Devasthan Department, Rajasthan
 

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विश्व धर्म, दर्शन और संस्कृति की सामान्य जानकारी
(धर्म दर्शन के अनुसार)

प्रश्न:     अद्वैत वेदान्त दर्शन के प्रवर्तक आचार्य शंकर ने भारत के चार कोनों पर चार पीठों या मठों की स्थापना की, बद्रीनाथ में ज्योतिष पीठ, पुरी में गोवर्धन पीठ, द्वारिका में शारदा पीठ। चौथी पीठ किस स्थान पर और किस नाम से स्थापित की गई ?
उत्तर:     कांची में कामकोटि पीठ।

प्रश्न:     विभिन्न देवताओं की प्रार्थना एवं स्तोत्र के रूप में रची गई चालीसाओं में से प्रथम चालीसा कौन सी है?
उत्तर:     हनुमान चालीसा, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास द्वारा की गई है. इसके उपरांत इन चालीसा की रचना की परंपरा प्रारंभ हो गई.

प्रश्न:     प्रथम आरती ‘ओम् जय जगदीश हरे‘ मूलतः किस संस्कृत रचना के मुखड़े पर आधारित है ?
उत्तर:     जयदेव के गीत गोविंद के दशावतार स्तोत्र के मुखड़े पर पंजाब के श्रद्धानंद फिल्लौरी ने 1870 में यह आरती रची।

प्रश्न:     सत्यनारायण व्रत कथा किस पुराण का अंग है ?
उत्तर:     स्कंद पुराण के रेवाखंड का।

प्रश्न:     दुर्गा सप्तशती किस पुराण का अंग है ?
उत्तर:     मार्कण्डेय पुराण।

प्रश्न:     सबसे लोकप्रिय पुराण कौन रहा है ?
उत्तर:     श्रीमद्भागवत पुराण, जिसका दशम स्कंध सर्वाधिक लोकप्रिय रहा है।

प्रश्न:     भारतीय दर्शन के मुख्य संप्रदाय युगलबद्ध रूप से कौन-कौन हैं ?
उत्तर:     सांख्य-योग, न्याय-वैशेषिक, मीमांसा-वेदान्त, बौद्ध-जैन व चार्वाक।

प्रश्न:     सर्वाधिक प्राचीन भारतीय दर्शन कौन है ?
उत्तर:     सांख्य दर्शन, जिसके प्रणेता कपिल है।

प्रश्न:     ईश्वर की परिकल्पना में कौन से 16 आधारभूत गुण कौन हैं ?
उत्तर:     तत्वमीमांसीय गुण - सर्व शक्तिमत्ता, सर्वव्यापकता, सर्वकालिकता,
            ज्ञानमीमांसीय गुण - सर्वज्ञता, निरपेक्षता, अज्ञेयता, प्रतिक्रियाशीलता, ध्येयता
            मूल्यमीमांसीय गुण - शुभत्व, दयालुता, न्यायपरकता, पवित्रता
            कर्ममीमांसीय गुण - सर्जक, संचालक, पालक, संहारक।

प्रश्न:     योग दर्शन का ईश्वर क्या है ?
उत्तर:     योग दर्शन में ईश्वर कोई स्रष्टा या संचालक नहीं, अपितु पुरुष विशेष ही है, जो क्लेश, कर्म, कर्मफल और कर्मप्रयोजन से मुक्त है।

प्रश्न:     देवता शब्द का मूल अर्थ क्या है और तैतीस करोड़ देवता कौन हैं ?
उत्तर:     देवता शब्द स्त्रीलिंग है, जो देव शब्द का विशेषण है, जैसे मनुष्य का मनुष्यता, पशु का पशुता। चूंकि प्रारंभ में देव अमूर्त माने जाते थे, अतः भाववाचक संज्ञा में देव को देवता कहा जाने लगा। वैदिक काल में कर्मकाण्ड में 33 कोटि या प्रकार का देव विभाजन लोकप्रिय था- 11 रुद्र, 12 आदित्य, 8 वसु, 1 इन्द्र तथा 1 अग्नि या प्रजापति। बाद में बहुदेववाद के कारण 33 करोड़ देवों के होने की मान्यता चल पड़ी।

प्रश्न:     ‘ओम्’ क्या है इसकी इतनी महत्ता क्यों है?

उत्तर:     ईश्वर के नामकरण में जो भी नाम रखे जाते है, वे प्रायः केवल एक गुण को बता पाते है। इसलिए अ, उ तथा म् वर्णों को जोड़कर ऐसा शब्द बनाया गया, जिसमें यथासंभव आदि से अंत तक की ध्वनियों का समावेश हो सके। “अ“ अक्षर सभी स्वरों व्यंजनों में है और उच्चारण स्थान कंठ है, जो प्रथम उच्चारण स्थान है। “म“ का उच्चारण स्थान ओष्ठ है जो अंतिम उच्चारण स्थान है और ‘ओम’ में म कहने के साथ मुख बंद हो जाता है। “उ“ कंठ और ओष्ठ के मध्य बोला जाता है, अतः यह जीवन या पालन है। अतः इसमें ध्वन्यात्मक रूप में सृजन, पालन व लय तीनों के गुण समाविष्ट है।

प्रश्न:     ‘ओम्’ को कैसे लिखा जाता है ओउम् या ऊँ या ओ३म् ?
उत्तर:     संस्कृत में जिन शब्दों के उच्चारण दीर्घ से अधिक अर्थात् दो मात्रा से अधिक का समय लगता है, उन्हें ‘प्लुत’ कहा जाता है और उनके आगे तीन का अंक लगा दिया जाता है। शाब्दिक रूप से इसे ‘ओ३म्’ लिखना चाहिए। प्रतीकात्मक रूप से इसे एक अलग वर्ण के रूप में लिखा जाता है- “ऊँ“ जो ऊँ जैसा दिखकर भी ऊँ नहीं है। इसे गणेश की मुखाकृति या युगल लय का प्रतीक माना जाता है।

प्रश्न:     आस्तिक-नास्तिक का सामान्य अर्थ ईश्वर को मानने वाला या न मानने वाला होता है, किन्तु दर्शन में मूलतः यह विभाजन कैसे होता है ?
उत्तर:     जो वेद को माने, वह आस्तिक, जो न माने वह नास्तिक।

प्रश्न:     पाणिनि ने किसे आस्तिक और किसे नास्तिक कहा था ?
उत्तर:     जो नियति या परलोक को माने, वह आस्तिक, जो न माने वह नास्तिक।

प्रश्न:     वेद, नियति और ईश्वर इन तीनों ही दृष्टियों से एकमात्र नास्तिक दर्शन कौन है ?
उत्तर:     चार्वाक, जिसे लोकायत भी कहते हैं।

प्रश्न:     किन भारतीय दर्शनों ने ईश्वर की स्पष्ट स्वीकृति नहीं की है ?
उत्तर:     सांख्य, वैशेषिक, मीमांसा, बौद्ध, जैन, चार्वाक।
प्रश्न:     वैदिक परम्परा के किन दर्शनों को सर्वाधिक लोकप्रियता मिली ?
उत्तर:     योग व वेदान्त।

प्रश्न:     पंतजलि का योग कालांतर में कितने रूपों में विकसित हुआ ?
उत्तर:     मुख्यतः तीन-- हठयोग में (शरीर पर बल देने वाला), राजयोग (मन पर बल देने वाला) श्वास पर बल देने वाला (स्वर योग)।

प्रश्न:     वैदिक धर्म का पौराणिक धर्म में रूपांतरण किन संप्रदायों में हुआ ?
उत्तर:     शैव, शाक्त, वैष्णव तथा ब्राह्म।

प्रश्न:     वैदिक काल में देवों को पौराणिक काल में किन नये रूपों में चित्रित किया गया ?
उत्तर:     ब्रह्म-ब्रह्मा, रूद्र-शिव, मरुद्गण-हनुमान, गणपति-गणेश, मित्र व इन्द्र-विष्णु, प्रजापति व त्वष्टा-विश्वकर्मा, वरुण-जलदेवता वरुण, श्री-लक्ष्मी, नदी सरस्वती- ज्ञान की देवी सरस्वती।

प्रश्न:     जीवन के लक्ष्यों के निर्धारण में भारतीय संस्कृति जिस पुरुषार्थ सिद्धान्त को मानती है, वे क्या हैं ?
उत्तर:     धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष।

प्रश्न:     दर्शन शास्त्र के मुख्य अंग कौन-कौन हैं ?
उत्तर:     तत्वमीमांसा, ज्ञानमीमांसा, मूल्यमीमांसा और कर्ममीमांसा।

प्रश्न:     दर्शनशास्त्र में परमाणुवाद के जनक कौन माने जाते हैं ?
उत्तर:     वैशेषिक दर्शन के प्रणेता कणाद्।

