सकेगा ओर निरीक्षण किये जाने वाले प्रत्यके दस्तावेज के लिये एक रूपया प्रति घंटा की दर से शुल्क भुगतान करने पर उसे ऐसे किसी भी उक्त दस्तावेज का निरीक्षण करने की इजाजत दी जायेगी।

(ख) ऐसा निरीक्षण केवल कार्यालय समय में   ही किये जाने की अनुमति दी जायेगी और ऐसी देखरेख के अधीन होगा, जिसके लिये सहायक आयुक्त प्रत्येक मामले में निदेश दे ।

(2)

(क) ऐसे दस्तावेजों, जिनके निरीक्षण की इजाजत है, की प्रमाणित प्रतियों के लिये शुल्क, प्रत्येक 100 शब्द या उनके किसी भाग के लिये चार आने होगा।

(ख) स्टाम्प पेपर आवेदक द्वारा दिया जायेगा।

(ग) साधारण प्रतियां एक सप्ताह के अन्दर दी जायेंगी।

(घ) आवश्यक मामलों में प्रतियां दुगुना चुकाने पर 24 घंटे के भीतर दे दी जायेंगी, यदि विषय इतना लम्बा न हो कि उसमें अधिक समय लगे।

भाग-7

नीचे लिखी धाराओं को प्रभावी करने के लिये नियम :-

धारा 47 (1)

धारा 49 (2)

33. विवरणियां और विवरण :-लोक न्यास का कार्यवाहक न्यासी, सहायक आयुक्त को निम्नलिखित विवरणियां और विवरण प्रत्येक के आगे बतलाई गई तारीख को प्रस्तुत करेगा-

1

वार्षिक विनियोजन का विवरण           

वार्षिक

प्रत्येक वर्ष 1 अप्रेल को 1

2

उधार ऋणो तथा अग्रिमों की वसूली का विवरण

छमाही

प्रत्येक वर्ष 15 अक्टूबर और 15 अप्रेल को ।

3

सम्पत्तियों के किराये से होने

वार्षिक

वाली आमदनी का विवरण

4

न्यास को की गई भेटों का विवरण

छमाही

 

5

लोक न्यास की आमदनी और खर्च का विवरण

वार्षिक

 

6

देयों और ऋणों के भुगतान का विवरण

वार्षिक

 

34. धारा 49 (2) के अधीन जांच की रीति :- यदि सहायक आयुक्त को यह मालूम हो कि धारा 49 के अधीन जांच के लिये प्रथम दृष्ट्या कोई मामला है तो वह-

(क) जांच के लिये तारीख निश्चित करेगा और न्यासी अथवा किसी भी संबंधित अन्य व्यक्ति पर, निश्चित तारीख को उपस्थित होने के लिये एक नोटिस तामील करवायेगा,

(ख) ऐसी सुनवाई के लिये निश्चित तारीख पर या किसी भी ऐसी आगे की तय की गई तारीख को, जिस दिन के लिये कि सुनवाई स्थगित की जाये, उनको अपना मामला प्रस्तुत करने और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर देगा तथा ऐसी और जांच करेगा, जिसे वह आवश्यक समझे, और

(ग) जांच पूर्ण हो जाने पर धारा 49 की उप-धारा (2) के अन्तर्गत अपने द्वारा निकाले गये निष्कर्ष एवं उसके कारणों को रेकार्ड करेगा।

भाग-8

निम्नलिखित धाराओं के प्रावधानों को प्रभावी करने के लिये नियम :-

धारा-53 (3) एवं (5)

धारा-65

35. प्रबंध समिति द्वारा सम्पत्ति के अर्जन तथा व्ययन के संबंध में शर्ते और प्रतिबन्धः- न्यास विलेख में समाविष्ट निर्देशों के, या न्यायालय द्वारा दिये गये किसी निदेश के अथवा अधिनियम या किसी अन्य कानून के किन्हीं प्रावधानों के अधीन रहते हुए प्रबंध समिति-

(क) देवस्थान आयुक्त की अनुमति के बिना किसी ऐसी अचल सम्पत्ति, जो मूल्य में 2000/- (दो हजार रूपये) से अधिक हो, गिरवी नहीं रखेगी,

(ख) किसी ऐसी अचल सम्पत्ति, जिसका मूल्य 2000/- (दो हजार रूपये) से अधिक हो, का सार्वजनिक नीलाम के अलावा बेचान अथवा निपटारा नहीं करेगी; अथवा

(ग) देवस्थान आयुक्त की स्वीकृति के बिना ऐसी किसी अचल सम्पत्ति, जिसका मूल्य 2000/- (दो हजार रूपये) से अधिक हो, को अर्जित नहीं करेगीः

परन्तु ऐसा लोक न्यास जो सरकार में निहित है, या जिसकी देखभाल सरकार के खर्चे पर की जाती हो, या जिसका प्रबंध सीधा राज्य सरकार द्वारा होता है, या जो कोर्ट ऑफ वार्डस के संरक्षण में है, के लिये गठित प्रबंध समिति उपर्युक्त विषयों के संबंध में केवल ऐसी ही शक्ति का प्रयोग करेगी, जो राज्य सरकार आज्ञा द्वारा, प्रदान करें।

36. हित रखने वाले व्यक्तियों की इच्छायें मालूम करने की रीतिः-

(1) धारा 53 की उप-धारा (5) के अन्तर्गत हित रखने वाले व्यक्तियों की इच्छायें मालूम करने के लिये, राज्य सरकार सहायक आयुक्त को प्रबंध समिति के गठन के लिये, सुझाव मांगते हुए एक सार्वजनिक नोटिस ऐसी रीति से, जिसे वह उपयुक्त समझे, जारी करने का निर्देश देगी।

(2) सहायक आयुक्त इस प्रकार प्राप्त हुए सुझावों को, अपनी टिप्पणियों सहित, आयुक्त देवस्थान की मारफत, राज्य सरकार को प्रेषित करेगा।

37. प्रबंध समिति की बैठक तथा उसके लिये प्रक्रिया :-

(1) न्यास के विषयों पर विचार-विमर्श करने के लिये एक मास में कम से कम एक बार प्रबंध समिति की बैठक होगी।

(2) बैठक के प्रयोजन के लिये सदस्यों कीकुलसंख्या1ध्3 (एक-तिहाई) कोरम माना जायेगा। यदि कोरम पूरा नही होता है तो बैठक आगामी तारीख के लिये स्थगित कर दी जायेगी।

(3) प्रबंध समिति के निर्णय लिखित में रेकार्ड किये जायेंगे और उन पर सभापति के दस्तखत होंगे तथा ऐसे निर्णय समिति के अभिलेख होंगे। समिति अपने निर्णयों को कार्यान्वित कराने के लिये समस्त उपाय काम में लायेगी।

(4) प्रबंध समिति, सभापति को अथवा किसी अन्य सदस्य को, लिखित रूप में अपनी समस्त शक्तियां या उनमें से किसी भी शक्ति को न्यास के दैनिक कार्य संचालन के लिये तथा उसे सुविधापूर्ण बनाने के लिये सौंप सकती हैं

(5) सभापति प्रबंध समिति की ओर से समस्त पत्रो तथा ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने और दैनिक कार्य का संचालन करने के लिये अधिकृत होगा।

(6) प्रबंध समिति का सभापति सदस्यों को बैठक के समय, तारीख और स्थान के संबंध में, कार्यसूची हित, यदि कोई हो, अग्रिम सूचना देगा। प्रबंध समिति के सभापति या सदस्यों के लिये वर्ष में होने वाली बैठकों में से कम से कम 50 प्रतिशत (पचास प्रतिशत) बैठकों में भाग लेना अनिवार्य होगा।

भाग-9

धारा 66 के प्रावधानों को कार्यान्वित करने के लिये नियम

39. धारा 66 (2) के अधीन समिति के सदस्यों का चुनाव.-धारा 66 की उप-धारा (2) के अधीन समिति का गठन करने के प्रयोजनार्थ भिन्न-भिन्न कस्बों में संबंधित व्यापार या कारवार में लगे हुए व्यक्तियों को, जो धर्मादा वसूल या संग्रहित कर रहे है, कम से कम 15 दिन का सार्वजनिक नोटिस देकर उस क्षेत्र के सहायक आयुक्त द्वारा बुलाया जायेगा और ऐसे व्यक्ति, सहायक आयुक्त की उपस्थिति में पांच वर्ष की अवधि के लिये समिति के सदस्य का चुनाव हाथ खड़े करके करेंगे। इस प्रकार निर्वाचित सदस्य, तुरन्त सहायक आयुक्त की उपस्थिति में, सदस्यो के में से किसी एक सदस्य को, हाथ खडे़ करके समिति का सभापति चुन लेंगे।