प्रश्न:     भारतीय दर्शन (चार्वाक को छोड़कर) की सामान्य विशिष्टता किन सिद्धान्तों में है ?
उत्तर:     पुनर्जन्म, कर्मवाद, मोक्ष, प्रमाण विवेचन, सूत्रात्मकता, शाखपरक विकास, निवृत्तिमार्ग।

प्रश्न:     शंकराचार्य के अद्वैत वेदान्त की प्रतिक्रिया में किन प्रमुख वैष्णव वेदान्त सिद्धान्तों का प्रर्वतन हुआ था ?
उत्तर:     रामानुजाचार्य-विशिष्टाद्वैतवाद, मध्वाचार्य-द्वैतवाद, निंबार्काचार्य-द्वैताद्वैतवाद, वल्लभाचार्य-शुद्धाद्वैतवाद।

प्रश्न:     सत्व, रज और तम -- इन तीन गुणों का प्रकृति के संघटक के रूप में विभाजन करने वाला मूल दर्शन कौन है?
उत्तर:     सांख्य ।

प्रश्न:     सांख्य दर्शन के प्रकृति-पुरुष सिद्धान्त के समानान्तर विश्व में कौन सा दर्शन है ?
उत्तर:     चीन में लाओत्से का ताओ दर्शन, जहाँ इसके लिए यिन-यांग सिद्धान्त है।

प्रश्न:     प्राचीन काल में भारत के अतिरिक्त दर्शन के तीन प्रमुख केन्द्र कौन से थे ?
उत्तर:     यूनान (ग्रीक-रोमन), जहाँ सुकरात, प्लेटो, अरस्तू का सर्वप्रमुख दर्शन है और चीन, जहाँ कन्फ्यूशियस व लाओत्से का मुख्य दर्शन है।

प्रश्न:     वैदिक साहित्य कितने भागों में विभक्त है ?
उत्तर:     संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक व उनिषद् ।

प्रश्न:     सर्वाधिक प्राचीन वैदिक संहिता कौन है ?
उत्तर:     ऋग्वेद, जिसमें 10 मंडल व 1028 सूक्त हैं।

प्रश्न:     उपनिषदों को वेदान्त कहा जाता है, इस पर प्रमुख सूत्र किसका है ?
उत्तर:     बादरायण का ब्रह्मसूत्र।

प्रश्न:     मोक्ष का पहला व्यवस्थित विवेचन किसमें मिलता है ?
उत्तर:     बौद्ध दर्शन में।

प्रश्न:     बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर:     चार आर्य सत्य, द्वादश निदान, अष्टांगिक मार्ग ।

प्रश्न:     जैन दर्शन के सर्वाधिक लोकप्रिय सिद्धान्त कौन है ?
उत्तर:     नवतत्व के पंचबंधमुक्तरूप, पंचव्रत, अनेकान्तवाद, स्याद्वाद, क्षमापन।

प्रश्न:     मोक्षप्राप्ति के साधनों का ज्ञान, कर्म व भक्ति के रूप में प्रथम व्यवस्थित वर्गीकरण किसमें मिलता है ?
उत्तर:     श्रीमद्भगवद्गीता में।

प्रश्न:     भक्ति प्रधान भारतीय दार्शनिक संप्रदाय कौन हैं ?
उत्तर:     वैष्णव वेदान्त, जिसमें रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, निंबार्काचार्य, वल्लभाचार्य प्रमुख हैं।

प्रश्न:     जीवन से संबंधित भारतीय परम्परा की तीन प्रमुख व्यवस्थाएँ कौन सी हैं ?
उत्तर:     वर्ण व्यवस्था, संस्कार व्यवस्था, आश्रम व्यवस्था।

प्रश्न:     जीवन से संबंधित भारतीय परम्परा के तीन प्रमुख सिद्धान्त कौन हैं ?
उत्तर:     पुरुषार्थ, सिद्धान्त, ऋण सिद्धान्त, ऋत सिद्धान्त।

प्रश्न:     तीन ऋण कौन से हैं ?
उत्तर:     आर्ष ऋण (गुरुऋण), पितृऋण (मातृऋण सहित), देवऋण (प्राकृतिक ऋण सहित)।

प्रश्न:     जिन जटिल वैदिक यज्ञों पर पंच महायज्ञों को महानतम माना गया, वे कौन हैं ?
उत्तर:     ब्रह्मयज्ञ, पितृयज्ञ, देवयज्ञ, नृयज्ञ, भूतयज्ञ।

प्रश्न:     भारतीय दर्शन पर सर्वाधिक प्रभाव किन ग्रन्थों का रहा है ?
उत्तर:     उपनिषदों का।

प्रश्न:     अवतारवाद का प्रथम व्यवस्थित विवेचन कहाँ मिलता है ?
उत्तर:     श्रीमद्भगवद्गीता में।

प्रश्न:     श्रीमद्भगवद्गीता किस ग्रन्थ का अंक है ?
उत्तर:     महाभारत (भीष्म पर्व)।

प्रश्न:     रामायण व महाभारत में कुल कितने श्लोक हैं ?
उत्तर:     रामायण में चौबीस हजार व महाभारत में एक लाख।

प्रश्न:     वेदान्त दर्शन में जिन तीन ग्रन्थों (ब्रह्मसूत्र, उपनिषद व गीता) को प्रमुख आधार ग्रन्थ माना जाता है, उन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर:     प्रस्थानत्रयी ।

प्रश्न:     बाईबिल के परवर्ती भाग को न्यू टेस्टामेंट भी कहा जाता है इसका कौन-सा भाग सर्वाधिक प्रभावी है ?
उत्तर:     ईसा मसीह का पर्वत प्रवचन।

प्रश्न:     यहूदी, ईसाई व इस्लाम परम्परा में पैगम्बर के रूप में मान्य किन महापुरुषों ने कालान्तर में मूर्तिपूजा को स्थान दिया ?
उत्तर:     डेविड (दाउद) व सोलोमन(सुलेमान)।

प्रश्न:     गीता के निष्काम कर्मयोग से मिलता-जुलता कौन सा पाश्चात्य दर्शन है ?
उत्तर:     जर्मनी के इमैन्युअल कांट का कर्तव्य के लिए कर्तव्य सिद्धान्त।

प्रश्न:     उद्गम के अनुसार विश्व में धर्मों की तीन प्रमुख शृंखलाएँ कौन सी हैं ?
उत्तर:     भारत में हिन्दू, जैन, बौद्ध व सिख, चीन में कन्फ्यूशियस व ताओ, मध्य एशिया में यहूदी, ईसाई तथा इस्लाम। मध्य एशिया का पारसी धर्म वैदिक धर्म के बहुत समान है।

प्रश्न:     कौन-कौन से धर्म पुनर्जन्म को नहीं मानते ?
उत्तर:     मुख्यतः यहूदी, ईसाई तथा इस्लाम धर्म।

प्रश्न:     सृष्टि के उद्गम के क्रम में दो मूल स्त्री-पुरुषों, जिन्हें ईसाई व यहूदी धर्म में एडम व एव तथा इस्लाम में आदम व हव्वा कहा गया है, उनकी कथा भारतीय परम्परा में किस नाम से है ?
उत्तर:     आदिमनु व इडा (शतरूपा) के नाम से, शतपथ ब्राह्मण में।

प्रश्न:     ईसाई व यहूदी में जल प्रलय की घटना से बचाने हेतु जिन पैगम्बर नोआ व इस्लाम में नूह की कहानी है, वह भारतीय परम्परा में किस नाम से है ?
उत्तर:     वैवस्वत मनु के नाम से (आदिमनु की सातवीं पीढ़ी में)।

प्रश्न:     यहूदी, ईसाई व इस्लाम धर्म में अब्राहम द्वारा अपने दो पुत्रों इसाक व इस्माइल की युति में एक की ईश्वरादेश से बलि की कथा के समान भारतीय ग्रंथ में कौन सी कथा है ?
उत्तर:     वैदिक काल में ब्रह्मा द्वारा अपने दो पुत्रों अथर्वा व अंगिरस् में से एक की बलि का विधान और पौराणिक काल में राजा मोरध्वज द्वारा पुत्र ताम्रध्वज की बलि का विधान ।

प्रश्न:     धर्म के आधारभूत तत्व क्या हैं ?
उत्तर:     धर्मसंस्थापक या धर्माधिकारी, धर्मस्थल, धर्मग्रन्थ, अलौकिक शक्ति में आस्था और इससे दुःख मुक्ति का विश्वास।

प्रश्न:     कृष्ण व जीसस क्राइस्ट की कहानियों में क्या समानताएँ हैं ?
उत्तर:     नदी तट पर पशुपालक रूप में जीवन, शासकों द्वारा शिशुओं की हत्या का आदेश, एक साथ दो अवतारों या पैगम्बरों का एक ही परिवार में आना, जल के प्रवाह को छूकर नियंत्रित कर देना, भोजनावशेष से हजारों शिष्यों को भोजन करा देना आदि।

प्रश्न:     ध्यान-साधना की पद्धति का चरणबद्ध रूप में प्रथम व्यवस्थित वर्णन कहाँ मिलता  है ?
उत्तर:     पंतजलि में योगसूत्र में, अष्टांग योग के रूप में।

प्रश्न:     बुद्ध के चार आर्य सत्यों के योगसूत्र में किस नाम से जाना गया है ?
उत्तर:     चतुर्व्यूह (हेय, हेयहेतु, हान तथा हानोपाय)।

प्रश्न:     बौद्ध धर्म के प्रमुख संप्रदाय कौन है ?
उत्तर:     महायान (महासांघिक), हीनयान (थेरवादी), वज्रयान (तांत्रिक बौद्ध दर्शन)।

प्रश्न:     चीन में बौद्ध धर्म को ले जाने का श्रेय किसे है ?
उत्तर:     बोधिधर्म, जो बुद्ध के शिष्य महाकश्यप की सताईसवीं पीढ़ी के शिष्य हुए।

प्रश्न:     जैन धर्म के मुख्य संप्रदाय कौन हैं ?
उत्तर:     दिगम्बर (भद्रबाहु, विशाख) व श्वेताम्बर (स्थूलभद्र)।

प्रश्न:     गीता में स्थितप्रज्ञ व लोकसंग्रह का अर्थ क्या है ?
उत्तर:     स्थित प्रज्ञ अर्थात् सुख-दुःख इच्छा-द्वेष से अप्रभावित तथा लोकसंग्रह अर्थात् परोपकार या लोककल्याण।

प्रश्न:     भारत के राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न अशोक स्तंभ के नीचे ’’सत्यमेव जयते’’ वाक्य मूलतः कहाँ से लिया गया है ?
उत्तर:     मुंडकोपनिषद् से, जहाँ मूलतः ’’सत्यमेव जयति’’ लिखा है।

प्रश्न:     अहिंसा के सिद्धान्त पर बल सर्वाधिक रूप में किस धर्म में है।
उत्तर:     जैन धर्म में।

प्रश्न:     जैन-बौद्ध धर्म में क्या समानताएँ हैं ?
उत्तर:     वेद की अमान्यता, ईश्वर की अस्वीकृति, निवृत्ति मार्ग की प्रधानता, जैन पंचव्रत की बौद्ध पंचशीलों में स्वीकृति, स्वयं महावीर व बुद्ध की जीवनगाथा।

प्रश्न:     योग के ध्यान के समानान्तर जैन व बौद्ध धर्म में क्या परम्पराएँ हैं ?
उत्तर:     जैन धर्म में सामयिक तथा बौद्ध धर्म में विपश्यना।

प्रश्न:     चार्वाक में मुख्यतः वैदिक परम्परा की किन पराम्पराओं का विरोध किया ?
उत्तर:     हिंसाप्रधान यज्ञों का, अंधविश्वासों का, आध्यात्मिकता का।

प्रश्न:     जैन-बौद्ध धर्मों को सम्मिलित रूप में किस परम्परा का अंग माना जाता है ?
उत्तर:     श्रमण परम्परा।

प्रश्न:     जैन धर्म में कुल कितने तीर्थंकरों की मान्यता है ?
उत्तर:     चौबीस, जिनमें आदिनाथ (ऋषभदेव) प्रथम हैं।

प्रश्न:     जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव) के चित्रण में हिंदू संस्कृति के शिव का क्या साम्य है ?
उत्तर:     कैलास पर कैवल्य, पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान,  वृषभ का प्रतीक, समस्त ज्ञान प्रथम प्रदाता, दिगंबरत्व व पशुहिंसा पर निषेध।

प्रश्न:     जैन धर्म के लिए ’जैन’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किस ग्रन्थ में मिलता है ?
उत्तर:     जिनभद्र क्षमाश्रमण कृत विशेषावश्यक भाष्य में।

प्रश्न:     सभी धर्मों में धार्मिक व्यवस्था के क्रियात्मक आयाम कौन-कौनसे हैं ?
उत्तर:     उपासना पद्धति (प्रार्थना, ध्यान-साधना व कर्मकाण्ड), नैतिक आचार विधान, धार्मिक विधान (संस्कार, ईश्वरार्पण, तीर्थयात्रा, प्रवचन, पूजा स्थल) प्रतीक (जैसे ध्वज, माला, शिखर, वेश) पर्व-समारोह (नित्य व नैमित्तिक)

प्रश्न:     विभिन्न धर्मों के उपासना स्थलों के क्या नाम हैं ?
उत्तर:     हिन्दू -मंदिर, जैन-मंदिर व देरासर, बौद्ध-चैत्य व पैगोडा, सिख-गुरुद्वारा, यहूदी-सिनेगाग, ईसाई-चर्च, इस्लाम-मस्जिद, पारसी-अगियारी, लाओ-दाओगुआन।

प्रश्न:     वैदिक धर्म के सर्वाधिक निकट कौन सा धर्म है, जो भारत से बाहर का है ?
उत्तर:     पारसी धर्म, जो जरथुस्त्र द्वारा प्रणीत है।

प्रश्न:     ज्ञानमीमांसा पर सर्वाधिक बल किस दर्शन ने दिया ?
उत्तर:     न्याय दर्शन, जो गौतम द्वारा प्रणीत है।

प्रश्न:     तत्वमीमांसा पर भौतिक रूप से सर्वाधिक बल किस दर्शन ने दिया ?
उत्तर:     वैशेषिक दर्शन, जो कणाद् द्वारा प्रणीत है।

प्रश्न:     नाथ संप्रदाय क्या है ?
उत्तर:     यह शैव संप्रदाय की एक शाखा है, जो हठयोग पर बल देती है। गोरखनाथ इसके प्रमुखतम संत हैं।

प्रश्न:     इस्लाम के प्रमुख आधारभूत सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर:     पाँच विधान (हज, रोजा, जकात, नमाज, कलमा), मूर्तिपूजा की अस्वीकृति, मानवीय समानता।

प्रश्न:     धर्म का मूल अर्थ क्या था ?
उत्तर:     प्राचीन भारत में इसका अर्थ नैतिकता या प्राकृतिक गुण था, जो बौद्ध काल में सम्प्रदाय विशेष के लिए रूढ हो गया।

प्रश्न:     प्राचीन भारत के शिक्षा के प्रमुख केन्द्र कौन-कौन थे ?
उत्तर:     उत्तर में कश्मीर, मध्य में काशी तथा दक्षिण में कांची सर्वप्रमुख शिक्षा केन्द्र के रूप में प्रतिष्ठित थे। प्रमुख केन्द्र तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, बंग, अंग, धारा, अहिलपाटन तथा वल्लभी थे। जिममें प्रथम तीन महान विश्वविद्यालय थे।

प्रश्न:     तीन महादेवियों लक्ष्मी, सरस्वती तथा दुर्गा के मूल रूप किन विश्व संस्कृतियों में मिलते हैं ?
उत्तर:     सरस्वती की ग्रीक देवी एथेना में (ऐं सरस्वती का बीज मंत्र भी है) लक्ष्मी का चीनी-तिब्बती संस्कृति में (पदमावती रूप में जैन, बौद्ध धर्म में भी चित्रित है) काली, दुर्गा का चीनी सहस्रबाहु माता के रूप में।
प्रश्न:     बौद्ध धर्म के त्रिरत्न कौन हैं ?
उत्तर:     बुद्ध, धर्म, संघ।

प्रश्न:     शंकराचार्य के ब्रह्म-माया सिद्वान्त पर किस का प्रभाव सर्वाधिक है ?
उत्तर:     सांख्य दर्शन के प्रकृति-पुरुष सिद्वान्त तथा बौद्व विज्ञानवाद का।

प्रश्न:     शंकराचार्य ने ज्ञान, भक्ति व कर्म में श्रेष्ठ किस को माना ?
उत्तर:     ज्ञान को।

प्रश्न:     महाभारत की रचना में व्यास के उपरांत किनका प्रमुख योगदान है ?
उत्तर:     सौति और वैशम्पायन।

प्रश्न:     वेदों में सर्वाधिक वृहत और सर्वाधिक संक्षिप्त कौन है ?
उत्तर:     सर्वाधिक वृहत ऋग्वेद और सर्वाधिक संक्षिप्त सामवेद।

प्रश्न:     सामवेद सर्वाधिक अमौलिक वेद होकर भी सर्वाधिक शाखाओं वाला क्यों रहा है ?
उत्तर:     साम मूलतः गायन की परंपरा थी, अतः इसे हजार शाखाओं वाला कहा गया है। अंग्रेजी के साम (Psalm) पर भी इन की छाया है।

प्रश्न:     दार्शनिक सूत्र ग्रन्थों में सर्वाधिक विस्तृत व सर्वाधिक संक्षिप्त कौन है ?
उत्तर:     सर्वाधिक विस्तृत मीमांसासूत्र तथा सर्वाधिक संक्षिप्त योगसूत्र।