40. धर्मादा का लेखा विवरण :- धर्मादा वसूल अथवा संग्रहित करने वाला व्यक्ति अपने वार्षिक हिसाबों के बन्द किये जाने से 3 मास के भीतर प्रपत्र संख्या 15 में धर्मादा का हिसाब प्रस्तुत करेगा ।

41. जांच तथा अंकेक्षण :- सहायक आयुक्त धारा 66 की उप धारा (4) के अधीन धर्मादा के हिसाब के सही होने का सत्यापन करने के प्रयोजनार्थ धर्मादा वसूल अथवा संग्रहित करने वाले व्यक्ति के हिसाबों की पुस्तकें मंगवाकर जांच कर सकता है  और यदि वह आवष्यक समझे तो किसी भी ऐसे व्यक्ति द्वारा जिसे वह इस विषय में नियुक्त करें, उनका अंकेक्षण करवा सकता है और ऐसे अंकेक्षण का खर्चा, ऐसे हिसाब मेंसे दिये जाने के लिये निर्देष दे सकता है ं

प्रपत्र संख्या 16 में सहायक आयुक्त द्वारा उसके क्षेत्र में धर्मादे का रजिस्टर रखा जायेगा ।

भाग-10

धारा 76 (2) (ढ़) के अधीन नियम

42. अपीलों के प्रपत्र तथा फीस का निर्धारण :-

(1) अधिनियम के प्रावधानों के अधीन प्रत्येक अपील, अपीलान्ट या उसके वकील द्वारा दस्तखतशुदा ज्ञापन के रूप में प्रस्तुत की जायेगी। ज्ञापन में, जिन निश्चयों अथवा आज्ञाओं की अपील की गई है उस पर की जाने वाली आपत्तियों के आधार, संक्षिप्त रूप में और पृथक-पृथक शीर्षकों के अधीन, बिना किसी तर्क अथवा कथन के, बतलायें जायेंगे और ऐसे आधारो को क्रमिक रूप से संख्याबद्ध किया जायेगा।

(2) ऐसी अपील, उसके लिय निर्धारित अवधि के भीतर अपील प्राधिकारी को या तो रजिस्टर्ड डाक द्वारा भेजी जायेगी या व्यक्तिगत रूप से या  वकील द्वारा प्रस्तुत की जायेगी और उसके साथ-

(क) निष्कर्ष अथवा आज्ञा, जिसकी अपील की गई है, की एक प्रमाणित प्रतिलिपि;

(ख) अपील के ज्ञापन की उतनी प्रतिलिपियां, जितनी कि उन पक्षकारों पर तामील किये जाने के लिये आवश्यक हो, जिनके कि अधिकारों या हितों पर ऐसी किसी भी आज्ञा का जो ऐसी अपील में दी जायेगी, प्रभाव पड़े, नत्थी की जायेगी।

(3) अपीलान्ट, अपील प्राधिकारी के कार्यालय में, पच्चीस पैसे प्रति प्रत्यर्थी की दर से समस्त प्रत्यार्थियों पर नोटिस तामील किये जाने का खर्चा जमा करायेगा।

(4) अपील पर दो रूपये का कोर्ट फीस स्टाम्प लगाया जायेगा। 

प्रपत्र

प्रपत्र  संख्या-1
(देखिये निमय 16)

क्रम संख्या

न्यास का नाम

न्यासी तथा प्रबंधकों के नाम उनके पते सहित

न्यासी तथा प्रबंधक  के उत्तराधिकार  का तरीका

1

2

3

4

न्यास के उद्देश्य

न्यास सृजन संबंधी दस्तावेजों के  विवरण

न्यास की उत्पत्ति अथवा सृजन के संबंध में दस्तावेजों को छोडकर, अन्य विवरण

5

6

7

चल सम्पत्ति

चल सम्पत्ति (नकदी संबंधी प्रविष्ठियां  की जानी चाहिये यदि नगदी न्यास  के मूलधन का भाग हो)