प्रश्न:     पतंजलि ने योगसूत्र के अतिरिक्त किस ग्रन्थ की रचना की है ?
उत्तर:     पाणिनि की अष्टाध्यायी पर महाभाष्य।

प्रश्न:     संस्कृत में किन वैदेशिक ऋषियों का वर्णन है ?
उत्तर:     लोमश (रोम) तथा मय (माया-अमेरिका)।

प्रश्न:     एक विशाल सांस्कृतिक राष्ट्र भारत, को ’’उत्तरं यत् समुद्रस्य, हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्ष तद् भारतं नाम, भारती तस्य संस्कृतिः।।’’ के रूप में परिभाषित कहाँ किया गया है
उत्तर:  विष्णु पुराण में।

प्रश्न:     हिन्दू सृष्टि शास्त्र में कौन सी मान्यताएं प्रतीकात्मक रूप में कुछ सीमा तक वैज्ञानिक मान्यताओं के समान हैं ?
उत्तर:  स्फोटवाद-बिग बैंग सिद्धान्त के समान, शेषनाग पर पृथ्वी-सर्पिल आकाशगंगा में पृथ्वी की स्थिति, ब्रह्मदिवस की सापेक्षता-देशकाल का सापेक्षिक सिद्धान्त, अवतारवाद-विकासवाद इत्यादि।

प्रश्न:     विश्व में प्रथम व्यवस्थित नगर संरचना व समुद्र नौकायन के साक्ष्य कहां मिलते हैं?
उत्तर:  सिन्धु घाटी सभ्यता में।
प्रश्न:   कैलाश मानसरोवर किन महत्वपूर्ण नदियों का स्रोत है ?
उत्तर:  सिन्धु एवं ब्रह्मपुत्र नदी का प्रत्यक्ष रूप में तथा गंगा नदी का अप्रत्यक्ष रूप में।

प्रश्न:     भारत में पूरब, पश्चिम, उत्तर तथा दक्षिण के अतिरिक्त उनके कोनों पर किन चार दिशाओं की मान्यता है ?
उत्तर:     पूर्वोतर कोना-ईशान (हिमाचल में ईश्वर का वास मानने से)
            पश्चिमोत्तर कोना-आग्नेय (मरूस्थलीय भाग अग्नि की तरह तपने के कारण)
            दक्षिणपूर्व कोना-वायव्य (बंगाल की खाड़ी से मानसूनी हवाएँ चलने के कारण)
            दक्षिणपश्चिम कोना-नैऋत्य (ऋत को न मानने वाली संस्कृति रहने के कारण)

प्रश्न:     ऋत सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर:     वैदिक ऋषि मानते थे कि नैतिक व प्राकृतिक व्यवस्था की संचालक एक ही शक्ति हैं, जो ऋत है। मौसम के लिए ऋतु शब्द इसी से बना है। अंग्रेजी का त्पहीजध्त्पजम शब्द का भी मूल यही है।

प्रश्न:     बुद्ध के द्वारा गृहत्याग में वृद्ध, संन्यासी, रोगी व मृतक के दृश्यों के प्रभाव के अतिरिक्त अन्य किन कारकों की भूमिका थी ?
उत्तर:     गणराज्य के कुलीनों द्वारा रोहिणी नदी जल विवाद में युद्ध अथवा देशत्याग हेतु प्रयास।

प्रश्न:     महाभारत युद्ध के समान ही उनके पूर्वजों ने कौन सा महायुद्ध लड़ा था ?
उत्तर:     दाशराज्ञ युद्ध, जिसमें कौरवों-पाण्डवों के पूर्वज सुदास ने पांच अन्य आर्य राजाओं अनु, द्रुह्यु, यदु, पुरु, तुर्वश तथा पांच अनार्य राजाओं पक्थ, शिवि, भलानस, विषाणी, अलिन के साथ दाशराज्ञ युद्ध लड़ा था।

प्रश्न:     महाभारत युद्ध 18 दिन चला था, तो रावण से राम का युद्ध कितने दिन चला था?
उत्तर:     10 दिन।
प्रश्न:     महाभारत का मूल प्रारंभिक नाम क्या था ?
उत्तर:     जय संहिता।

प्रश्न:     जिन वैदिक मंत्रों को पूजाविधान के समय कर्मकाण्ड में पढा जाता है, वे क्या मूलतः कर्मकाण्ड के मंत्र है?
उत्तर:     नहीं, वे दार्शनिक मंत्र हैं, जिनके प्रथम शब्द के आधारमात्र पर संबंधित पूजाविधान में प्रयोग किया जाने लगा।

प्रश्न:     किस संस्कृत ग्रंथ में स्पष्टतः गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत का उल्लेख है ?
उत्तर:     छठी सदी के संस्कृत खगोलविद् ब्रह्मगुप्त के ब्रह्मस्फुटसिद्धांत में।

प्रश्न:     सर्वप्रथम किसने यह सिद्ध किया कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है, ग्रहण में राहु केतु नहीं, चंद्रमा या की पृथ्वी छाया पडती है।
उत्तर:     छठी सदी के संस्कृत खगोलविद् आर्यभट ने, आर्यभटीय में।

प्रश्न:     दर्शनशास्त्र में सापेक्षिकता के सिद्धांत के कारण किस भारतीय दार्शनिकों भारत का आइंस्टीन कहा जाता है ?
उत्तर:     नागार्जुन।

प्रश्न:     जिस तरह ग्रहों के नाम पर दिनों के नाम पड़े, अंग्रेजी में यह नामकरण किस आधार पर है ?
उत्तर:     संडे, मंडे तथा सैटर्डे का नामकरण तो यथावत् क्रमशः सूर्य, चंद्र व शनि पर है, शेष चार का नाम करण जर्मनी के लोकदेवों क्रमशः ट्यू, वोडिन, थोर तथा फ्रेया के नाम पर हुआ। इनका स्वरूप भी लगभग भारतीय ग्रहों सा ही है।

प्रश्न:     गीता के कुल 18 अध्यायों में कितने श्लोक हैं ?
उत्तर:     सात सौ, जिन के आधार पर अन्य सप्तशती ग्रथों की परंपरा चल पड़ी।

प्रश्न:     भारतीय संस्कृत परम्परा में सर्वाधिक रहस्यात्मक वैज्ञानिक ग्रंथ कौन है ?
उत्तर:     भरद्वाज मुनिप्रणीत यंत्रसर्वस्व, जिस का मात्र वैमानिक रहस्य अध्याय उपलब्ध है, जिसमें वायुयान प्रणाली का विवरण है।

प्रश्न:     चार शाश्वत नगरियों (पाटलिपुत्र, उज्जैन, गया तथा काशी) में अविमुक्त क्षेत्र कौन है ?
उत्तर:     काशी।

प्रश्न:     सभी धर्मों के प्रवर्तक है, जैसे यहूदी धर्म के मूसा, ईसाई धर्म के ईसा मसीह, इस्लाम धर्म के हजरत मुहम्मद, जैन धर्म के वर्द्धमान महावीर, बौद्ध धर्म के गौतमबुद्ध, पारसी धर्म के जरथुस्त्र, ताओ धर्म के लाओत्से, कन्फ्यूशियस धर्म के कन्फ्यूशियस, तो हिन्दू धर्म के प्रवर्तक कौन है ?
उत्तर:     हिन्दू धर्म के प्रवर्तनात्मक न होकर विकासात्मक है, जिसमें अनेक ऋषियों व मतों का समन्वय है। इस रूप में यह व्यवस्था में सर्वाधिक लोकतांत्रिक तथा विचारों में उदारवादी धर्म रहा है। जापान का शिन्तो धर्म भी ऐसा ही है।

प्रश्न:     मोक्ष के कितने वर्गीकरण है ?
उत्तर:     जीवन्मुक्ति तथा विदेहमुक्ति (जीवन के आधार पर)
            सद्यःमुक्ति तथा क्रममुक्ति (प्राप्ति के आधार पर)

प्रश्न:     गाँधीजी ने ट्रस्टीशिप (न्यासिता) का सिद्धान्त किस दर्शन या ग्रंथसे लिया था ?
उत्तर:     ईशावास्योपनिषद।

प्रश्न:     सर्वाधिक प्राचीन दो उपनिषद् कौन है ?
उत्तर:     छांदोग्य तथा वृहदारण्यक।

प्रश्न:     किस ग्रंथ में कहा गया है कि जो धर्म दूसरे को बाधित करता है वह धर्म नहीं कुधर्म है ?
उत्तर:     महाभारत।

प्रश्न:     जिस प्रकार पुराणों के साथ उपपुराण हैं, वेदों के उपवेद क्या हैं ?
उत्तर:     ऋग्वेद का धनुर्वेद
            सामवेद का गंधर्ववेद
            अथर्ववेद का आयुर्वेद
            यजुर्वेद का शिल्पवेद या स्थापत्यवेद

प्रश्न:     विश्व में शल्य चिकित्सा के जनक कौन माने जाते हैं ?
उत्तर:     सुश्रुत, जिनकी सुश्रुत संहिता प्रसिद्ध है।