सम्पत्ति का अनुमानित मूल्य

गांव जहां स्थित है

8

9

10

अचल सम्पत्ति

धारणाधिकार

सर्वे

क्षेत्रफल नम्बर या नगर सर्वे अथवा म्युनिसिपल नम्बर

निर्धारित कर

स्तम्भ 12 मे उल्लेखित  प्रत्येक सम्पत्ति का अनुमानित मूल्य

11

12

13

14

15

वार्षिक औसत आय

स्तम्भ 8 तथा 12 में वर्णित सम्पत्ति से वार्षिक औसत सकल आय

अन्य साधनों से प्राप्त वार्षिक औसत सकल आय

स्तम्भ 16 तथा 17 का योग

16

17

18

वार्षिक औसत व्यय

न्यासी या प्रबंधको के देय पारिश्रमिक

कर्मचारी वर्ग तथा सेवकगण  पर

धार्मिक कार्यो

19

20

21

पुण्यार्थ कार्यो पर विवरण

विविध कार्यो  पर

स्तम्भ 19 से 23 तक का योग

न्यास सम्पत्ति पर प्रभारों के

22

23

24

25

न्यास सम्पति से संबंधित स्वत्व   विलेखों के विवरण तथा उन न्यासियों के नाम                    जिनके कब्जे में वे हों

न्यास से संबंन्धित योजना, यदि कोई हो,                के ब्यौरे

अभ्युक्ति

26

27

28

प्रपत्र  संख्या-2
(देखिये नियम 16)

देवस्थान आयुक्त से प्राप्त निर्णयों का रजिस्टर

क्र. स.

लोक न्यास का नाम तथा रजिस्टर्ड नम्बर

कार्यालय का नाम

निर्णय की तारीख नाम

देवस्थान  आयुक्त का निर्णय प्राप्ति की तारीख

1

2

3

4

5

प्रपत्र  संख्या-3
(देखिये निमय 16)

रजिस्टर- न्यायालय निर्णय, जिनकी सूचना सहायक आयुक्त को दी गई

क्र. स.

लोक न्यास का नाम तथा रजिस्टर्ड नम्बर

न्यायालय का नाम

तारीख निर्णय

तारीख जब सहायक देवस्थान के कार्यालय में प्राप्त हुआ

1

2

3

4

5

निर्णय का स्वरूप संक्षेप में

सहायक आयुक्त द्वारा कार्यवाही की आज्ञा

संबंधित क्लर्क की रिपोर्ट तामील

क्लर्क के हस्ताक्षर

अभ्युक्ति

6

7

8

9

10

प्रपत्र  संख्या-4
(देखिये निमय 16 तथा 22(ख)द्व

परिवर्तनों का रजिस्टर

क्र. स.

लोक न्यास का नाम तथा रजिस्टर्ड नम्बर तथा नाम

न्यासी के प्रतिवेदन की तारीख (यदि परिवर्तन प्रतिवेदक के अलावा अन्य आधार पर  किये गये हो तो ‘‘ कुछ नही‘‘ लिखिये)

लोक न्यास रजिस्टर में वांछित परिवर्तनों का स्वरूप

 

1

2

3

4

 

आज्ञा का सारांष उनकी तारीख तथा सहायक आयुक्त के हस्ताक्षर

अभ्युक्ति

 

 

 

5

6

 

 

 

 प्रपत्र  संख्या-5
(देखिये निमय 16 तथा 24)

किसी ऐसे लोक न्यास, जिसका रजिस्ट्रीकरण दूसरे क्षेत्र में हुआ हो, के क्षेत्राधिकार में स्थित अचल सम्पत्ति के संबंध में प्रविष्टियां या संशोधित प्रविष्टियां दर्ज करने के लिये पुस्तक

क्र. स.

तारीख

लोक न्यास का नाम

न्यासियों तथा प्रबंधकों के नाम, उनकेपते सहित

रजिस्ट्रीकरण कार्यालय

इस क्षेत्र में स्थित पूरे ब्यौरे ,जैसे वे प्रेषण कार्यालय के इस रजिस्टर में अभिलिखित हैं

उस कार्यालय का नाम ,जिसमें सूचना दी हो,मय तारीख तथा प्रेषण संख्या

अभ्युक्ति

1

2

3

4

5

6

7

8

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

प्रपत्र  संख्या-6
(देखिये नियम 17(2)

आवेदन प्रपत्र

सहायक आयुक्त, देवस्थान,
................................................,क्षेत्र
................................................
.................................................................................लोक न्यास के संबंध में। 

मै.....................................................................................जो उपर्युक्त लोक न्यास का कार्यवाहक न्यासी हू, राजस्थान लोक न्यास अधिनियम, 1959 की धारा 17 के अन्तर्गत उक्त न्यास के रजिस्ट्रीकरण के लिये एतद् द्वारा आवेदन करता हूँ।

2. मै निम्नलिखित आवश्यक विवरण प्रस्तुत करता हूँः-

(1) न्यास की उत्पत्ति (जहां तक ज्ञात हो), उसका स्वरूप तथा उसके उद्देश्य और नाम, जिससे उक्त न्यास पुकारा जाता है अथवा पुकारा जायेगा।

(2) उक्त लोक न्यास का मुख्य कार्यालय अथवा कार्य करने का मुख्य स्थान स्थित है।

(3) कार्यवाहक न्यासी तथा प्रबंधक के नाम तथा पते।

(4) न्यासी पद के उत्तराधिकार का तरीका।

(5) चल सम्पत्ति के ब्यौरे, जिसमें उस सम्पत्ति के प्रत्येक वर्ग का अनुमानित मूल्य भी दिया हुआ हो।

नोट :(ऐसी सम्पत्ति के वर्गो के स्थुल विवरण देकर प्रविष्टियां करनी चाहिये। जैसे फर्नीचर, पुस्तकें इत्यादि न कि प्रत्येक वर्ग के लिये पृथक-पृथक रूप से। नकदी संबंधी प्रविष्टि केवल तब ही की जानी चाहिये, जबकि उक्त नकदी, न्यास के मूलधन का अंग हो। दस्तावेजों की दशा में प्रत्येक प्रतिभूति, स्टॉक, शेयर तथा डिबेन्चर के नम्बर सहित, विवरण दीजिये)।

(6) अचल सम्पत्ति का ब्यौरा, जिसमें वह गाँव या कस्बा जहां वह स्थित है, म्युनिसिपल या सर्वे खसरा नम्बर, क्षेत्रफल, निर्धारित कर, धारणाधिकार, जिसके आधार पर धारित है,का वर्णन भी बताये हुऐ हों,ख् अधिकार-अभिलेख, नगर सर्वे-अभिलेख या  म्युनिसिपल अभिलेख में सम्पत्तियों के संबंध में प्रविष्टिया, (यदि उपलब्ध) हो की प्रमाणित प्रतिलियां साथ लगाये।

1.
2.
3.
4.

(ख)

1.
2.
3.
4.

(7) आय का अन्य स्त्रोत।

(8) औसत वार्षिक सकल आय (चल व अचल सम्पत्तियों तथा अन्य स्त्रोतो से)।

नोटः- यह उस तारीख से, जिसको कि आवेदन पत्र दिया जाय, तुरन्त पूर्ववर्ती तीन वर्ष की अवधि अथवा उक्त न्यास के सृजन के उपरान्त व्यतीत अवधि, जो भी अवधि कम हो, के दौरान में हुई वास्तविक सकल आय पर तथा किसी नवसृजित लोक न्यास की दशा मे, समस्त स्त्रोतों से प्राप्त अनुमानित वार्षिक सकल आय पर आधारित होनी चाहिये।

(9) औसत वार्षिक व्यय :- ख्जिसका अनुमान ऐसे व्यय पर, जो उस अवधि के भीतर, जिसका संबंध खण्ड (8) के अन्तर्गत दिये गये विवरणों से है, किया गया हो तथा किसी नव-सृजित लोक न्यास की दशा में अनुमानित वार्षिक व्यय पर लगाया जाये।,