प्रश्न:     वेदांग क्या हैं ?
उत्तर:     वैदिक ग्रन्थों के अध्यय व वैदिक परंपराओं के पालन हेतु पठनीय विषय। ये छः हैं - शिक्षा, छन्द, निरुक्त, ज्योतिष, व्याकरण और कल्प।

प्रश्न:     बौद्ध धर्म के त्रिपिटकरूप तीन प्रमुख ग्रंथ कौन हैं ?
उत्तर:     सूत्र पिटक, विनय पिटक, अभिधर्म पिटक।

प्रश्न:     जैन धर्म के प्रमुख ग्रंथ कौन है ?
उत्तर:     12 अंग, 16 पर्व, छेदिसूत्र, नंदिसूत्र।

प्रश्न:     हिन्दू परम्परा के प्रमुख पर्व कौन है?
उत्तर:     होली, दीपावली, दशहरा, रक्षाबंधन, रामनवमी, जन्ममाष्टमी, शिवरात्रि, नवरात्रि, मकर संक्रांति, बैशाखी, ओणम, पोंगल।

प्रश्न:     अन्य धर्मों की संस्कृतियों के प्रमुख पर्व कौन है?
उत्तर:     ईसाई:- क्रिसमस, गुड फ्राइडे, इस्टर, न्यू इयर
            इस्लाम:- ईद, बकरीद, शबे-बरात, मोहर्रम, ईद मिलादुन्नवी
            जैन:- महावीर जयंती, दीपावली, संवत्सरी
            बौद्ध:- बुद्ध पूर्णिमा, उपोसथ, उलंबन
            सिक्ख:- गुरु नानक जयंती, वैसाखी, माघी, अन्य गुरु जयन्ती,
            पारसी:- नौरोज, गहम्बर, खोरदार साल
            यहूदी:- सबथ, रोश, हाशना, मोम किपूर, सुकोत

प्रश्न:     हिन्दू परंपरा के समस्त पर्व त्यौहार मूलतः चान्द्र मास से निर्धारित होते है, सौरमास से निर्धारित होने वाला मुख्य पर्व कौन है?
उत्तर:     मकर संक्रांति व वैशाखी, यही दो पर्व है, जो लगभग संपूर्ण भारत में अलग-अलग नाम से मनाए जाते है।

प्रश्न:     गायत्री मंत्र का मूल अर्थ क्या है और यह किस वेद में है?
उत्तर:     यह ऋग्वेद के तृतीय मंडल में है, जिसका मूल अर्थ है- हम भू लोक, भुवःलोक तथा स्वर्गलोक तीनों के प्रकाशक श्रेष्ठ भर्गदेव (सविता या सूर्य रूप ब्रह्म) का ध्यान करते है, वे हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।

 

प्रश्न:     क्या गायत्री मंत्र में किसी देवी की उपासना है?
उत्तर:.    नहीं, गायत्री मूलतः ऋग्वेद के छंद का एक रूप है, जैसे हिन्दी में दोहा या चैपाई होती है। इसमें चार चरणों में कुल 24 अक्षर होने चाहिए, किन्तु इस गायत्री मंत्र में एक वर्ण कम होने से इसे निचृद् गायत्री छंद कहा गया। बाद में श्रद्धा के आधार पर कुछ पौराणिक काल के विचारकों ने गायत्री छंद को देवी मान लिया।

प्रश्न:     चार वेदों में त्रयी किसे कहा जाता है और वेद विभाजनकर्ता किसे माना जाता है?
उत्तर:     ऋचा (पद्यरूप) यजुष् (गद्यरूप) तथा साम (गीतिरूप) इनके आधार पर ऋंग्वेद, यजुर्वेद तथा सामवेद को त्रयी में सम्मिलित करने की परंम्परा है।

प्रश्न:     अथर्ववेद को त्रयी में सम्मिलित क्यों नहीं किया जाता है?
उत्तर:     अथर्ववेद रचनाकाल में अन्य तीन वेदों के बाद का है और उसकी विषयवस्तु में आध्यात्मिक पक्ष बहुत कम है, अतः उसके पद्यात्मक होने के बावजूद त्रयी में स्वतंत्र नहीं रखा गया है।

प्रश्न:     रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है?
उत्तर:     देवताओं के पूजन के साथ धार्मिक सुरक्षा विधान के रूप में धागे बाँधने की परंपरा प्राचनीकाल से रही है। प्रारंभ में इसे पुरोहित या कोई भी परिजन बाँध सकता था। युद्धकाल में बहनों को ब्राह्मण तुल्य या देवी तुल्य मानते हुए उनसे रक्षासूत्र बँधवाने की परंपरा पड़ी। कालांतर में नारीसुलभ कलात्मकता के कारण रक्षासूत्र सुन्दरतर होते गए।

प्रश्न:     चार पुरुषार्थ में त्रिवर्ग कौन है?
उत्तर:     धर्म, अर्थ और काम। वेद मूलतः त्रिवर्गात्मक है, वेदान्त का उपनिषद् मोक्षपरक है।

प्रश्न:     दुःखों का वर्गीकरण कितने रूपों में किया जाता है?
उत्तर:     आधिदैविक (नियतिजन्य दुःख), आध्यात्मिक ( मानसिक दुःख तथा जरा, व्याधि या विकलांगता जन्य दैहिक दुःख), आधिभौतिक (भौतिक कारकों और द्रव्यों से उत्पन्न दुःख)।

प्रश्न:     धर्म के कितने पक्ष होते है और धार्मिक विवाद के क्या कारण है?
उत्तर:     आध्यात्मिक, नैतिक तथा साम्प्रदायिक। इसमें आध्यात्मिक व नैतिक पक्ष पर विवाद नगण्य है, केवल विधानों व मान्यताओं के साम्प्रदायिक पक्ष पर संघर्ष हो जाते है, जो कि मूलतः धर्म का केन्द्रीय नहीं, बाह्य भाग है।

प्रश्न:     भारतीय हिंदू देवताओं का दार्शनिक विभाजन किस रूप में होता है?
उत्तर:     तीन वर्गों में। प्रथम, आजान देवता, जो ऐतिहासिक कम, मिथकीय अधिक हैं जैसे ब्रह्मा, विष्णु, शिव, काली, लक्ष्मी, सरस्वती आदि। द्वितीय- अधिष्ठातृ देवता, जो लोकपाल, दिकपाल, क्षेत्रपाल या कुलदेवी आदि की तरह स्थान क्षेत्र के देवता माने जाते है। तृतीय- मर्त्य देवता, जो ऐतिहासिक है और जिनका मानव की तरह जन्म मरण हुआ है। परंपरा इन्हें अवतार रूप भी मानती है. ऐसे देवों में राम, कृष्ण आदि आते है।

प्रश्न:     सरस्वती नदी कहाँ बहती थी?
उत्तर:     ऋग्वेद में सर्वाधिक प्रतिष्ठित नदी सरस्वती है, जिसका उल्लेख 75 बार किया गया है। इस विलुप्त हो चुकी नदी को सिंधु-हकरा नदी के लगभग 200 किमी0 पूरब समानांतर में माना जाता है, किन्तु इसकी पुष्टि शेष है।

प्रश्न:     ध्रुवतारा क्या है और किधर होता है?
उत्तर:     ध्रुवतारा पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में पृथ्वी के घूर्णन अक्ष की सीध में है, इसलिए कभी स्थान नहीं बदलता। मिथकों में राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव के दृढ़संकल्प के नाम पर इसका नामकरण हुआ।

प्रश्न:     इंद्रियाँ कितनी है और कौन कौन है?
उत्तर:     पाँच ज्ञानेन्द्रिय (आँख, कान, नाक, जिह्वा, त्वचा)
            पाँच कर्मेन्द्रिय (हाथ, पैर, मुख, पायु, उपस्थ)
            मन को अंतरीन्द्रिय व बाह्येन्द्रिय दोनों माना जाता है।

प्रश्न:     पंचतत्व कौन है और उनकी पंचेंद्रियों व पंच तन्मात्र से क्या संबंध है?
उत्तर:     पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि व आकाश पंचतत्व हैं। इनमें पृथ्वी का नाक व गंध से, जल का जिह्वा व स्वाद से, वायु का शब्द व कान से, अग्नि का तेज व व आँख से, आकाश का शब्द व त्वचा से संबंध है।

प्रश्न:     सप्तलोक का मिथकीय विभाजन क्या है ?
उत्तर:     सत्यलोक, तपलोक, जनलोक, महर्लोक, स्वर्लोक, भुवर्लोक, भूलोक
            यह विभाजन वायुमण्डल के सात वैज्ञानिक विभाजनों  के समान होते हुए भी मूलतः आध्यात्मिक आधार पर है।

प्रश्न:     सप्तपाताल का मिथकीय विभाजन क्या है ?
उत्तर:     अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल
            यह विभाजन मूलतः पृथ्वी के आन्तरिक भाग के सात वैज्ञानिक विभाजनों  के समान होते हुए भी मूलतः धार्मिक मान्यता आधार पर है।