(क) न्यासी तथा प्रबंधक के पारिश्रमिक पर।
(ख) कर्मचारी वर्ग तथा सेवकों पर।
(ग) धार्मिक उद्देश्यों पर ।
(घ) पुण्यार्थ उद्देश्यों पर।
(ङ) विविध मदों पर।

(10) प्रभारों के विवरण, यदि प्रन्यास की सम्पत्ति पर कोई प्रभार हो।

(11) न्यास की सम्पत्ति के संबंध में स्वत्व-विलेखों तथा न्यास लिखतों (यदि ऐसी लिखित निष्पादित की गयी है तथा विद्यमान है) के विवरण तथा उस न्यासी का नाम, जिसके कब्जे में वे हों।

(12) प्रबंधक या कार्यवाहक न्यासी का पता जहां पत्रादि भेजे जायेंगे।

(13) अभ्युक्तियां, यदि कोई हो। 

........................................शुल्क साथ प्रस्तुत किया जाता है।

स्थान......................

दिनांक....................

कार्यवाहक न्यासी या
प्रबंधकों के हस्ताक्षर

प्रपत्र संख्या-7
(देखिये नियम 21)

राजस्थान लोक न्यास अधिनियम, 1959 की धारा 18(2) के अधीन नोटिस
कार्यालय- सहायक आयुक्त, देवस्थान

प्रेषिती,

समस्त संबंधित व्यक्ति।

(नाम, वर्णन तथा निवास स्थान)

चूंकि......................................................................................................................................................................................................................................................ने राजस्थान लोक न्यास अधिनियम, 1959 की धारा 17.....................................के अन्तर्गत.........................न्यास के संबंध में जांच किये जाने के लिये आवेदन-पत्र दिया है।

अतएव धारा 18 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में उपर्युक्त न्यास, जिसकी जां की जारी है, में हित रखने वाले समस्त व्यक्तियों की व्यापक जानकारी के लिये यह नोटिस प्रकाशित किय जाता है कि वे इस नोटिस के जारी होने की तारीख से साठ दिन के भीतर उक्त न्यास के संबंध में आपत्तियां, यदि कोई हां, प्रस्तुत करें।

और यह सूचित किया जाता है कि यदि उपरोक्त निर्दिष्ट अवधि के भीतर कोई आपत्तियां प्रस्तुत नही की गई तो उक्त आवेदन-पत्र विहित रीति से निर्णीत किया जायेगा तथा जांच ग्रसित मामले में निष्कर्ष अभिलिखित किया जायेगा।

आज दिनांक........................200... को मेरे हस्ताक्षर तथा कार्यालय की मोहर के अधीन जारी किया गया। 

सहायक देवस्थान आयुक्त

प्रपत्र संख्या-8
(देखिये नियम 22)

लोक न्यासों के रजिस्टर में अभिलिखित किये जाने वाले परिवर्तनों अथवा प्रस्थापित परिवर्तनों का प्रतिवेदन

सेवा मे,
सहायक आयुक्त, देवस्थान।
..................................................
लोक न्यास के रजिस्ट्रेशन नम्बर तथा नाम.....................................................................................................

परिवर्तनों का स्वरूप

परिवर्तनों का कारण

अभ्युक्ति, यदि कोई हो

1

2

3

दिनांक..............

कार्यवाहक न्यासी अथवा प्रबंधक 
के हस्ताक्षर तथा पता

प्रपत्र संख्या-9
(देखिये नियम 25(2))

सम्पत्तियों के कतिपय अन्तरणों की अनुमति के लिये आवेदन

सेवा मे,
सहायक देवस्थान आयुक्त।
रजिस्ट्रीकरण नम्बर...........................लोक न्यास का नाम......................................................................... 