प्रश्न:     सप्तसागर का मिथकीय विभाजन क्या है ?
उत्तर:     जल, लवण, इक्षु, क्षीर, सुरा, दधि, दुग्ध सागर।
            यह विभाजन मूलतः सागर के क्षारीयता व अम्लीयता के प्रतीकात्मक भेद के आधार पर है।

प्रश्न:     सप्तद्वीप का मिथकीय विभाजन क्या है ?
उत्तर:     जम्बू, प्लक्ष, शाल्मली, कुश, क्रौंच, शाक, पुष्कर द्वीप
            यह विभाजन मूलतः इस द्वीपों में पायी जाने वाली प्रमुख वनस्पतियों के आधार पर है।

प्रश्न:     सप्तर्षि कौन हैं ?
उत्तर:     प्रारंभिक काल में जिन सात ऋषियों का दार्शनिक सिद्धान्त प्रतिवादन या गोत्रानुसार कुल संस्थापन में महत्व था, उन्हें सप्तर्षि कहते है। इनके नाम हैं - वसिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, अत्रि, गौतम, जमदग्नि व भरद्वाज। कुछ सूचियों में भृगु व कश्यप भी हैं।

प्रश्न:     संगीत के सप्त स्वर कौन-कौनसे हैं ?
उत्तर:     षडज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद, जिन्हें संक्षेप में सा,रे,ग,म,प,ध,नि कहा जाता है।

प्रश्न:     हिन्दू सम्प्रदायों में सबसे पुराना सम्प्रदाय किसे माना जाता है और किस आधार पर माना जाता है?
उत्तर:     किसी सम्प्रदाय की प्रकृति, उसके देवता का स्वरूप और उसे भोग लगाई जाने वाली मुख्य सामग्री के आधार पर प्राचीनता का अनुमान लगाया जाता है। शिव को अकृष्य युग की वस्तुएँ अधिक चढ़ाई जाती है, इसका तात्पर्य यह है कि शैव सम्प्रदाय सर्वाधिक आदिम है, क्योंकि वह मानव सभ्यता के विकास के आहार संग्राहक युग का है। शाक्त सम्प्रदाय में बलि चढ़ाई जाती रही है, इसका तात्पर्य है, वह मानव के अगले आखेटक चरण का है। वैष्णव सम्प्रदाय में कृषि-पशुपालन के समय की सामग्री चढ़ती है, अतः वह सर्वाधिक अर्वाचीन है।

प्रश्न:     क्या प्राचीन हिन्दू परम्परा में आर्येतर संस्कृतियों का भी प्रभाव है ?
उत्तर:     हाँ। सहस्राब्दियों से आर्य, द्रविड, शक, पहलव, हूण, कुषाण, आदि आते रहे और इसी में विलीन होते रहे। लक्ष्मी मूलतः यक्ष संस्कृति की देवी मानी जाती है, जो हिन्दू व जैन, बौद्ध धर्म तक समाहित हुई। सूर्य के चित्रण में शक, पहलव परम्परा का प्रभाव है। दीपावली में लक्ष्मी की अमावस्या की रात्रि में उपासना व वाहन उल्लू का होना सिद्ध करता है कि यह तांत्रिकों की भी देवी थी।

प्रश्न:     वर्ण व्यवस्था से क्या वर्णश्रेष्ठता निर्धारित होती है ?
उत्तर:     पुरातन सामाजिक व्यवहार में ऐसा भेद शेष होने पर भी सिद्धान्त में ऐसा भेद संभव नहीं, क्योकि ऐसा मानव भेद आध्यात्मिकता व नैतिकता के विरूद्ध है। वैज्ञानिक रूप से मानव की केवल तीन मूल प्रजातियाँ हैं - काकेशायड - श्वेत, गौर वर्ण के भूरे-सुनहरे लाल बालों वाली प्रजाति, नीग्रोयड-काले रंग की काले घुंघराले बालों वाली आदिमतम प्रजाति, मंगोलायड- पीताभ या रक्ताभ गौर वर्ण की लगभग खडे़ बालों वाली प्रजाति।
                        यह अवश्य है कि सारे संसार में ऐतिहासिक क्रम में श्रम विभाजन के साथ पुराहित, सैनिक, व्यापारी और श्रमिक वर्ग रहे हैं, जिन्हें भारत में क्रमशः ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र मान लिया गया। मानवता का जन्मगत विभाजन सर्वथा अनैतिक है।

प्रश्न:     युग और कल्प का काल विभाजन क्या है ?
उत्तर:     परम्परा में सृष्टि को समयानुसार चार कालखंडों में विभाजित किया गया है - सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग। चार युगों का एक कल्प होता है।

प्रश्न:     परम्परा के नवग्रहों में वैज्ञानिक विभाजन से क्या अंतर है ?
उत्तर:     परम्परा के नवग्रह हैं - सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु तथा केतु। ये मूलतः मानव जीवन पर प्रभाव के आधार पर परिगणित थे। वर्तमान परिभाषानुसार जो सूर्य का चक्कर लगाते हैं, वही ग्रह हैं। अतः इसमें सूर्य तारा है, चन्द्र उपग्रह है, तथा राहु और केतु मात्र ग्रहणपरक छाया हैं।

प्रश्न:     धर्म और विज्ञान में विरोध की स्थिति में क्या करें ?
उत्तर:     हर युग में कोई न कोई विज्ञान रहा है, जो अपने प्रयोगों के आधार पर सिद्धान्त प्रतिपादित करता रहा है। प्राचीन काल में प्रायः समस्त विषय धर्म या दर्शन के अन्तर्गत ही पढ़ाए या सीखे जाते थे। कालांतर में अलग-अलग विषय स्वतंत्र हो गए। धर्म का क्षेत्र मुख्यतः आध्यात्मिक, मध्यमतः नैतिक तथा गौणतः कर्मकाण्डीय या साम्प्रदायिक हैं। यह दुःखद है कि धर्म के गौण पक्ष को ही अनेक लोग प्रधान मानकर संघर्ष करते हैं। सांसारिक क्षेत्र में वैज्ञानिक सत्यों को तथ्य मानते हुए वरीयता दी जानी चाहिए, किन्तु यह भी स्वीकार करना चाहिए कि विज्ञान के सत्य भी सदा अंतिम नहीं होते, अगले शोध से खंडित हो सकते हैं।

प्रश्न:     अवतारवाद क्या है ?
उत्तर:     धर्म के संस्थापन या रक्षा के लिए लगभग प्रत्येक धर्म में पैगम्बर या ईश्वर के अवतरण की कल्पना है। ईश्वर के स्वयं अवतरण की कल्पना केवल हिन्दू धर्म में है। अलग-अलग गं्रथें में अवतारों की संख्या अलग-अलग है, किन्तु सर्वाधिक प्रसिद्धि जिन दस अवतारों को मिली, वे निम्न हैं - मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, बलराम, बुद्ध, कल्कि।
                        चूंकि यह सूची मूलतः कृष्णभक्त वैष्णवों की है अतः इसमें कृष्ण को स्वयं विष्णु ही मानते हुए अलग रखा गया है।

प्रश्न:     क्या अवतारवाद का डार्विन विकासवाद से विरोध है ?
उत्तर:     नहीं, अपितु एक स्तर पर यह उसका समर्थन ही करता है, तथा उसके आगे सामाजिक विकासवाद को भी दिखाता है। नरसिंह से पूर्व में समस्त अवतार पशु है, जो क्रमशः जलचर, उभयचर व थलचर रूप में हैं। नरसिंह मानव व पशु का उभय रूप है उसके आगे का विकास क्रमशः मानव के दो पैरों पर चलने, पाषाण युग में प्रवेश करने, आखेटक युग से कृषि व पशुपालन युग से होते हुए राजतंत्र व सिद्ध की अवस्था तक पहुँचने का संक्षिप्त प्रतीकात्मक चित्रण भी है।

प्रश्न:     सप्त देवियों की कल्पना कहाँ-कहाँ रही है ?
उत्तर:     वैष्णव शाक्त परम्परा में सप्त घृत माताएँ - श्री लक्ष्मी, धृति, सरस्वती, मेघा, श्रद्धा, पुष्टि
            मिस्र में - मात, मुट, आईसिस, हाथोर, बास्तेत व साखनेत
            ग्रीस में - माइया, इलेक्ट्रा, टेगेर, एल्सीयोन, सीलेनो, स्टीरोप तथा मेरोप
            प्राक् इस्लामिक अरब में - अल लात, अल मनात, अल उज्जा, ननाया, तियामत, कुबाबा, निनलील
            तंत्र में - डाकिनी, राकिनी, लाकिनी, काकिनी, शाकिनी, हाकिनी, सहस्राकिनी
            राजस्थान में लोकदेवी- आवण, नागणीची, आशापुरा, खीनाज, बन, लुद्र व सुंधा
            राजस्थान में करणी माता- करणी, आधी, शेषी, गेहल, हुली, रूपाली व लांगदे

प्रश्न:     बारह राशियाँ कौन-कौनसी हैं ?
उत्तर:     ये सूर्य के सापेक्ष घड़ी के डायल की तरह पृथ्वी के भ्रमण पथ में आने वाले नक्षत्र समूहों का 12 वर्ग में विभाजन है - मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन।

प्रश्न:     ज्योतिष में कुण्डली मिलान में कुल कितने गुण होते है ?
उत्तर:     36 गुण जो मूलतः अष्टकूट (वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रहमैत्री, गण, भकूट तथा नाडी) के निर्धारित अंकों का योग होता है।

प्रश्न:     जिस प्रकार अथर्ववेद में जादू-टोना, तंत्र-मंत्र का उल्लेख है उसी प्रकार यजुर्वेद में किन विषयों का उल्लेख किया गया है।
उत्तर:     मुख्यतः यज्ञ का।
प्रश्न:.    प्राचीन भारतीय दर्शन में जो दर्शन वेदों को प्रमाणिक नहीं मानता है, उसे नास्तिक दर्शन कहते हैं। तीन नास्तिक भारतीय दर्शनों का नाम लिखे।

प्रश्न:     शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय तथा ईश्वर प्रणिधान को सामूहिक रूप से योग दर्शन में किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:     नियम।

प्रश्न:     न्याय दर्शन के अनुसार प्रत्येक ज्ञान के लिये चार पक्षों का होना आवश्यक है--
1. ज्ञान प्राप्त करने वाला- प्रमाता,
2. जिसका ज्ञान प्राप्त करना है- प्रमेय,
3. ज्ञान प्राप्त करने का साधन- प्रमाण
और
4. ज्ञान।
इसमें ज्ञान को क्या कहते हैं ?
उत्तर:     प्रमा।

प्रश्न:     न्याय और वैशेषिक दर्शन जगत् की उत्पत्ति परमाणुओं से मानते हैं। जगत् की उत्पत्ति में ये दर्शन उपादान कारण एवं निमित्त कारण किसे मानते हैं?
उत्तर:     असत्कार्यवाद.

प्रश्न:     सांख्य दर्शन द्वैतवादी दर्शन माना जाता है, जिसके अनुसार जगत् के आधार स्वरूप दो तत्व है। इन दोनों तत्वों का नाम लिखें।
उत्तर:     प्रकृति और पुरुष.

प्रश्न:     महर्षि बादरायण द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र पर भाष्य आचार्य शंकर ने लिखा है। आचार्य शंकर ने किन अन्य दो महत्वपूर्ण ग्रंथों पर भाष्य लिखा ?
उत्तर:     उपनिषद् और गीता।

प्रश्न:     भारतीय दर्शन में किस दर्शन को सर्वोपकारी कहा गया है?
उत्तरः    योग दर्शन।

प्रश्न:     श्रीमद् भगवद्गीता ने किसके लिये कहा गया है - ’उसे शस्त्र काट नहीं सकता, अग्नि उसे जला नहीं सकती, जल उसे गीला नहीं कर सकता और वायु उसे सुखा नहीं सकती।
उत्तर:     आत्मा के लिए।

प्रश्न:     महर्षि पंतजलि रचित योगसूत्र में क्रियायोग क्या है?
उत्तर:     तप, स्वाध्याय व ईश्वरप्रणिधान, जो मूलतः कर्म, ज्ञान व भक्ति मार्ग की तत्कालीन प्रचलित विधाओं के नाम हैं।

प्रश्न:     महर्षि पतंजलि रचित योगसूत्र चार भागों में विभक्त है। इन भागों को किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:     समाधिपाद, साधनपाद, विभूतिपाद, कैवल्यपाद।

प्रश्न:     बौद्ध दर्शन के अनुसार इस जगत् सब कुछ क्षणिक, परिवर्तनशील और नश्वर है। बौद्ध दर्शन के इस सिद्धान्त को किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:     क्षणभंगवाद।

प्रश्न:     जैन धर्म को व्यवस्थित रूप देने का श्रेय चौबीसवें तीर्थकर भगवान महावीर को जाता है। जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर कौन थे ?
उत्तर:     पार्श्वनाथ।

प्रश्न:     वेद के दो मुख्य भाग हैं - कर्म प्रधान भाग और चिन्तन प्रधान भाग (वेदान्त) वेद के कर्म प्रधान भाग से कौन सा दर्शन सम्बन्धित है ?
उत्तर:     मीमांसा।

प्रश्न:     योग दर्शन के अनुसार योग के आठ क्रमिक अंग हैं। इस अष्टांग योग का अंतिम अंग समाधि है। समाधि के दो प्रकार कौन से हैं ?
उत्तर:     संप्रज्ञात व संप्रज्ञात।

प्रश्न:     आचार्य रामानुज ने नास्तिक धर्म के प्रचार से संकटग्रस्त धर्म को सुदृढ़ करने हेतु वैष्णव मत के एक नये दर्शन की आधारशिला रखी। इस दर्शन संप्रदाय को किस नाम से जाना जाता है ?

उत्तर:     श्री संप्रदाय।

प्रश्न:     आचार्य वल्लभ ने एक नवीन दर्शन के साथ-साथ एक नवीन संप्रदाय की स्थापना की। इस संप्रदाय को किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:     पुष्टिमार्ग।

प्रश्न:     भारतीय दर्शनों में कौन-सा दर्शन देहात्मवाद में विश्वास करता है ?
उत्तर:     चार्वाक।

प्रश्न:     सांख्य दर्शन के अनुसार कार्य अपने कारण में पहले से ही विद्यमान हैं। जैसे मिट्टी से घट की उत्पत्ति इसलिये होती है क्योंकि मिट्टी में घट पहले से ही अव्यक्त रूप से विद्यमान है। सांख्य के इस सिद्धान्त को किस नाम से जानते हैं ?
उत्तर:     सत्कार्यवाद।

प्रश्न:     जैन दर्शन सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र की शिक्षा देता है। इन तीनों को सामूहिक रूप से क्या कहा जाता है ?
उत्तर:     त्रिरत्न।

प्रश्न:     किस पुराण में ईसा मसीह व हजरत मुहम्मद का उल्लेख है?
उत्तर:     भविष्य पुराण।

प्रश्न:     मरणोपरांत जिस गरुड पुराण का पाठ किया जाता है, क्या वह इसी से संबंधित है।
उत्तर:     मरणोपरांत गरुड पुराण के प्रेत खण्ड का पाठ किया जाता है, जो इस पुराण का परिशिष्ट भाग है। पुराण के प्रारम्भ की विषय सूची में इस खण्ड का उल्लेख न होने तथा ग्रंथ की समाप्ति के माहात्म्य के उपरान्त पुनः आने के कारण इसे विचारक प्रक्षिप्त मानते हैं।

प्रश्न:     सूत्र क्या हैं ?
उत्तर:     सामान्य अर्थ में सूत्र का शाब्दिक अर्थ धागा या रस्सी होता है। परंतु एक पारिभाषिक शब्द के रूप में सूत्र साहित्य में छोटे-छोटे किन्तु सारगर्भित वाक्य होते हैं जो आपस में भलीभांति जुड़े होते हैं। इनमें प्रायः पारिभाषिक एवं तकनीकी शब्दों का निदर्शन किया जाता है, ताकि गूढ से गूढ बात भी संक्षेप में किन्तु स्पष्टता से कही जा सके। भारतीय संस्कृति में अनेक धार्मिक एवं दार्शनिक ग्रंथों को सूत्र के रूप में व्यक्त करने की परंपरा रही है. धर्म अर्थ काम और मोक्ष सभी पुरुषार्थों से जुड़े विषयों पर सूत्रात्मक ग्रंथ लिखे गए.

प्रश्न:     दस महविद्याएँ क्या हैं ?
उत्तर:     वैष्णव परंपरा के 10 अवतारों की भाँति शाक्त परंपरा में 10 देवियों की परिकल्पना है, जिन्हें 10 महाविद्याओं के रूप में परिगणित किया जाता है. महविद्याएँ तान्त्रिक प्रकृति की मानी जातीं हैं, जो निम्न हैं-

  • काली
  • तारा
  • छिन्नमस्ता
  • षोडशी
  • भुवनेश्वरी
  • त्रिपुरभैरवी
  • धूमावती
  • बगलामुखी
  • मातंगी
  • कमला

प्रश्न:     छ: ऐश्वर्य  क्या हैं ?
उत्तर:     ईश्वर को, विशेषत: वैष्णव धर्म में, षड् ऐश्वर्य युक्त माना गया है।  ये छ: ऐश्वर्य क्या हैं, इस पर सर्वसहमति नहीं है। मोटे तौर पर ये निम्नानुसार माने जाते हैं-
तन- रूप, बल
मन- ज्ञान, धर्म
धन- संपत्ति, यश

प्रश्न:     तीन लोक कौन हैं?
उत्तर:  वैदिक काल में तीन लोक
भूलोक या पृथ्वी लोक
भुव: लोक या अंतरिक्ष लोक
स्वर्लोक या द्युलोक
कालांतर में क्रमशः धरती, आकाश व पाताल लोक को तीन लोक मान लिया गया. वैदिक काल में पाताल लोक नहीं है। वहाँ भुव: लोक या अंतरिक्ष लोक वस्तुतः भूलोक और स्वर्लोक के बीच का स्थान है.