अन्तरित की जाने वाली सम्पत्ति का विवरण

क्र0 सं0

चल सम्पत्ति
सम्पत्ति का नाम/ अनुमानित मूल्य,औसत वार्षिक आय(किराया या ब्याज यदि कोई हो )

अचल सम्पत्ति
सम्पत्ति का नाम/सर्वे नं0 या नगर सर्वे या म्युनिसिपल नं0,क्षेत्रफल,निर्धारित कर/अनुमानित मूल्य /औसत वार्षिक आय

अन्तरण का स्वरूप
विक्रय/विनिमय/उपहार/पट्टा

अन्तरण के कारण

1

2

3

4

5

अन्तरण के कारण

कार्यवाहक न्यासी अथवा प्रबंधकों के नाम, पते सहित

अन्तरण से वास्तविक अथवा अनुमानित आय

अभ्युक्ति

5

6

7

8

स्थानः-

दिनांकः-

कार्यवाहक न्यासी या प्रबंधक
के हस्ताक्षर तथा पता 

प्रपत्र संख्या-10
(देखिये नियम 26)
.......................................को समाप्त होने वाले वर्ष का आय विवरण
लोकन्यास का नाम तथा उसकी रजिस्ट्रीकृत संख्या.......................
अचल सम्पत्ति से आय 

सम्पत्ति के ब्यौरे

पूर्व वर्ष के अन्त में आय की बकाया

चालु वर्ष के लिये निष्चित किये गये किराये की मांग

वर्ष में वसूल की गई राशि

बकाया मय उस वर्ष के ब्यौरे के ,जिसके कि संबंध में यह बकाया है ।

1

2

3

4

5


अन्य सम्पत्ति, प्रतिभूतियों (यदि कोई हों) को शामिल करते हुए, से आय

सम्पत्ति का विवरण

पूर्व वर्ष के अन्त में आय की बकाया

चालू वर्ष में वसूल की जाने वाली राशि

वर्ष में वसूल की गई राशि

शेष बकाया

6

7

8

9

10


कुल वसूली तथा बकाया

वर्ष में वसूल की गई कुल राशि

शेष रही कुल बकाया

अभ्युक्ति

11

12

13

प्रपत्र संख्या-11
(देखिये नियम 26)
.......................................को समाप्त होने वाले वर्ष का व्यय का विवरण

लोक न्यास का नाम तथा उसकी रजिस्ट्रीकृत संख्या....................... 

कर निर्धारण/उप-कर तथा अन्य सरकारी देय

नगर पालिका कर एवं अन्य कर

सम्पत्ति के अनुरक्षण तथा आवष्यक सुधार पर,मरम्मत को षामिल करते हुये किये गये व्यय

प्रबंधकों तथा/या न्यासी को पारिश्रमिक

सेवकों के वेतन तथा भत्ते

धार्मिक उद्देष्यों पर

1

2

3

4

5

6


पुण्यार्थक उद्देष्यों पर

विविध व्यय(अंषदान शामिल करते हुये )

कुल व्यय

कुल आय

अतिशेष

अभ्युक्ति

7

8

9

10

11

12

प्रपत्र संख्या-12
(देखिये नियम 28(2) )

अंकेक्षण रिपोर्ट का रजिस्टर
कार्यालय सहायक देवास्थान आयुक्त

 लोक न्यास का नाम तथा उसकी रजिस्ट्रीकृत संख्या.......................

वर्ष, जिसके लिये अंकेक्षण हो रहा है

अंकेक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने की तारीख

अंकेक्षक का नाम

अभ्युक्ति

1

2

3

4

प्रपत्र संख्या-13
(देखिये नियम 31 )

अंकेक्षण रिपोर्ट का रजिस्टर
कार्यालय सहायक देवास्थान आयुक्त
न्यास की वर्ष................................की आय तथा व्यय का आय-व्ययक अनुमान 

...............के लेखे

वर्ष...............के आय-व्ययक अनुमान

वर्ष..........के संशोधित अनुमान

आय आय का शीर्षक

1

2

3

4

 

 

1.......से अंशदान
2. अन्य आय-
(क) नियोजन तथा अग्रिमों पर ब्याज
(ख) दस्तावेज दिये जाने की फीस तथा क्षुद्र मदें वर्ष के अन्त में घाटा योग....................................