प्रश्न:     छ: पारमिताएँ क्या हैं ?
उत्तर:     बौद्ध धर्म में 'परिपूर्णता' या कुछ गुणों का चरमोन्नयन की स्थिति को पारमिता या पारमी (पालि) कहा गया है। बौद्ध धर्म में साधकों के लिए इन गुणों का विकास आवश्यक है। महायान ग्रन्थों में छः पारमिता की गणना मिलती है-

  • दान पारमिता
  • शील पारमिता
  • क्षान्ति पारमिता
  • वीर्य पारमिता
  • ध्यान पारमिता
  • प्रज्ञा पारमिता

दशभूमिकासूत्र में निम्नलिखित चार पारमिता भी गिनायी गयीं हैं-
7. उपाय पारमिता
8. प्राणिधान पारमिता
9. बल पारमिता
10. ज्ञान पारमिता

प्रश्न:     भारतीय परंपरा के बारह मास कौन हैं और उनका नक्षत्रों से क्या संबंध है?
उत्तर: 

महीनों के नाम

पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा इस नक्षत्र होता है

चैत्र

चित्रा, स्वाति

वैशाख

विशाखा, अनुराधा

ज्येष्ठ

ज्येष्ठा, मूल

आषाढ़

पूर्वाषाढ़, उत्तराषाढ़

श्रावण

श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा

भाद्रपद

पूर्वभाद्र, उत्तरभाद्र

आश्विन

रेवती, अश्विन, भरणी

कार्तिक

कृतिका, रोहणी

मार्गशीर्ष

मृगशिरा, आर्द्रा

पौष

पुनवर्सु, पुष्य

माघ

अश्लेषा, मघा

फाल्गुन

पूर्व फाल्गुन, उत्तर फाल्गुन, हस्त

प्रश्न:     तिथियों के नाम क्या हैं
उत्तर:     तिथियों के नाम निम्न हैं- पूर्णिमा (पूरनमासी), प्रतिपदा (पड़वा), द्वितीया (दूज), तृतीया (तीज), चतुर्थी (चौथ), पंचमी (पंचमी), षष्ठी (छठ), सप्तमी (सातम), अष्टमी (आठम), नवमी (नौमी), दशमी (दसम), एकादशी (ग्यारस), द्वादशी (बारस), त्रयोदशी (तेरस), चतुर्दशी (चौदस) और अमावस्या (अमावस)।

प्रश्न:     तिथिवार चंद्रमा के कलाओं के नामकरण क्या हैं?
उत्तर:     तिथिवार चंद्रमा के कलाओं का नामकरण कुछ इस प्रकार है:-

  1. अमृता
  2. मानदा
  3. पूषा
  4. तुष्टि
  5. पुष्टि
  6. रति
  7. धृति
  8. शशिनी
  9. चन्द्रिका
  10. कान्ति
  11. ज्योत्स्ना
  12. श्री
  13. प्रीतिरङ्गा
  14. पूर्णा या पूर्णामृता
  15. स्वरजा (अमा) और
  16. अंगदा (पूर्णिमा)

प्रश्न:     छ:  ऋतुएँ क्या हैं?

उत्तर:    

ऋतु

हिन्दू मास

ग्रेगरियन मास

वसन्त (Spring)

चैत्र से वैशाख (वैदिक मधु एवं माधव)

मार्च से अप्रैल

ग्रीष्म (Summer)

ज्येष्ठ से आषाढ (वैदिक शुक्र एवं शुचि)

मई से जून

वर्षा (Rainy)

श्रावन से भाद्रपद (वैदिक नभः एवं नभस्य)

जुलाई से सितम्बर

शरद् (Autumn)

आश्विन से कार्तिक (वैदिक इष एवं उर्ज)

अक्टूबर से नवम्बर

हेमन्त (pre-winter)

मार्गशीर्ष से पौष (वैदिक सहः एवं सहस्य)

दिसम्बर से 15 जनवरी

शिशिर (Winter)

माघ से फाल्गुन (वैदिक तपः एवं तपस्य)

16 जनवरी से फरवरी

स्पष्टतः वैदिक मासों का नामकरण अलग है, पर छ:  ऋतुएँ पर यथावत हैं.

प्रश्न:     राशियाँ क्या हैं?
उत्तर:     राशियाँ राशिचक्र के उन बारह बराबर भागों को कहा जाता है जिन पर ज्योतिष आधारित है। यदि पृथ्वी, सूरज के केन्द्र और पृथ्वी की परिक्रमा के तल को चारो तरफ ब्रह्मांड में फैलायें, तो यह ब्रह्मांड में एक तरह की पेटी सी बना लेगा। इस पेटी को हम १२ बराबर भागों में बांटें तो हम देखेंगे कि इन १२ भागों में कोई न कोई तारा समूह आता है। हमारी पृथ्वी और ग्रह, सूरज के चारों तरफ घूमते हैं या इसको इस तरह से कहें कि सूरज और सारे ग्रह पृथ्वी के सापेक्ष इन १२ तारा समूहों से गुजरते हैं। यह किसी अन्य तारा समूह के साथ नहीं होता है इसलिये यह १२ महत्वपूर्ण हो गये हैं। इस तारा समूह को हमारे पूर्वजों ने कोई न कोई आकृति दे दी और इन्हे राशियां कहा जाने लगा। हर राशि सूरज के क्रांतिवृत्त (ऍक्लिप्टिक) पर आने वाले एक तारामंडल से सम्बन्ध रखती है और उन दोनों का एक ही नाम होता है - जैसे की मिथुन राशि और मिथुन तारामंडल। यह बारह राशियां हैं -

  1. मेष राशि
  2. वृष राशि
  3. मिथुन राशि
  4. कर्क राशि
  5. सिंह राशि
  6. कन्या राशि
  7. तुला राशि
  8. वॄश्चिक राशि
  9. धनु राशि
  10. मकर राशि
  11. कुम्भ राशि
  12. मीन राशि

ज्योतिष में राशियाँ चार तत्वों से संबंधित हैं:
अग्नि: मेष, सिंह, धनु
पृथ्वी: वृष, कन्या, मकर
वायु: मिथुन, तुला, कुंभ
जल: कर्क, वृश्चिक, मीन

ज्योतिष में राशियाँ निम्नानुसार वर्णित और निर्देशित होती हैं:

क्र सं

राशि नाम

अग्रेजी नाम/ प्रतीक 
चिन्ह

राशि स्वामी

राशि वर्ण

अक्षरों से आने वाले नाम

1

मेष

Aries (Ram)

मंगल

क्षत्रिय

 चू , चे, चो, ला, ली, लू , ले, लो, अ

2

वॄष

Taurus (Bull)

शुक्र

वैश्य

ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू , वे, वो

3

मिथुन

Gemini (Twins)

बुध

शूद्र

का, की, कू , घ, ड़ छ, के, को, हा

4

कर्क

Cancer (Crab)

चंद्रमा

ब्राह्मण

ही, हू , हे, हो, डा, डी, डू , डे, डो

5

सिंह

Leo (Lion)

सूर्य

क्षत्रिय

मा, मी, मू , मे, मो, टा, टी, टू , टे

6

कन्या

Virgo (Virgin)

राहु

वैश्य

टो, पा, पी, पू , ष, ण, ठ, पे, पो

7

तुला

Libra (Scale)

शुक्र

शूद्र

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू , ते

6

वृश्चिक

Virgo (Virgin)

मंगल

ब्राह्मण

तो, ना, नी, नू , ने, नो, या, यी, यू

7

धनु

Libra (Scale)

गुरू

क्षत्रिय

ये, यो, भा, भी, भू , धा, फा, ड़ा, भे

10

मकर

Capricorn 
(Crocodile)

शनि

वैश्य

भो, जा, जी, खी, खू , खे, खो, गा, गी

11

कुंभ

Aquarius 
(Watercarrier)

शनि

शूद्र

गू , गे, गो, सा, सी, सू , से, सो, दा

12

मीन

Pisces (Fishes)

केतु

ब्राह्मण

दी, दू , थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

पश्चिमी परंपरा में राशि गणना की पद्धति भिन्न है, वह सूर्य आधारित है और मास के अनुसार तय होती है. भारतीय पद्धति निरयण कहलाती है, पश्चिमी सायन.

Nodal Officer:- Sh. Jatin Gandhi, Dy. Commissioner Devasthan Department, Udaipur

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