 

व्यय

वर्ष...............के आय-व्ययक अनुमान

वर्ष...............के आय-व्ययक अनुमान

व्यय का शीर्षक

5

6

7

 

1. पूर्व वर्ष का घाटा
2. (1) न्यासियों तथा अन्य व्यक्तियों को वेतन एवं भत्ते
(2) कर्मचारी वर्ग का वेतन
(3) यात्रा तथा अन्य भत्ते
(4) आकस्मिक व्यय
(5) अंकेक्षण व्यय
(6) ऋणों पर ब्याज
(7) मरम्मत
(8) अन्य व्यय
योग

 

वर्ष ............के संषोधित अनुमान

वर्ष .................आय अनुमान

वर्ष ................. के लेखे

8

9

10

प्रपत्र संख्या-14
(देखिये नियम 31 )
...............................................................की प्राप्ति तथा भुगतान का आय-व्ययक अनुमान 

वर्ष.......... का लेखा

वर्ष...............के आय-व्ययक अनुमान

वर्ष...............का संशोधितअनुमान

प्राप्तियां 

वर्ष...............का आय-व्ययकअनुमान

1

2

3

4

5

 

 

 

पूर्व वर्ष............का नकद अतिशेष
(1) आय..................
(1) ऋण................
योग

 

संशोधित अनुमान

भुगतानों का शीर्षक

संशोधित अनुमान

आय-व्ययक अनुमान

वर्ष के लेखे

6

7

8

9

10

 

1.व्यय................
*2.ऋणों का भुगतान
वर्ष.......के अन्त में नकद अतिशेष
योग............

 

 

 

* आय में से व्यय निकालकर अतिरिक्त बची राशि में से या ऐसी अतिरिक्त राशि न रहे तो ऋणों इत्यादि के अतिशेष में से।

वेतन, यात्रा भत्ते और वकील की फीस के अग्रिम शामिल है। 

प्रपत्र संख्या-15
(देखिये नियम 40 )

धर्मादा के रूप में वसूल या संग्रहीत की गई धनराशियों के हिसाब का विवरण 

धर्मादे के रूप मे संग्रहीतधनराशि किस नाम से भरीजानी है

ऐसे व्यक्तियों के नाम तथापते, जिनमें संग्रहीत धनराशियां न्यासी के रूप में निहित है

अनुमानतः वह अवधि,जिस तक धर्मादा अस्तित्व मेसमझा जाता है

वे उद्येश्य, जिनके लिये सग्रंहण किया जाता है

1

2

3

4

संग्रहण के आधार तथा उसकी दर के संबंध में ब्यौरे

वर्ष, जिसके कि अनुसार हिसाब रखे जाते है

वर्ष जिसके कि हिसाब पेश किय जायें

प्रारम्भिक शेष

5

6

7

8

वर्ष में संग्रहण

स्तम्भ 8 व 9 का योग

वर्ष में किये जाने वाले संवितरणों के ब्यौरे

कुल संवितरण

अतिशेष,जो आगे हिसाब में जाया गया ।

अभ्युक्ति

9

10

11

12

13

14

धर्मादा वसूल या संग्रह करने वाले व्यक्तिके हस्ताक्षर

प्रपत्र संख्या-16
(देखिये नियम 41 )
धर्मादे का रजिस्टर
कार्यालय सहायक देवस्थान आयुक्त

वर्ष.......... का लेखा

वर्ष...............के आय-व्ययक अनुमान

वर्ष...............का संशोधित अनुमान

प्राप्तियां

वर्ष...............का आय-व्ययक अनुमान

1

2

3

4

5

क्र. स.

नाम जिससे संग्रहीत धर्मादे की राशि  पुकारी जाती है

अनुमानतः वह अवधि,जिस तकधर्मादा अस्तित्व में समझा जाता है

ऐसे व्यक्ति का नाम तथा पता, जिसमं संग्रहीत धनराशि न्यासी के रूप में निहित है

संग्रहण की रीति व दर के संबंध में ब्यौरे

वह उद्देश्य जिसके लिये संग्रहण किया गया

वर्ष जिसके अनुसार हिसाब रखे जाते है

वर्ष में संग्रहण जिसमें कि लिये हिसाबों का प्रथम विवरण पेश किया गया है।

अन्य विवरण

6

7

8

9

Nodal Officer:- Sh. Jatin Gandhi, Dy. Commissioner Devasthan Department, Udaipur

Telephone No.: 0294-2524813 (Office), Mobile No.: - 94136-64373

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